
बंगाल में मदरसों का राज्यव्यापी सर्वे; शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला
बीजेपी सरकार ने सभी DM से 5 जुलाई तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट; पाठ्यक्रम और स्टाफ का जुटेगा डेटा। सपा सांसद राजीव राय और मौलाना रशीदी ने उठाए गंभीर सवाल।
Madarsa in West Bengal: पश्चिम बंगाल की सियासत में ऐतिहासिक बदलाव के बाद नवगठित भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य में 15 वर्षों से शासन कर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता से बेदखल करने के महज एक महीने बाद ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने राज्यव्यापी मदरसा सर्वे शुरू कर दिया है।
अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा 5 जून को जारी आधिकारिक अधिसूचना के तहत, राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को अपने-अपने क्षेत्रों के मदरसों का सघन सर्वेक्षण करने और 5 जुलाई तक इसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सत्यापित करना है कि राज्य में चल रहे सभी मदरसे मौजूदा नियमों के दायरे में हैं या नहीं और उनके पास संचालन के लिए आवश्यक वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
सर्वे में क्या-क्या जांचेगी सरकार? जानिए पूरा ब्लूप्रिंट
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस राज्यव्यापी अभियान के तहत जिला प्रशासनों को हर छोटे-बड़े मदरसे की कुंडली खंगालने को कहा गया है:
पंजीकरण और दस्तावेज: मदरसे का सटीक स्थान, उसकी स्थापना का वर्ष, आधिकारिक पंजीकरण का विवरण और सभी वैध कानूनी दस्तावेजों की उपलब्धता की जांच होगी।
स्टाफ और छात्र संख्या: संस्थान में पढ़ रहे विद्यार्थियों (Students) की कुल संख्या के साथ-साथ वहां कार्यरत शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का पूरा डेटा एकत्र किया जाएगा।
मदरसे की श्रेणी: रिपोर्ट में यह साफ करना होगा कि संबंधित मदरसा आवासीय है, सरकार द्वारा सहायता प्राप्त निजी संस्थान है या फिर पूरी तरह से गैर-सहायता प्राप्त है।
पाठ्यक्रम की समीक्षा: मदरसों के भीतर आधुनिक और धार्मिक रूप से पढ़ाए जा रहे सभी पाठ्यक्रमों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होगा।
राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस कवायद का मकसद मदरसा शिक्षा क्षेत्र में भविष्य की बेहतर योजनाएं बनाने के लिए एक 'अपडेटेड डेटाबेस' तैयार करना है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि वर्तमान में शैक्षणिक ढांचे या पाठ्यक्रम में बदलाव का कोई सीधा प्रस्ताव नहीं है, लेकिन जांच के दौरान मिलने वाली किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता और अनधिकृत गतिविधि की अलग से गहन जांच कराई जाएगी।
वंदे मातरम की अनिवार्यता के बीच सियासी घमासान; विपक्ष ने बताया अवसरवादिता
बंगाल में सत्ता बदलते ही शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं। हाल ही में बीजेपी सरकार ने राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों और मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य कर दिया है। इस नए सर्वे के आदेश के बाद देश भर के राजनेताओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं:
सपा सांसद राजीव राय का हमला: समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जब वे खुद टीएमसी (TMC) में थे, तब उन्होंने यह सर्वेक्षण क्यों नहीं कराया? राय ने इन्हें अवसरवादी बताते हुए कहा कि इनके पास न तो कोई दूरदृष्टि है और न ही कोई विचारधारा, इनके लिए सिर्फ सत्ता की कुर्सी ही सब कुछ है।
मौलाना साजिद रशीदी की दोटूक: अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने सरकार के अधिकार क्षेत्र को लेकर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल में कुल 614 सरकारी वित्त पोषित मदरसे हैं, जिनका बुनियादी ढांचा और फंड सरकार देखती है, वहां सरकार बदलाव कर सकती है। लेकिन, इनके अलावा हजारों मदरसे ऐसे हैं जो पूरी तरह मुस्लिम समुदाय के 2.5 फीसदी 'जकात' (दान) के पैसों से चलते हैं। रशीदी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकार जकात से चलने वाले मदरसों के आंतरिक कामकाज में हस्तक्षेप न करे, उनके लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन का निर्देश जारी करना ही काफी है।
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