
इंडी बैठक के बीच ममता को झटका; TMC के 20 सांसदों ने ओम बिरला को लिखा पत्र
पार्टी सांसद काकोली घोष का बड़ा दावा एनडीए (NDA) के साथ गठबंधन करना चाहते हैं बागी सांसद. सुखेंदु शेखर रे का इस्तीफा; केंद्रीय मंत्री के घर गुप्त बैठक.
Big jolt to Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अस्तित्व दिल्ली की चौखट पर पूरी तरह बिखर गया है. टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने सोमवार को एक ऐसा सनसनीखेज और बड़ा खुलासा किया है जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है. काकोली घोष के मुताबिक, दिल्ली में गायब चल रहे टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन के साथ जुड़ने की आधिकारिक इच्छा व्यक्त की है. यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक विभाजन है, जो ठीक उस समय अंजाम दिया गया जब खुद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी गठबंधन 'INDIA' ब्लॉक की बैठक में शामिल हो रहे थे. इन 20 सांसदों के पाला बदलने के फैसले से संसद के भीतर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व लगभग पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है, क्योंकि बागी सांसदों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अभिषेक बनर्जी को अपना नेता स्वीकार नहीं करेंगे.
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर सुखेंदु-शुभेंदु की बैठक; बगावत का आधिकारिक बिगुल
इस महा-विस्फोट की स्क्रिप्ट दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर लिखी गई, जहां एक हाई-प्रोफाइल बंद कमरे की बैठक चल रही है. इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी विशेष रूप से मौजूद रहे.
सुखेंदु शेखर का इस्तीफा: संसद में टीएमसी की सबसे मुखर और वरिष्ठ आवाजों में से एक रहे राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने इस बैठक से ठीक पहले टीएमसी के सभी पदों, प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर इस पूरी बगावत का नेतृत्व अपने हाथों में ले लिया.
बैठक में शामिल मुख्य चेहरे: केंद्रीय मंत्री के घर चल रही इस बैठक में सुखेंदु शेखर के साथ टीएमसी के कुल 6 बागी सांसद मुख्य रूप से शामिल हैं, जिनमें शर्मिला सरकार, जगदीश वासुनिया, कालीपद सोरेन, प्रसून बनर्जी और अरूप चक्रवर्ती के नाम सामने आ चुके हैं.
'15 साल का कुशासन, भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न को जनता ने नकारा'
राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद सुखेंदु शेखर रे ने एक बेहद तीखा बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नीतियों की जमकर तारीफ की और ममता बनर्जी के 15 साल के शासनकाल को पूरी तरह विफल, अत्याचारी और अराजक बताया.
अपने आधिकारिक बयान में रे ने कहा:
"हाल ही में हुए चुनावों में बंगाल के मतदाताओं ने 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर पूर्ण अविश्वास व्यक्त किया है. मतदाताओं ने पार्टी के व्यापक भ्रष्टाचार, महिलाओं पर हो रहे घोर दमन और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में फैली घोर विफलता और अराजकता को पूरी तरह नकार दिया है. जनता ने बंगाल के इतिहास में पहली बार भाजपा को भारी बहुमत से विजयी बनाया है. इसी ऐतिहासिक फैसले को स्वीकार करते हुए, मैं तृणमूल कांग्रेस पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा देता हूं."
विधायकों के बाद अब सांसदों का विद्रोह; बिखरने की कगार पर तृणमूल
टीएमसी में चल रहा यह घटनाक्रम उस बड़े विद्रोह की अगली कड़ी है जो राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद शुरू हुआ था:
60 विधायक पहले ही हो चुके हैं अलग: चुनाव के बाद टीएमसी ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए दो विधायकों रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया था. इसके बाद, इन दोनों नेताओं की अगुवाई में टीएमसी के 80 में से 58 और विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए सदन में अपना एक 'अलग गुट' बना लिया था, जिससे ममता सरकार विधानसभा में अल्पमत में आ गई थी.
संसद में वजूद का संकट: अब विधायकों के बाद 20 लोकसभा सांसदों के एक साथ बागी रुख अपनाने, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पाला बदलने के लिए पत्र भेजने और वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर के इस्तीफे के बाद संसद के दोनों सदनों में भी तृणमूल कांग्रेस का वजूद अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकट में आ गया है.

