लाल किला धमाका चार्जशीट: NIA ने बेनकाब किया ऑपरेशन हेवनली हिंद!
x

लाल किला धमाका चार्जशीट: NIA ने बेनकाब किया 'ऑपरेशन हेवनली हिंद'!

लाल किला ब्लास्ट: 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' के तहत दिल्ली को दहलाने की थी साजिश, पाकिस्तानी हैंडलर्स और घोस्ट सिम के जरिए जुड़े थे डॉक्टर आतंकी; NIA ने खोला हर राज।


Redfort Car Blast Case : 10 नवंबर 2025 की वो शाम दिल्ली कभी नहीं भूल सकती, जब ऐतिहासिक लाल किले की दीवारें एक जबरदस्त धमाके से कांप उठी थीं। लोग चीख रहे थे, गाड़ियां आग के गोले में तब्दील हो चुकी थीं और हवा में बारूद की गंध थी। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिन हाथों में स्टेथोस्कोप और जान बचाने वाली दवाइयां होनी चाहिए, वे हाथ देश की राजधानी को श्मशान बनाने के लिए 'केमिकल बम' तैयार कर रहे थे? राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लाल किला कार बम धमाके में जो 7,500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, उसने एक ऐसे गुप्त और डरावने मिशन का पर्दाफाश किया है, जिसका नाम है'ऑपरेशन हेवनली हिंद'। यह महज एक धमाका नहीं था, बल्कि भारत की जड़ों को हिलाने के लिए पढ़े-लिखे डॉक्टरों और प्रोफेसरों द्वारा बुना गया एक खूनी जाल था, जिसके तार सीधे सरहद पार बैठे आकाओं से जुड़े थे।


क्या है 'ऑपरेशन हेवनली हिंद'?
NIA की जांच में सामने आया कि साल 2022 में श्रीनगर के एक गुप्त ठिकाने पर 'अंसार गजवत-उल-हिंद' (AGuH) के आतंकियों ने एक बैठक की थी। इसी बैठक में 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' की नींव रखी गई। यह मिशन किसी पुराने ढर्रे के आतंकी हमले जैसा नहीं था। इसका मकसद था भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त करना और 'व्हाइट कॉलर टेरर' (पढ़े-लिखे आतंकियों) के जरिए देश के भीतर ही गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना। इस मिशन के लिए उन लोगों को चुना गया जिन पर समाज सबसे ज्यादा भरोसा करता है यानी डॉक्टर और प्रोफेसर। NIA ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि ये डॉक्टर अल-कायदा (AQIS) और अंसार गजवात-उल-हिंद (AGuH) की कट्टरपंथी विचारधारा में इस कदर डूबे थे कि इन्होंने मानवता को ही अपना दुश्मन मान लिया था।

प्रोफेसर मास्टरमाइंड और डॉक्टर बने बम बनाने वाले
इस पूरी साजिश का केंद्र फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का एक असिस्टेंट प्रोफेसर था। डॉ. उमर उन नबी, जो अब मर चुका है, वह इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड था। वह छात्रों को पढ़ाने के बहाने उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलता था।

हैरानी की बात यह है कि इस धमाके के लिए गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों में से 5 पेशे से डॉक्टर हैं। ये डॉक्टर दिन में क्लीनिक में मरीज देखते थे और रात को इंटरनेट के जरिए 'केमिकल बम' बनाने की ट्रेनिंग लेते थे। NIA ने चार्जशीट में बताया है कि इन उच्च शिक्षित लोगों ने मानवता को ताक पर रखकर TATP (Triacetone Triperoxide) जैसा खतरनाक विस्फोटक खुद तैयार किया था, जिसे 'मदर ऑफ साटन' कहा जाता है।

लाल किले के पास मौत का तांडव: 10 नवंबर की वो काली शाम
10 नवंबर 2025 की शाम को लाल किले के पास जो धमाका हुआ, वह 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' का पहला बड़ा हमला था। एक कार में फिट किए गए हाई-इंटेंसिटी बम ने 11 बेगुनाह लोगों की जान ले ली। धमाका इतना भीषण था कि आसपास खड़ी गाड़ियां लोहे के मलबे में तब्दील हो गई थीं। शुरुआती जांच में इसे एक सामान्य ब्लास्ट माना गया, लेकिन जब NIA ने जांच की कमान संभाली, तो परतें खुलती चली गईं और सामने आया डॉक्टरों का वो अंडरग्राउंड नेटवर्क जो देश के कई राज्यों में फैला हुआ था।

पाकिस्तानी हैंडलर्स और 'टेरर फोन' का खेल
साजिश को अंजाम देने के लिए इन 'स्मार्ट आतंकियों' ने तकनीक का जबरदस्त सहारा लिया था। ये लोग सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए 'डुअल-फोन प्रोटोकॉल' अपना रहे थे:

नॉर्मल फोन: परिवार और दोस्तों के लिए, ताकि किसी को शक न हो।

टेरर फोन (घोस्ट सिम): बिना सिम कार्ड के चलने वाले फोन, जिनमें सिर्फ वाई-फाई के जरिए टेलीग्राम और वॉट्सऐप चलाया जाता था। इनके जरिए ये सीधे पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स से निर्देश लेते थे।

हैंडलर्स इन्हें यूट्यूब लिंक भेजते थे, जिनमें दवाइयों और खाद में इस्तेमाल होने वाले केमिकल से बम बनाने का तरीका सिखाया जाता था।

जैश-ए-मोहम्मद की नई 'महिला विंग' का कनेक्शन
NIA की चार्जशीट में एक और सनसनीखेज पहलू जुड़ा है। बताया गया है कि जैश प्रमुख मसूद अजहर ने अक्टूबर 2025 में 'जमात-उल-मुमिनात' नाम से एक महिला आतंकी विंग बनाई है। यह विंग इन डॉक्टर आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने में मदद कर रही थी। जांच में पाया गया कि महिला आतंकियों का इस्तेमाल हथियारों और विस्फोटक की सप्लाई के लिए किया जा रहा था क्योंकि उन पर सुरक्षा बलों को जल्दी शक नहीं होता।

ड्रोन और रॉकेट से हमले की थी तैयारी
NIA को जांच के दौरान इन आतंकियों के ठिकानों से न सिर्फ AK-47 और भारी मात्रा में गोला-बारूद मिला, बल्कि यह भी पता चला कि वे ड्रोन और रॉकेट संचालित IED पर काम कर रहे थे। 'ऑपरेशन हेवनली हिंद' के तहत इनका अगला टारगेट जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठान थे। ये आतंकी लैब के उपकरणों, जैसे MMO एनोड और इलेक्ट्रिक सर्किट को ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से मंगवा रहे थे ताकि पकड़े न जाएं।

7500 पन्नों में दफन है गद्दारी की पूरी दास्तान
NIA ने अपनी चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान और 200 से ज्यादा जब्त किए गए सबूतों को शामिल किया है। आरोपियों के खिलाफ UA(P) Act, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बड़ी बातें जो इस चार्जशीट ने साफ कर दीं:

7500 पन्ने: इतने बड़े दस्तावेज में 588 गवाहों के बयान दर्ज हैं।

AK-47 और ड्रोन्स: आतंकी केवल बम नहीं, बल्कि बड़े हथियारों के जखीरे पर भी काम कर रहे थे।

DNA मिलान: मृतक आरोपी डॉ. उमर की पहचान DNA फिंगरप्रिंटिंग से की गई।

पाकिस्तानी कनेक्शन: पाकिस्तान से बैठे हैंडलर्स लगातार इन डॉक्टरों को उकसा रहे थे।







Read More
Next Story