NEET में धांधली का नया साइलेंट मोड; खाली OMR शीट भरने का खुला खेल
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NEET में धांधली का नया 'साइलेंट मोड'; खाली OMR शीट भरने का खुला खेल

नीट परीक्षा में पेपर लीक नहीं, अब 'सेंटर सेटिंग' का सनसनीखेज खुलासा। खाली ओएमआर शीट पर बाद में सही जवाब भरने का खेल; सरकारी सीट के लिए 20 लाख का रेट तय।


NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है, जिसने देश भर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के पैरों तले जमीन खिसका दी है। अब तक आपने पेपर लीक की कई खबरें सुनी होंगी, लेकिन इस बार दलालों ने धांधली का एक ऐसा 'साइलेंट और अंडरग्राउंड' तरीका निकाला है, जिसे सुनकर खुद जांच एजेंसियां और पुलिस भी सन्न हैं।


दावा किया जा रहा है कि इस नए रैकेट के तहत दलालों द्वारा परीक्षा केंद्र को मैनेज करने, छात्रों से ओएमआर शीट खाली छुड़वाने और बाद में उसमें सही जवाब भरकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने का पूरा खेल रचा जा रहा था। इस काली सेटिंग के लिए प्रति छात्र 20 लाख रुपये का रेट तय किया गया था।

कैसे काम करता है दलालों का यह शातिर 'OMR शीट' रैकेट? जानिए प्लानिंग:
इस रैकेट के काम करने का तरीका बेहद शातिर है, ताकि किसी भी जांच एजेंसी की नजर में आए बिना चुपचाप धांधली को अंजाम दिया जा सके:

खाली ओएमआर शीट छोड़ने की सलाह: दलाल सबसे पहले छात्रों को परीक्षा के दौरान अपनी ओएमआर शीट को पूरी तरह से खाली छोड़ने (Blank) की सख्त हिदायत देते हैं। छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रश्नों को छूना भी नहीं होता।

परीक्षा केंद्र और स्टाफ को 'मैनेज' करना: दलालों का दावा है कि छात्र को सिर्फ अपने परीक्षा केंद्र की सटीक जानकारी उन्हें देनी होती है। इसके बाद, उस विशेष सेंटर के चुनिंदा स्टाफ, इनविजीलेटर और अधिकारियों को मोटी रकम का लालच देकर पहले ही 'मैनेज' (सेट) कर लिया जाता है।

बाद में भरे जाते हैं सर्कल्स: जैसे ही परीक्षा खत्म होती है और बाकी कापियां जमा होती हैं, इस मैनेज्ड स्टाफ की मदद से खाली छोड़ी गई ओएमआर शीट पर ठंडे दिमाग से सही जवाबों के गोले (Circles) खुद भर दिए जाते हैं।

पकड़े जाने का डर नहीं (नो टॉपर पॉलिसी): जांचकर्ताओं या कंप्यूटर स्क्रूटनी को कोई शक न हो और पूरी प्रक्रिया सामान्य लगे, इसके लिए यह रैकेट छात्र को टॉपर बनाने या 700+ नंबर दिलाने का लालच कभी नहीं देता। इसके बजाय, ओएमआर शीट में बेहद चालाकी से उतने ही नंबरों के सही जवाब रंगे जाते हैं, जितने में छात्र को किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में आसानी से कट-ऑफ के तहत सीट मिल जाए।

छात्र शुभम ने रिकॉर्डिंग के साथ किया भंडाफोड़; गुजरात साइबर सेल जांच में जुटी
इस पूरे सुनियोजित और बड़े रैकेट का पर्दाफाश अहमदाबाद के रहने वाले शुभम ठक्कर नाम के एक जागरूक छात्र ने किया है। शुभम ने खुद साल 2023 और 2024 में नीट (NEET) की परीक्षा दी थी और वह इस सिस्टम से वाकिफ था।

जब दलालों ने शुभम से संपर्क किया, तो उसने चालाकी दिखाते हुए दलालों के साथ हुई इस पूरी संदिग्ध डील और बातचीत को खुद रिकॉर्ड (Audio/Video Recording) कर लिया। शुभम ने इन पुख्ता ऑडियो सबूतों के साथ गुजरात पुलिस की साइबर सेल (Cyber Cell) में एक विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई है। छात्र से मिले इन चौंकाने वाले सबूतों के बाद पुलिस ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और इस रैकेट के पीछे जुड़े बड़े सिंडिकेट और कोचिंग-सेंटर नेक्सस की तलाश में ताबड़तोड़ जांच शुरू कर दी है।


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