एक बच्ची की आखिरी पुकार की कहानी, दिल दहला देगी द वॉयस ऑफ हिंद रजब
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एक बच्ची की आखिरी पुकार की कहानी, दिल दहला देगी 'द वॉयस ऑफ हिंद रजब'

गाजा की 5 वर्षीय हिंद रजब की अंतिम फोन कॉल्स पर आधारित फिल्म ‘द वॉयस ऑफ हिंद रजब’ एक मासूम की दर्दनाक कहानी को पर्दे पर जीवंत करती है।


ट्यूनीशियाई फिल्मकार काउथर बेन हानिया की डॉक्यूड्रामा फिल्म The Voice of Hind Rajab का सबसे मार्मिक प्रदर्शन वास्तव में कभी पर्दे पर हुआ ही नहीं। फिल्म के केंद्र में एक वास्तविक ऑडियो रिकॉर्डिंग है—एक पांच वर्षीय बच्ची की कांपती हुई आवाज़, जो उसकी जिंदगी के आखिरी दिन रिकॉर्ड हुई थी। फिल्म में उसके आसपास दिखाई गई लगभग हर चीज़ पुनर्निर्मित (स्टेज्ड) है, लेकिन वास्तविक आवाज़ और उसके इर्द-गिर्द रची गई नाटकीय प्रस्तुति के बीच का तनाव ही फिल्म को बेहद भावनात्मक और असहनीय बना देता है।

हिंद रजब की दर्दनाक कहानी

29 जनवरी 2024 को गाजा सिटी में पांच वर्षीय हिंद रजब अपने परिवार के साथ एक कार में फंसी हुई थी। परिवार शहर से सुरक्षित स्थान की ओर भागने की कोशिश कर रहा था, तभी कार पर इजरायली गोलीबारी हुई। इस हमले में उसकी मौसी, मौसा और चार चचेरे भाई-बहनों की मौत हो गई। हिंद अकेली जीवित बची थी।

घंटों तक वह फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसायटी के स्वयंसेवकों से फोन पर बात करती रही और बार-बार मदद की गुहार लगाती रही। उसके लिए भेजी गई एम्बुलेंस भी वहां तक नहीं पहुंच सकी। रास्ते में एम्बुलेंस के दोनों पैरामेडिक्स मारे गए। कई दिनों बाद हिंद का शव बरामद हुआ।इन फोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग बाद में सार्वजनिक हुईं और पूरी दुनिया में सुनी गईं। काउथर बेन हानिया ने अपनी फिल्म इन्हीं रिकॉर्डिंग्स को आधार बनाकर बनाई है।

कैमरा कभी घटनास्थल तक नहीं जाता

फिल्म की सबसे साहसिक और विवादास्पद विशेषता यह है कि निर्देशक कैमरे को कभी घटनास्थल तक नहीं ले जातीं। पूरी फिल्म वेस्ट बैंक स्थित रेड क्रिसेंट के एक साधारण से कार्यालय के भीतर घटित होती है।कैमरा कार्यालय के संकरे गलियारों, डेस्कों और कांच की दीवारों वाले कमरों के बीच घूमता है। धीरे-धीरे पूरा कार्यालय एक ऐसे स्थान में बदल जाता है जहां सांसें थमी हुई महसूस होती हैं।

गाजा से लगातार आने वाली कॉल्स के जरिए भय और अफरातफरी का माहौल बनता है। गोलाबारी, टैंक और गोलियों से छलनी कार कभी दिखाई नहीं जाती। दर्शक केवल फोन के माध्यम से आती आवाज़ों, शोर और गोलियों की ध्वनि सुनते हैं।फिल्म में हमले का कोई दृश्य पुनर्निर्माण नहीं है। कैमरा किसी घाव या हिंसा को नहीं दिखाता। दर्शकों के सामने केवल एक कमरा, उसमें बैठे लोग और हिंद की आवाज़ मौजूद रहती है।

प्रक्रिया में छिपा है भयावह सच

फिल्म की पूरी कहानी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के इर्द-गिर्द घूमती है और यहीं इसका सबसे भयावह पक्ष सामने आता है।पहली कॉल हिंद की किशोर चचेरी बहन लयान की आती है। वह केवल इतना कह पाती है कि एक टैंक उनकी ओर गोलीबारी कर रहा है, फिर संपर्क टूट जाता है।जब स्वयंसेवक दोबारा फोन मिलाते हैं तो दूसरी तरफ हिंद होती है, जो अब अपने मृत परिजनों के बीच अकेली बैठी है।

ओमर नामक स्वयंसेवक उससे बात करता है, लेकिन उसकी स्थिति इतनी विचलित करने वाली है कि वह बच्ची को ज्यादा सांत्वना नहीं दे पाता। इसके बाद राना नामक स्वयंसेविका हिंद को बातचीत में उलझाए रखती है, जबकि ओमर और समन्वयक महदी एम्बुलेंस भेजने की कोशिश करते हैं।

केवल आठ मिनट की दूरी, फिर भी मदद नहीं पहुंची

सबसे दर्दनाक तथ्य यह है कि हिंद उस समय नजदीकी एम्बुलेंस टीम से केवल आठ मिनट की दूरी पर थी।लेकिन एम्बुलेंस तुरंत नहीं भेजी जा सकती थी। पहले सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना जरूरी था। इसके लिए रेड क्रॉस और इजरायली सेना की अनुमति लेनी पड़ती थी।महदी को उसी सेना से सुरक्षित रास्ते की मांग करनी पड़ती है जिस पर उस इलाके में गोलीबारी करने का आरोप था।

फिल्म के सबसे तनावपूर्ण दृश्य वे हैं जिनमें लगभग कुछ घटित नहीं होता—कंप्यूटर स्क्रीन पर धीरे-धीरे आगे बढ़ता कर्सर, नक्शे पर रास्ता तलाशती टीम, और घायल सड़कों से गुजरने की कोशिश करती एम्बुलेंस।महदी बेहद शांत स्वर में एक कड़वा सच कहते हैं—आप उन लोगों से किसी बच्चे की सुरक्षा की गारंटी नहीं मांग सकते जो उसी इलाके में लोगों की जान ले रहे हों, और फिर उस गारंटी पर भरोसा भी नहीं कर सकते।

यही बात फिल्म में एक अलग तरह का तनाव पैदा करती है। दर्शक शुरुआत से जानते हैं कि कहानी का अंत क्या होने वाला है, लेकिन फिर भी उन्हें हर मिनट उसी दर्द के साथ गुजरना पड़ता है।

ऑस्कर तक पहुंची फिल्म

पिछले वर्ष ट्यूनीशिया ने The Voice of Hind Rajab को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए ऑस्कर में अपनी आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा था।जनवरी 2026 में फिल्म को ऑस्कर नामांकन मिला। यह उस श्रेणी में नामांकित एकमात्र अफ्रीकी फिल्म थी। काउथर बेन हानिया के लिए यह तीसरा ऑस्कर नामांकन था। इससे पहले उनकी फिल्मों The Man Who Sold His Skin और Four Daughters को भी ऑस्कर नामांकन मिल चुका है।फिल्म का प्रीमियर वेनिस फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां इसे 23 मिनट तक खड़े होकर तालियां मिलीं। फिल्म ने ग्रैंड ज्यूरी पुरस्कार भी जीता।

इसके कार्यकारी निर्माताओं में ब्रैड पिट, जोआक्विन फीनिक्स, रूनी मारा, जोनाथन ग्लेजर और अल्फोंसो कुआरोन जैसी हॉलीवुड हस्तियां शामिल हैं। यह फिल्म इजरायल में भी प्रदर्शित की गई।

भारत में रिलीज को लेकर विवाद

फिल्म को मार्च 2026 में ऑस्कर समारोह से पहले भारत में रिलीज किया जाना था, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने इसे मंजूरी नहीं दी।फिल्म के वितरक मनोज नंदवाना के अनुसार उन्हें बताया गया था कि इस फिल्म की रिलीज भारत और इजरायल के संबंधों पर असर डाल सकती है। यह निर्णय उस समय आया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल अवीव यात्रा को कुछ ही सप्ताह हुए थे।हालांकि अब स्थिति बदल चुकी है। तीन महीने बाद यह फिल्म शुक्रवार, 19 जून को भारत भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।

एक बच्ची की आवाज़ सुनने की अपील

फिल्म अपने दर्शकों से बहुत ज्यादा कुछ नहीं मांगती। वह केवल यह चाहती है कि लोग एक पांच साल की बच्ची की आवाज़ सुनें।लेकिन इस आवाज़ को भारतीय दर्शकों तक पहुंचाने के लिए जिस संघर्ष से गुजरना पड़ा, वह अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है—ऐसी बातें, जिन्हें फिल्म सीधे शब्दों में नहीं कहती, लेकिन महसूस जरूर कराती है।

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