
आरजी कर मामले में सबूत मिटाने के दावों की नए सिरे से होगी सीबीआई जांच
कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई को एसआईटी बनाने का आदेश दिया। घटना की रात पीड़िता के भोजन करने से लेकर अंतिम संस्कार तक के पूरे घटनाक्रम की दोबारा जांच होगी।
RG Kar Case Reinvestigation: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आरजी कर अस्पताल मामले में लगे गंभीर आरोपों की नए सिरे से जांच करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने इसके लिए सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने को कहा है। यह विशेष टीम उन दावों की फिर से गहनता से पड़ताल करेगी, जिनमें कहा गया है कि वारदात के बाद सबूतों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई थी।
भोजन से लेकर अंतिम संस्कार तक की कड़ियों को जोड़ेगी सीबीआई
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसी को एक-एक पल का ब्यौरा खंगालने का निर्देश दिया है। नए आदेश के मुताबिक, यह तीन सदस्यीय दल पीड़िता प्रशिक्षु डॉक्टर द्वारा नौ अगस्त 2024 की रात को भोजन करने से लेकर उनके अंतिम संस्कार तक की सभी घटनाओं की टाइमलाइन की जांच करेगा। कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति से दोबारा पूछताछ करने की पूरी आजादी दी है।
दो जजों की खंडपीठ ने दिया 48 घंटे का समय
यह सख्त आदेश न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने जारी किया है। पीठ ने निर्देश दिया है कि सीबीआई के संयुक्त निदेशक इस एसआईटी के प्रमुख होंगे। टीम के बाकी दो सदस्यों का चयन इस अदालती आदेश के 48 घंटों के भीतर करना होगा। अदालत ने कहा कि इस भयावह घटना के सामाजिक परिणामों को देखते हुए मामले को दबाने की कोशिशों की जांच बेहद जरूरी है।
पीड़ित माता-पिता की याचिका पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन
प्रशिक्षु डॉक्टर के माता-पिता ने अपनी बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध की विस्तृत जांच के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पीड़ित परिवार का शुरू से दावा है कि इस अपराध में एक से अधिक व्यक्ति शामिल थे और मुख्य आरोपियों को बचाया जा रहा है। इसी याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने अब 25 जून तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा है, जिस दिन अगली सुनवाई होगी।
देश भर में फैला था आक्रोश, संजय रॉय को मिल चुकी है सजा
बता दें कि 9 अगस्त 2024 की रात को आरजी कर अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना से पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया था। मामले की शुरुआती जांच के बाद मुख्य आरोपी नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को अदालत द्वारा पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। अब हाई कोर्ट का यह नया आदेश सबूत नष्ट करने वाले चेहरों को बेनकाब करेगा।
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