
3 घंटे तक बांधे रखती है ‘Patriot’ की कहानी, जासूसी थ्रिलर में छाए Mammootty- Mohanlal
Patriot फिल्म रिव्यू: Mahesh Narayanan की स्पाई थ्रिलर में Mammootty और Mohanlal की दमदार जोड़ी नजर आती है.
दक्षिण भारतीय सिनेमा की बड़ी फिल्मों में अब जासूसी और पॉलिटिकल थ्रिलर का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसी कड़ी में आई फिल्म Patriot दर्शकों के सामने एक जटिल लेकिन दिलचस्प कहानी पेश करती है. इस फिल्म को मशहूर निर्देशक Mahesh Narayanan ने बनाया है. लगभग तीन घंटे लंबी इस फिल्म में कहानी कई देशों और शहरों के बीच घूमती है और हर मोड़ पर नए राज खोलती है. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दो दिग्गज सितारे Mammootty और Mohanlal एक साथ नजर आते हैं. दोनों की मौजूदगी फिल्म को और भी खास बना देती है.
फिल्म की कहानी क्या है
फिल्म की कहानी डॉ. डेनियल जेम्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार ममूटी ने निभाया है. डेनियल भारत के डिफेंस रिसर्च विंग में काम करता है. एक दिन देश की पूर्व प्रधानमंत्री Revathy द्वारा निभाया गया किरदार नलिनी उसे एक बेहद गुप्त मिशन सौंपती है. उसे पता लगाना है कि “Periscope” नाम के एक शक्तिशाली स्पायवेयर का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा. आरोप है कि केंद्रीय मंत्री जेपी सुंदरम और उसका बेटा शक्ति इस तकनीक का इस्तेमाल आम नागरिकों की जासूसी करने के लिए कर रहे हैं. लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही नलिनी की मौत हो जाती है और डेनियल को देश छोड़कर भागना पड़ता है. वह ब्रिटेन जाकर “विमाथन – द डिसिडेंट” नाम से एक व्लॉग शुरू करता है और सरकार के खिलाफ सबूत सामने लाने की कोशिश करता है. इसी दौरान उसका पुराना दोस्त रहीम नाइक, जिसका किरदार मोहनलाल निभाते हैं, उसकी मदद के लिए आगे आता है। इसके बाद कहानी में कई बड़े खुलासे और एक्शन से भरपूर घटनाएं सामने आती हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत – शानदार लेखन
इस फिल्म की असली ताकत इसका लेखन है. निर्देशक महेश नारायणन ने कहानी को बहुत ही बारीकी से बुना है. फिल्म में दर्शकों को सब कुछ सीधे-सीधे नहीं बताया जाता. बल्कि कई घटनाओं और बातचीत के जरिए धीरे-धीरे कहानी खुलती है। यही चीज इसे एक इंटेलिजेंट स्पाई थ्रिलर बनाती है. पहले ही सीन में नलिनी और मंत्री जेपी सुंदरम के बीच होने वाली बातचीत से कहानी के दांव-पेंच साफ होने लगते हैं. बिना ज्यादा डायलॉग के भी दर्शक समझ जाते हैं कि मामला कितना गंभीर है. भारतीय फिल्मों में अक्सर बड़े बजट और एक्शन पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, लेकिन इस फिल्म में लेखन और कहानी को प्राथमिकता दी गई है.
फिल्म की कमजोरियां भी हैं
हालांकि फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है. कुछ जगह कहानी थोड़ी उलझी हुई लगती है. कई किरदारों की पृष्ठभूमि एक ही जगह से जुड़ी दिखाई जाती है, जो थोड़ी बनावटी लग सकती है. इसके अलावा जब मोहनलाल का किरदार कहानी में आता है, तो फिल्म थोड़ी देर के लिए फ्लैशबैक में चली जाती है. यह हिस्सा कुछ दर्शकों को धीमा लग सकता है, क्योंकि इससे पहले तक फिल्म की रफ्तार काफी तेज रहती है.
एक्टिंग – ममूटी ने फिर जीता दिल
एक्टिंग की बात करें तो ममूटी पूरी फिल्म में छाए रहते हैं. उनका किरदार शांत, गंभीर और सोचने वाला है, जिसे उन्होंने बेहद सहजता से निभाया है. फिल्म खत्म होने तक डॉ. डेनियल जेम्स का किरदार इतना मजबूत बन जाता है कि भविष्य में इस पर सीरीज या फ्रेंचाइजी बनने की संभावना भी दिखती है. वहीं Fahadh Faasil ने शक्ति का किरदार निभाया है. उन्हें अभिनय दिखाने का मौका जरूर मिला, लेकिन उनका रोल थोड़ा क्लिशे कॉरपोरेट विलेन जैसा लगता है. मोहलाल की एंट्री फिल्म में एक खास पल बनाती है. खासतौर पर एक सीन जिसमें उनका किरदार बीमार ममूटी की देखभाल करता है, वह दर्शकों के दिल को छू लेता है.
कुल मिलाकर कैसी है फिल्म
Patriot एक महत्वाकांक्षी फिल्म है. यह कभी-कभी थोड़ी उलझी हुई और लंबी लग सकती है, लेकिन फिर भी यह दर्शकों का ध्यान बनाए रखने में सफल रहती है. फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका मजबूत लेखन और दो महान अभिनेताओं की मौजूदगी है. यह सिर्फ एक्शन और ग्लैमर पर निर्भर फिल्म नहीं है, बल्कि सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी भी पेश करती है. आज के दौर में जब कई फिल्में सिर्फ बड़े एक्शन सीन पर टिकी होती हैं, Patriot यह साबित करती है कि अच्छी कहानी और दमदार अभिनय ही किसी फिल्म को खास बनाते हैं.

