Rabri Devi's Bungalow Controversy: बिहार की सियासत में इन दिनों सरकारी बंगले को लेकर मचा घमासान अब पूरी तरह से अंधविश्वास, अपशकुन और सियासी डर के इर्द-गिर्द सिमट गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को अपना 21 साल पुराना '10 सर्कुलर रोड' स्थित आवास खाली करने का नोटिस मिला है, लेकिन वह किसी भी कीमत पर नए आवंटित बंगले '39 हार्डिंग रोड' में जाने को तैयार नहीं हैं। राजनीतिक गलियारों में बेहद पुख्ता चर्चा है कि इस जिद के पीछे कोई राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि एक गहरा 'अपशकुन' और अंधविश्वास का डर है। पटना का 39 हार्डिंग रोड स्थित यह बंगला बिहार के सियासी हलकों में शुरू से ही बेहद 'अनलकी' माना जाता रहा है। धारणा यह है कि जो भी नेता या मंत्री इस बंगले में रहने गया, उसका राजनीतिक करियर ढलान पर चला गया और वह दोबारा कभी मंत्री नहीं बन पाया।
राबड़ी देवी की खुली चुनौती के बाद आवास पहुंची पटना पुलिस, दिया 15 दिन का समय
इस अंधविश्वास के साए के बीच शुक्रवार को तब तनाव बढ़ गया जब राबड़ी देवी ने तीखे तेवर दिखाते हुए साफ कह दिया, "सरकार पुलिस भेजकर इस बंगले को खाली करवाए, लेकिन मैं यह बंगला खाली नहीं करूंगी।" इस बयान के कुछ ही घंटों बाद पटना सचिवालय थाने की पुलिस और जिला प्रशासन की टीम लाव-लश्कर के साथ राबड़ी आवास पहुंच गई। हालांकि, प्रशासन ने कोई आक्रामक रुख अपनाने के बजाय राबड़ी देवी से बेहद विनम्रतापूर्वक आग्रह किया कि वे अगले 15 दिनों के भीतर इस बंगले को खाली कर दें। गौरतलब है कि सरकार ने यह 10 नंबर बंगला अब सूबे के नए मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया है।
'39 हार्डिंग रोड' का वो खौफनाक इतिहास, जिसने बड़े-बड़े दिग्गजों को किया 'अशक्त'
इस बंगले को लेकर जो अपशकुन की बातें कही जा रही हैं, उसके पीछे उन कद्दावर नेताओं की एक लंबी सूची है जो कभी सत्ता के शीर्ष पर थे, लेकिन इस घर में कदम रखते ही हाशिए पर चले गए:
भूपेंद्र प्रसाद वर्मा (पूर्व मंत्री, आरजेडी): इस बंगले में रहने आए, फिर कभी कैबिनेट में वापसी नहीं हुई।
मदन मोहन झा (पूर्व मंत्री, कांग्रेस): इस घर में रहने के बाद उनका राजनीतिक ग्राफ लगातार गिरता चला गया।
डॉ. शमीम अहमद (पूर्व मंत्री, आरजेडी): इस आवास में शिफ्ट होने के बाद वे दोबारा मंत्री पद की शपथ नहीं ले पाए।
चंद्र मोहन राय (पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, बीजेपी): भाजपा के बेहद सीनियर नेता थे, लेकिन इस बंगले ने उनका भी सियासी समीकरण बिगाड़ दिया।
विनोद नारायण झा (पूर्व मंत्री, बीजेपी): इस अशुभ माने जाने वाले बंगले में रहने के बाद वे भी दोबारा मंत्री नहीं बन सके।
रामसूरत राय (पूर्व मंत्री, बीजेपी): नीतीश कैबिनेट में भारी रसूख रखने वाले इस नेता की भी इस बंगले में आने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी नहीं हो सकी।
मजार, मस्जिद और हज भवन का त्रिकोण: स्थानीय लोगों के अपने दावे
इस बंगले से जुड़े अंधविश्वास को बल देने के लिए इसके भौगोलिक और धार्मिक ढांचे को भी वजह माना जाता है। इस बंगले के परिसर के अंदर ही एक बेहद प्राचीन मजार स्थित है। इसके अलावा, बंगले के ठीक दूसरी तरफ पटना का प्रसिद्ध हज भवन है और इसके पिछले हिस्से में एक मस्जिद भी है। स्थानीय लोगों और वास्तु के जानकारों का मानना है कि इन संरचनाओं के बीच स्थित इस बंगले का वास्तु या ऊर्जा सत्ता और राजनेताओं के अनुकूल नहीं बैठती। यही वजह है कि चुनावी साल में लालू परिवार किसी भी तरह का 'अपशकुन' मोल नहीं लेना चाहता और अपने 'लकी' माने जाने वाले 10 सर्कुलर रोड आवास को छोड़ने से कतरा रहा है।