Nasik TCS Case : आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस की नासिक शाखा में धर्मांतरण के प्रयासों और यौन उत्पीड़न के आरोपों ने पूरे देश को चौंका दिया है। इस मामले में पुलिस जांच के दौरान एक बेहद खौफनाक मोडस ऑपेरंडी यानी अपराध करने का तरीका सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इसमें वरिष्ठ कर्मचारियों और एक एचआर मैनेजर का एक संगठित नेटवर्क शामिल था। जांच में पता चला है कि आरोपी ट्रेनिंग टीम का हिस्सा थे और उनके पास नए कर्मचारियों की पूरी जानकारी होती थी। यह नेटवर्क विशेष रूप से उन लोगों को अपना निशाना बनाता था जिनकी आर्थिक स्थिति खराब होती थी। पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को भी इसमें फंसाया जाता था। अब तक इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस इस साजिश की तह तक जाने के लिए सबूत जुटा रही है। ख़ास बात ये है कि इस पूरे मोड्यूल का भण्डाफोड़ करने के लिए विशेष अभियान चलाते हुए पुलिस उस ऑफिस में बतौर कर्मचारी शामिल हुई।
साजिश का खौफनाक तरीका और कट्टरपंथ
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि ट्रेनिंग के दौरान हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की जाती थीं। जब कोई कर्मचारी इससे परेशान होता तो एचआर मैनेजर निदा खान उससे संपर्क साधती थीं। निदा खान सहानुभूति दिखाकर धीरे-धीरे उनका भरोसा जीत लेती थीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसके बाद कर्मचारियों की जीवनशैली और पहनावे को बदलने का दबाव बनाया जाता था। एक पीड़िता इस हद तक प्रभावित हुई कि उसने अपने घर से भगवान की तस्वीरें हटा दीं। उसने इस विषय पर अपने परिवार के साथ गंभीर झगड़ा भी किया। आरोपियों की पहचान आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तर के रूप में हुई है। यह पूरा खेल बहुत ही सोची समझी साजिश के तहत खेला जा रहा था।
पुलिस का अंडरकवर ऑपरेशन
नासिक पुलिस ने इस गंभीर साजिश का पर्दाफाश करने के लिए एक गोपनीय अभियान चलाया। महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में ऑफिस परिसर में भेजा गया था। हाउसकीपिंग सेवाएं बाहरी एजेंसी से होने के कारण आरोपियों को कोई शक नहीं हुआ। सादे कपड़ों में पुरुष पुलिसकर्मी भी परिसर के अंदर तैनात किए गए थे। इस अंडरकवर ऑपरेशन के जरिए पुलिस ने आरोपों की पुष्टि की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कदम आरोपियों को बिना सतर्क किए सबूत जुटाने के लिए उठाया गया था। पुलिस की इस मुस्तैदी की वजह से ही नेटवर्क का खुलासा हो सका। अब विशेष जांच दल यानी SIT इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रहा है।
व्हाट्सएप ग्रुप से खुला राज
जांचकर्ताओं को एक व्हाट्सएप ग्रुप का भी पता चला है। इस ग्रुप का उपयोग आरोपी अपने 'टारगेट' पर चर्चा करने के लिए करते थे। ग्रुप में कट्टरपंथी धार्मिक विषयों और कंपनी की आंतरिक राजनीति पर भी बातचीत होती थी। आरोपियों के बीच होने वाली चैट्स से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एसआईटी अब यौन उत्पीड़न और हमले के गंभीर आरोपों की भी जांच कर रही है। यह मामला कॉर्पोरेट जगत में सुरक्षा और कार्यस्थल के माहौल पर बड़े सवाल खड़े करता है। आरोपियों के मोबाइल डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि उनके संपर्कों का पता चल सके। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या उन्हें बाहर से कोई फंडिंग मिल रही थी। फिलहाल पूरे इलाके में पुलिस की कड़ी नजर बनी हुई है।