पाताल में सर्वर रूम बनाकर SSC परीक्षा में सेंध, उत्तराखंड STF का दावा
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'पाताल' में सर्वर रूम बनाकर SSC परीक्षा में सेंध, उत्तराखंड STF का दावा

देहरादून के महादेव डिजिटल सेंटर पर STF की छापेमारी। जमीन के नीचे गुप्त रूम और हाई-टेक केबल्स के जरिए रिमोट एक्सेस से हल किए जा रहे थे SSC परीक्षा के पेपर।


Uttrakhand Paper Leak : उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने साइबर एग्जाम फ्रॉड के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। यह बड़ी कार्रवाई देहरादून के एमकेपी कॉलेज में संचालित "महादेव डिजिटल सेंटर" पर की गई। यहाँ स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की मल्टी टास्किंग स्टाफ परीक्षा के दौरान तकनीकी छेड़छाड़ की जा रही थी। STF ने मौके से ऐसे साक्ष्य जुटाए हैं जो देश के किसी भी परीक्षा केंद्र पर पहली बार देखे गए हैं। परीक्षा केंद्र के भीतर एक गुप्त भूमिगत ढांचा बनाकर पूरे सिस्टम को बाहर से नियंत्रित किया जा रहा था। अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह रिमोट एक्सेस के जरिए पेपर हल करवाए जा रहे थे। इस ऑपरेशन में उत्तर प्रदेश STF की तकनीकी टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने मौके से सभी डिजिटल उपकरण और नेटवर्क स्विच जब्त कर लिए हैं। यह मामला ऑनलाइन परीक्षाओं की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


मोडस ओपेरेंडी: जमीन के नीचे बिछा था 'धोखाधड़ी' का जाल
इस गिरोह का काम करने का तरीका (Modus Operandi) किसी थ्रिलर फिल्म जैसा है। जांच में सामने आया कि परीक्षा केंद्र के सर्वर रूम में जमीन के नीचे एक गुप्त बेसमेंट बनाया गया था। इस गुप्त कक्ष में राउटर, कनेक्टर, स्विच और दर्जनों इथरनेट केबल्स का जाल बिछा था।

जालसाजों ने एक समानांतर नेटवर्क तैयार किया था। इसके जरिए वे असली IP एड्रेस को बाईपास कर देते थे। परीक्षा हॉल में बैठा अभ्यर्थी केवल कंप्यूटर के सामने बैठा रहता था। असल में, उसकी कंप्यूटर स्क्रीन का रिमोट एक्सेस बाहर बैठे विशेषज्ञों के पास होता था। बाहर से ही पेपर हल कर उसे सबमिट कर दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को इतनी सफाई से अंजाम दिया गया कि सिस्टम को इसकी भनक भी नहीं लगी।

देश का पहला ऐसा केस: हाई-टेक संगठित रैकेट का पर्दाफाश
STF अधिकारियों के अनुसार, यह साधारण नकल या पेपर लीक का मामला नहीं है। यह पूरी तरह से एक संगठित साइबर अपराध है। इसमें उच्च स्तर के साइबर विशेषज्ञों की संलिप्तता होने की प्रबल संभावना है।

यह संभवतः देश का पहला मामला है जहाँ पूरा परीक्षा केंद्र ही भूमिगत सर्वर के जरिए हैक किया गया था। इस धांधली के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। STF ने सभी सर्वर लॉग और डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस अब उन अभ्यर्थियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस गिरोह की मदद ली थी।

नेटवर्क की गहराई और आगामी जांच
STF का मानना है कि इस रैकेट के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ने परीक्षा केंद्र संचालकों और तकनीकी सहायकों से पूछताछ शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

महादेव डिजिटल सेंटर के नेटवर्क सिस्टम और विदेशी कनेक्शनों की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या अन्य परीक्षाओं में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ था। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की पुलिस मिलकर इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है। यह खुलासा ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।


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