ममता की बैठक से 60 विधायक नदारद, TMC में बड़ी बगावत!
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ममता की बैठक से 60 विधायक नदारद, TMC में बड़ी बगावत!

बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में गहराया संकट। ममता बनर्जी के घर बुलाई गई बैठक में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक, टीएमसी ने दी ये सफाई।


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TMC Crisis in West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और बगावत की चिंगारी सुलगने लगी है। शनिवार को इसका एक बेहद हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला, जब ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर बुलाई गई पार्टी विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक को सिर्फ इसलिए रद्द करना पड़ा क्योंकि 80 में से 60 विधायकों ने इस बैठक से दूरी बना ली। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है। चुनाव हारने के महज कुछ ही दिनों के भीतर इतने बड़े पैमाने पर विधायकों का गायब होना ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


फोन बंद कर 'लापता' हुए दिग्गज विधायक, केवल 20 ने ही दी उपस्थिति
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विधायी दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा ममता बनर्जी के घर पर यह आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। लेकिन जब बैठक शुरू होने का समय आया, तो हॉल में सिर्फ 20 विधायक ही मौजूद थे। कम उपस्थिति को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में अनुपस्थित रहने वाले 60 विधायकों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उन सभी के फोन पहुंच से बाहर आ रहे थे। इसके बाद कड़ा फैसला लेते हुए बैठक को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया।

टीएमसी ने दी 'कमजोर' सफाई "अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों में व्यस्त थे नेता"
इस बगावत और फजीहत को छिपाने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने एक बेहद कमजोर दलील पेश की है। पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया कि जो विधायक बैठक में नहीं पहुंच सके, वे दरअसल पार्टी के दो शीर्ष नेताओं अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हिंसक हमलों के बाद उपजे हालातों और सांगठनिक कार्यों में व्यस्त थे।

गौरतलब है कि डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए हमले के ठीक कुछ घंटों बाद हुगली के चंडीतला में टीएमसी के एक और कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी के सिर पर हमला किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 साल तक बंगाल की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली टीएमसी की पकड़ अब राज्य की सियासत से ढीली होने लगी है, जिसका नतीजा पार्टी के भीतर इस विद्रोह के रूप में दिख रहा है।

संकट की घड़ी में कौन खड़ा है ममता के साथ? जानिए कालीघाट पहुंचने वाले नाम
ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन के इस सबसे बुरे दौर में कालीघाट आवास पर वरिष्ठ विधायकों की गैर-मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि तृणमूल के भीतर 'ऑल इज वेल' नहीं है। हालांकि, इस महासंकट के बीच टीएमसी के कुछ सबसे भरोसेमंद और कद्दावर चेहरे जैसे फिरहाद हकीम, नयना बंदोपाध्याय, मदन मित्रा, आशिमा पात्रा और कुणाल घोष बैठक में मौजूद रहे। इन दिग्गजों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि वे इस कठिन परिस्थिति में ममता बनर्जी के पाले में मजबूती से खड़े हैं। लेकिन 60 विधायकों का सामूहिक रूप से किनारा कर लेना यह साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और टीएमसी के भीतर एक बड़ा विस्फोट होना तय है।


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