ग्रेटर नोएडा से भोपाल तक दहेज की बलि चढ़ीं बेटियां! रसूख के आगे कानून लाचार
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बायीं तस्वीर ट्विशा शर्मा की शादी किहे और दायीं तस्वीर दीपिका नागर की शादी की है. 

ग्रेटर नोएडा से भोपाल तक दहेज की बलि चढ़ीं बेटियां! रसूख के आगे कानून लाचार

ग्रेटर नोएडा की दीपिका और भोपाल की ट्विशा की संदिग्ध मौत ने वीआईपी ससुराल वालों को किया बेनकाब, पीड़ित परिवारों को सता रहा है पहुंच के दम पर केस दबाने का डर।


Two Married Women Dowry Death : देश में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के बड़े-बड़े दावों के बीच दहेज के दानवों ने दो और हंसती-खेलती जिंदगियां लील ली हैं। ग्रेटर नोएडा की दीपिका नागर और भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने एक बार फिर हमारे समाज के रसूखदार और तथाकथित वीआईपी चेहरों को बेनकाब कर दिया है। ये दोनों मामले चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि कैसे ऊंची पहुंच और पैसे की हवस के आगे कानून को बौना बनाने की कोशिश की जाती है। इन दोनों ही मामलों में मृतका के शरीर पर मिले गहरे जख्म और टूटती सांसों से पहले किए गए फोन कॉल्स रूह कंपा देने वाले हैं। अब पीड़ित परिवारों को सिर्फ अपनी बेटियों को खोने का ही गम नहीं है, बल्कि उन्हें इस बात का भी गहरा डर है कि आरोपियों का भारी-भरकम रसूख कहीं इंसाफ का गला न घोंट दे।


एक करोड़ के दहेज से भी नहीं भरा पेट, फॉर्च्यूनर के लिए मार डाला
सबसे पहले बात करते हैं ग्रेटर नोएडा की, जहां ईकोटेक 3 थाना क्षेत्र के जलपुरा में रहने वाली दीपिका नागर की शादी के महज 14 महीने बाद ही दर्दनाक मौत हो गई। दीपिका के बेबस पिता संजय ने अपनी लाडली की शादी में अपनी हैसियत से बढ़कर एक करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च किया था। उन्होंने दहेज में चमचमाती स्कॉर्पियो गाड़ी और भारी मात्रा में सोना-चांदी भी दिया था। लेकिन लालच की कोई सीमा नहीं होती। शादी के कुछ दिन बाद ही ससुराल वालों का पेट फिर से बड़ा हो गया और उन्होंने फॉर्च्यूनर गाड़ी और 50 लाख रुपये कैश की नई मांग रख दी। इसके लिए दीपिका को रोज नर्क जैसी प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी, जिसे वह चुपचाप बर्दाश्त करती रही।

मौत से चंद घंटे पहले दीपिका ने रोते हुए लगाया था फोन
इस खौफनाक वारदात के दिन यानी 17 मई को दीपिका ने अपने पिता को फोन कर रोते हुए बताया था कि ससुराल वाले उसे बेरहमी से पीट रहे हैं। बदहवास पिता तुरंत अपनी बेटी के ससुराल पहुंचे, बातचीत की और सब ठीक होने की उम्मीद में शाम को वापस आ गए। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनकी बेटी से आखिरी मुलाकात थी। रात को ससुराल वालों का रूखा फोन आया कि दीपिका छत से नीचे गिर गई है। जब चाचा सुनील ने अस्पताल में दीपिका का शव देखा, तो पूरी कहानी साफ हो गई। दीपिका के पूरे शरीर पर बेरहमी से की गई मारपीट और चोटों के ऐसे निशान थे जो किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा चीर दें। इस मामले में पुलिस ने ससुर मनोज और पति ऋतिक को गिरफ्तार तो कर लिया है, लेकिन परिवार को डर है कि राजनीतिक रूप से बेहद रसूखदार ससुर इस केस को रफा-दफा करवा सकता है।

क्या रसूखदार ससुर और पति बदल देंगे दीपिका की मौत की कहानी?
सवाल नंबर 1: जब पिता शाम को बातचीत करके लौटे थे, तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि दीपिका छत से गिर गई? क्या उसे सचमुच धक्का दिया गया?

सवाल नंबर 2: दीपिका के शरीर पर मिले गंभीर चोट के निशान इस बात का साफ सबूत हैं कि उसे मरने से पहले बुरी तरह प्रताड़ित किया गया, तो फिर इसे सामान्य हादसा दिखाने की कोशिश क्यों की जा रही है?

सवाल नंबर 3: क्या ससुर मनोज का राजनीतिक रसूख और स्थानीय रूतबा पुलिस की निष्पक्ष जांच को प्रभावित नहीं करेगा? क्या पीड़ित परिवार को बिना किसी दबाव के न्याय मिल पाएगा?

भोपाल की ट्विशा शर्मा का मामला भी बिल्कुल ऐसा ही निकला
ठीक ऐसा ही एक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला भोपाल से सामने आया है, जहां नोएडा की रहने वाली 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने 12 मई की रात को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। ट्विशा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल की एक रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी, जो खुद पेशे से क्रिमिनल लॉयर है। शादी के कुछ समय बाद ही मैट्रिमोनियल साइट से हुई यह शादी ट्विशा के लिए एक दुःस्वप्न बन गई। हाई-प्रोफाइल ससुराल वाले दहेज के लिए ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ने लगे। मौत वाली रात ट्विशा ने अपनी मां को फोन कर कहा था कि 'अब वह यह प्रताड़ना और नहीं झेल सकती।' इसके तुरंत बाद उसकी सास ने फोन कर बताया कि ट्विशा सांस नहीं ले रही है और उसे एम्स ले जा रहे हैं।

इंसाफ के लिए गल रही लाश, लाचार पिता की सिस्टम से गुहार
ट्विशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह भले ही फांसी आई हो, लेकिन उसके शरीर पर मिले चोट के निशान साफ बताते हैं कि उसके साथ क्या बर्बरता हुई होगी। आज सात दिन बीत चुके हैं, भोपाल एम्स की मर्चुरी में रखा ट्विशा का शव अब धीरे-धीरे गलने (डीकंपोज) लगा है। लेकिन एक लाचार पिता अपनी बेटी के शव को सिर्फ इसलिए नहीं ले जा रहा क्योंकि उसे सिस्टम पर भरोसा नहीं है। दामाद के क्रिमिनल लॉयर और समधन के पूर्व जज होने के कारण पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के ओएसडी से मिलकर दो बेहद सख्त मांगे रखी हैं। पहली मांग यह कि बेटी का दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में हो और दूसरी यह कि इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर किसी दूसरे राज्य में ट्रांसफर की जाए ताकि रसूखदार लोग गवाहों और सबूतों को प्रभावित न कर सकें।

न्याय व्यवस्था के रखवालों के घर में ही घुट गया बेटी का दम
सवाल नंबर 1: जो परिवार खुद कानून की रक्षा करने और लोगों को न्याय दिलाने का काम करता रहा है, उसी पूर्व जज के घर में एक बेटी की चीखें किसी को क्यों नहीं सुनाई दीं?

सवाल नंबर 2: एक क्रिमिनल लॉयर पति जो कोर्ट में दूसरों के अधिकारों की बात करता है, उसने अपनी ही पत्नी को इस कदर मजबूर क्यों कर दिया कि उसे मौत का रास्ता चुनना पड़ा?

सवाल नंबर 3: सात दिनों से एक पिता अपनी बेटी की गल रही लाश के साथ न्याय की भीख मांग रहा है, हमारा सिस्टम इतना सुस्त और संवेदनहीन क्यों बना हुआ है?


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