नीट 2026 पेपर लीक की पूरी कहानी, घोटाले का केंद्र बना राजस्थान का सीकर
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सीबीआई (CBI) अधिकारियों ने मंगलवार (12 मई) को नासिक में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के संबंध में आरोपी शुभम खैरनार को हिरासत में लिया। फोटो: पीटीआई (PTI)

नीट 2026 पेपर लीक की पूरी कहानी, घोटाले का केंद्र बना राजस्थान का सीकर

नासिक से शुरू होकर सीकर के पेइंग गेस्ट हाउस तक पहुंचा नीट 2026 पेपर लीक का जाल। यह साजिश महाराष्ट्र में 'गेस पेपर' से शुरू हुई थी, जिसमें 410 प्रश्न शामिल थे...


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नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) परीक्षा को लेकर मचे घमासान के बीच जांच एजेंसियां इस बड़े घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। सुप्रीम कोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पुनर्गठन की मांग वाली याचिका और परीक्षा के रद्दीकरण ने 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। जांच के दौरान इस पूरे घोटाले का केंद्र राजस्थान का सीकर शहर बनकर उभरा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह साजिश महाराष्ट्र के नासिक में छपे एक 'गेस पेपर' से शुरू हुई थी, जिसमें 410 प्रश्न शामिल थे। वहां से यह पेपर हरियाणा और जयपुर होते हुए सीकर पहुंचा, जहां इसे छात्रों के हॉस्टल्स और कोचिंग संस्थानों में व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से तेज़ी से फैलाया गया।

व्हिसलब्लोअर का खुलासा और जांच का अखिल भारतीय नेटवर्क

इस सनसनीखेज लीक का खुलासा तब हुआ, जब सीकर के एक पेइंग गेस्ट (PG) मालिक को अपने यहां रहने वाली छात्राओं के पास एक हस्तलिखित प्रश्न पत्र मिला। यह पेपर केरल के एक मेडिकल छात्र ने अपने पिता को भेजा था, जो सीकर में पीजी चलाते हैं। जब यह पेपर एक स्थानीय कोचिंग समन्वयक के पास पहुंचा तो वह दंग रह गया। क्योंकि 410 में से 120 प्रश्न हूबहू असली नीट पेपर से मेल खा रहे थे। इनमें केमिस्ट्री के 35 सटीक प्रश्न और बायोलॉजी के कई सवाल शामिल थे, जो कुल 720 अंकों में से 600 अंकों का भार रखते थे। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने अब तक इस मामले में मुख्य आरोपी मनीष यादव और सीकर के करियर काउंसलर राकेश कुमार मंडावरिया सहित 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

कीमतों का उतार-चढ़ाव और 'प्राइवेट माफिया' व्हाट्सएप ग्रुप

जांच में सामने आया है कि यह लीक पेपर शुरू में 5 लाख रुपये में बेचा जा रहा था। लेकिन जैसे-जैसे यह अधिक हाथों तक पहुंचा, इसकी कीमत गिरकर 30,000 रुपये तक रह गई। सीबीआई ने 'प्राइवेट माफिया' नामक एक गुप्त व्हाट्सएप ग्रुप की पहचान की है, जहां भारी भुगतान करने वाले सदस्यों के साथ ये प्रश्न साझा किए गए थे। सीकर से शुरू होकर यह लीक केरल से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैल गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जब पीजी मालिक ने शुरू में नासिक से आए इस संदिग्ध पेपर को लेकर सीकर पुलिस से संपर्क किया तो उसकी शिकायत को महज एक अफवाह बताकर खारिज कर दिया गया था। बाद में एनटीए को भेजे गए एक ईमेल और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की सक्रियता के बाद एसओजी और सीबीआई ने इस पर बड़ी कार्रवाई शुरू की।

कोचिंग हब के रूप में सीकर का उदय और पेपर लीक का इतिहास

शेखावाटी क्षेत्र का सीकर शहर अब कोटा के बाद भारत के दूसरे सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में उभर रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था का लगभग 30-35 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर इन शैक्षणिक संस्थानों पर निर्भर है। हर साल 2 से 3 लाख छात्र यहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए आते हैं। सीकर में छात्रों का चयन अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है, जिसने इसे नकल माफियाओं के लिए एक प्राथमिक लक्ष्य बना दिया है। राजस्थान में पेपर लीक का इतिहास काफी पुराना रहा है; इससे पहले रीट (REET), पुलिस सब-इंस्पेक्टर और वरिष्ठ शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में भी इसी तरह के बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं, जिन्होंने राज्य की चयन प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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