
TMC में उठे बगावत से सुर! हार के बाद ममता और अभिषेक बनर्जी पर उठे गंभीर सवाल
पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस में बिखराव। तीन प्रवक्ता सस्पेंड, मनोज तिवारी ने लगाया टिकट के बदले 5 करोड़ रुपये मांगने का सनसनीखेज आरोप।
Crisis in TMC : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली हार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आंतरिक एकजुटता को हिलाकर रख दिया है। पार्टी के भीतर से ही अब शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच बढ़ते असंतोष को दबाने के लिए पार्टी ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को टीएमसी ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी बयानों के आरोप में अपने तीन मुख्य प्रवक्ताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया।
जानकारों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी के लिए अनुशासन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। निलंबित नेताओं और असंतुष्टों का कहना है कि पार्टी में अब लोकतंत्र नहीं बचा है। आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरे पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं।
टिकट के बदले 5 करोड़ की मांग
पूर्व क्रिकेटर और ममता कैबिनेट में खेल राज्य मंत्री रहे मनोज तिवारी ने पार्टी नेतृत्व पर सबसे बड़ा हमला बोला है। तिवारी ने सनसनीखेज दावा किया कि 2026 के चुनावों में टिकट देने के बदले प्रत्येक उम्मीदवार से 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने यह मोटी रकम देने से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने वरिष्ठ मंत्री अरूप विश्वास की खेल संबंधी समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पिछले साल मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान हुए कुप्रबंधन का जिक्र करते हुए नेतृत्व की आलोचना की।
प्रवक्ता ने मांगी सुवेंदु से माफी
टीएमसी के चर्चित चेहरा रहे प्रवक्ता रिजु दत्ता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सबको चौंका दिया। दत्ता ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और अन्य विपक्षी नेताओं से अपनी पुरानी "अपमानजनक" टिप्पणियों के लिए माफी मांगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी नेतृत्व के दबाव और धमकियों के कारण उन्हें टीवी डिबेट्स में ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना पड़ता था। दत्ता ने सुरक्षा और समर्थन के लिए भाजपा का आभार भी जताया, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
अभिषेक बनर्जी के कामकाज पर सवाल
पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी गुस्सा फूट पड़ा है। निलंबित प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी के बड़े नेताओं को अभिषेक से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। मालदा के कद्दावर नेता कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने भी हार का ठीकरा अभिषेक के 'स्टाइल ऑफ फंक्शनिंग' पर फोड़ा है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार न करना और उन तक पहुंच की कमी हार की मुख्य वजह बनी।
अनुशासन का डंडा और चुप्पी
पार्टी ने कोहिनूर मजूमदार, कार्तिक घोष और पापिया घोष जैसे नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। पापिया घोष, वरिष्ठ नेता रवींद्रनाथ घोष की बेटी हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व की आलोचना की थी। इस पूरे विवाद और बगावत पर टीएमसी के दिग्गज नेता डेरेक ओ'ब्रायन और चंद्रिमा भट्टाचार्य ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
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