महाठगी: बैंड बाजे संग बारात लेकर पहुंचे 42 दुल्हों को नहीं मिली दुल्हन
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ये काल्पनिक तस्वीर है एआई द्वारा बनायी गयी 

महाठगी: बैंड बाजे संग बारात लेकर पहुंचे 42 दुल्हों को नहीं मिली दुल्हन

मध्यप्रदेश के देवास में सामूहिक विवाह के नाम पर 10 लाख की ठगी। सोशल मीडिया की फोटो दिखाकर फंसाए गए परिवार। पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच तेज की।


Fraud In The Name Of Marriage: देवास में शादी के नाम पर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ पैसों की ठगी नहीं, बल्कि 42 परिवारों के अरमानों का सौदा है। जिन परिवारों ने अपने बेटों के घर बसने के सपने देखे थे, उन्हें गहरी निराशा हाथ लगी है। यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश थी, जिसे अंजाम देने के लिए मासूमों की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया। यह न केवल उनकी जेब पर भारी चोट थी, बल्कि उनके भरोसे और दिल के साथ किया गया एक क्रूर खिलवाड़ भी है।


सोशल मीडिया बना ठगों का हथियार
आरोपियों ने धोखाधड़ी के लिए मॉडल्स की फोटो का सहारा लिया। उन्होंने सोशल मीडिया से इन लड़कियों की तस्वीरें डाउनलोड कीं। फिर इन्हें इंदौर के एक अनाथालय की लड़कियां बताकर परिवारों को दिखाया गया। यह पूरा खेल ऐसे परिवारों के साथ खेला गया जिनके लड़कों को दुल्हन नहीं मिल रही थी। ठगों ने उनकी इसी कमजोरी और भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसाया। परिजनों का विश्वास जीतने के लिए उन्होंने झूठी कहानियां बुनीं।

कैसे संपर्क में आए पीड़ित
जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने पीड़ितों को फंसाने के लिए एक सुनियोजित तंत्र बनाया था। आरोपियों के कथित ससुर नरसिंह दास बैरागी ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई। उसने मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मध्यस्थ के रूप में काम किया। नरसिंह दास ने ही पीड़ित परिवारों से संपर्क साधा और उन्हें सामूहिक विवाह का लालच दिया। उसने ही लड़के वालों को विश्वास दिलाया कि वे गरीब लड़कियों की शादी करा रहा है। इसी विश्वास के दम पर उसने परिवारों को देवास आने के लिए राजी किया।

10 लाख की ठगी
आरोपियों ने शादी के नाम पर अलग-अलग परिवारों से 12 से 25 हजार रुपये तक वसूले। कुल मिलाकर इस ठगी का आंकड़ा 10 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया है। परिवारों को यह बताया गया था कि शादियां देवास में कराई जाएंगी। उन्हें 25 मई का समय दिया गया और राधागंज के क्लब ग्राउंड में ठहरने का वादा किया गया। इसके अलावा, उन्हें माता टेकरी के दर्शन कराने का भी प्रलोभन दिया गया था।

न मंडप सजा न दुल्हन आई
24 मई की सुबह राधागंज क्लब ग्राउंड पर दूल्हों और उनके परिवारों का जमावड़ा लगा था। लोग सज-धजकर आए थे, क्योंकि उन्हें एक नई शुरुआत की उम्मीद थी। सुबह 8 बजे से ही लोग मंडप के इंतजार में बैठे थे। लेकिन वहां न कोई मंडप था, न रस्मों की तैयारी और न ही दुल्हनें। मुकेश बैरागी और उसकी पत्नी सुनीता ने बार-बार दिलासा दिया कि दुल्हनें रास्ते में हैं। यह उम्मीद का वह सिलसिला था जो देर रात तक परिवारों को गुमराह करता रहा।

रात होते ही खुला राज
दिन भर बहानों का दौर चलता रहा, लेकिन रात 10 बजे तक सब स्पष्ट हो गया। परिवार समझ गए कि वे ठगी के शिकार हो चुके हैं। मुकेश ने बाद में दावा किया कि उसका भाई दिनेश इंदौर में काम करता है और उसने ही शादियां तय कराईं। उसने कहा कि भाई ने ही दूल्हों के नंबर दिए थे। लेकिन फोन करने पर दिनेश का मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इस धोखे ने 42 परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया।

पुलिस की सख्त कार्रवाई
पुलिस ने अब मुकेश बैरागी, सुनीता बैरागी, दिनेश और नरसिंह दास बैरागी के खिलाफ केस दर्ज किया है। एएसपी जयवीर भदौरिया के अनुसार मुकेश और सुनीता को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की टीमें दिनेश और नरसिंह की तलाश में जुट गई हैं। पुलिस उन परिवारों के बयान भी ले रही है जो इस ठगी का शिकार हुए हैं। यह मामला बीएनएस की धारा 318(4) के तहत दर्ज हुआ है। अन्य अधिकारी प्रीति कटारे के अनुसार पीड़ितों के बयानों पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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