
बंगाल में सड़कों पर नमाज बंद, 107 साल बाद रेड रोड पर नहीं हुई ईद की नमाज
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार के नए नियमों के तहत बकरीद पर सड़कों पर नमाज रोकने का दिखा बड़ा असर, कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड की जगह ग्राउंड में जुटे नमाजी।
Eid Namaz In West Bengal: पश्चिम बंगाल में इस बार बकरीद का त्योहार शांति और भाईचारे के साथ मनाया गया। राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब किसी भी सार्वजनिक सड़क पर नमाज अता नहीं की गई। राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था और जनसुविधा को देखते हुए पहले ही इस संबंध में कड़े आदेश जारी कर दिए थे। इसमें कोलकाता का मशहूर रेड रोड भी शामिल था, बीते 107 सालों से नमाज़ अता होती आ रही थी।
बीजेपी सरकार के आने के बाद बड़ा बदलाव
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार आने के बाद कई बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। केंद्र सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाएं अब सीधे राज्य के लोगों को मिलने लगी हैं। इसके साथ ही पिछली सरकार की कई गैर-जरूरी योजनाओं को बंद कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत गाय-भैंसों की कुर्बानी को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं।
रेड रोड पर लगा 107 साल पुराना ब्रेक
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार ने सड़कों पर नमाज अता करने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। आज त्योहार के दिन इस फैसले का असर जमीन पर साफ दिखाई दिया। राज्य की सभी प्रमुख सड़कों के साथ ही 107 साल के इतिहास में पहली बार कोलकाता के रेड रोड पर भी नमाज अता नहीं की गई। सभी ने तय दिशा-निर्देशों का पालन किया।
कोलकाता की लाइफलाइन है यह रेड रोड
रेड रोड को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की लाइफलाइन माना जाता है। शहर के बीचों-बीच दौड़ती हुई यह सबसे मुख्य और व्यस्त सड़क मार्ग है। यह रोड विक्टोरिया मेमोरियल, फोर्ट विलियम और रेस कोर्स जैसे प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के बिल्कुल करीब से गुजरती है। अक्सर इसका उपयोग गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की राजकीय परेड के लिए किया जाता है।
दूसरे विश्वयुद्ध में बनी थी हवाईपट्टी
इस ऐतिहासिक सड़क का महत्व काफी पुराना है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस रोड को अस्थाई हवाईपट्टी में तब्दील कर दिया गया था। उस समय रॉयल एयरफोर्स के लड़ाकू विमान इसी रेड रोड पर लैंड हुए थे। इतने महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग को त्योहारों के दौरान नमाज अता करने के लिए कई घंटों तक पूरी तरह बंद रखना पड़ता था।
साल 1919 में इस वजह से शुरू हुई परंपरा
रेड रोड पर साल 1919 से ईद की नमाज अता की जा रही थी। साल में दो बार होने वाले इस बड़े आयोजन में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भी शामिल होकर बधाई देती थीं। दरअसल रेड रोड से पहले शहीद मीनार मैदान में नमाज होती थी। साल 1919 में भारी बारिश के कारण शहीद मीनार मैदान में पानी भर गया था, जिसके बाद यह आयोजन रेड रोड पर होने लगा था।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड बना नमाज का नया ठिकाना
आज बकरीद के मौके पर रेड रोड की जगह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नमाज अता की गई। शुभेंदु सरकार ने सत्ता संभालते ही साफ किया था कि सड़क पर आयोजन से घंटों लंबा जाम लग जाता है। इससे स्थानीय निवासियों और एम्बुलेंस आदि को आने-जाने में भारी परेशानी होती है। शुरुआत में इस आदेश का विरोध हुआ, लेकिन बाद में मुस्लिम समाज ने इसका समर्थन किया।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने फैसले का किया स्वागत
कोलकाता की प्रसिद्ध नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने सरकार के इस बदलाव को एक सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि रेड रोड से ब्रिगेड परेड ग्राउंड महज आधा किलोमीटर की दूरी पर है। वहां काफी ज्यादा खुली जगह मौजूद है। इससे नमाजियों को सुविधा होगी और पुलिस प्रशासन के लिए भी यातायात और सुरक्षा व्यवस्था संभालना बेहद आसान रहेगा।
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