ना ना करते और तुमने पुकारा की गायिका सुमन कल्याणपुर नहीं रहीं
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'ना ना करते' और 'तुमने पुकारा' की गायिका सुमन कल्याणपुर नहीं रहीं

दिग्गज पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनकी मधुर आवाज और सदाबहार गीत भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर रहेंगे।


हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की मशहूर पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार (31 मई) शाम उनके मुंबई स्थित आवास पर उम्र संबंधी समस्याओं के कारण निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं।सुमन कल्याणपुर की चर्चित मराठी जीवनी ‘सुमन सुगंध’ की लेखिका मंगला खाडिलकर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “सुमन जी का रविवार शाम करीब 8 बजे लोखंडवाला स्थित उनके घर पर वृद्धावस्था के कारण शांतिपूर्वक निधन हो गया। पिछले कुछ दिनों से वह अपने ही गाए गीत सुन रही थीं।”

उनका अंतिम संस्कार सोमवार को पवन हंस श्मशान घाट में सुबह लगभग 11:30 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी बेटी चारु हैं।

60 और 70 के दशक में मिली अपार लोकप्रियता

सुमन कल्याणपुर ने 1960 और 1970 के दशक में अपनी मधुर आवाज के दम पर खास पहचान बनाई। उस दौर में, जब लता मंगेशकर का संगीत जगत पर दबदबा था, सुमन कल्याणपुर ने अपनी अलग जगह बनाई और श्रोताओं के दिलों में विशेष स्थान हासिल किया।उनके लोकप्रिय गीतों में ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’, ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ समेत कई सदाबहार गाने शामिल हैं।

उन्होंने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़, बंगाली, ओड़िया सहित कई भाषाओं में गीत गाए। इसके अलावा भजन, गजल और ठुमरी गायन में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

लता मंगेशकर से तुलना को हमेशा किया खारिज

उनकी आवाज की तुलना अक्सर स्वर कोकिला लता मंगेशकर से की जाती थी, लेकिन सुमन कल्याणपुर ने हमेशा इस तुलना को विनम्रता से खारिज किया।साल 2022 में पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने लता मंगेशकर को अपनी करीबी मित्र बताया था।उन्होंने कहा था, “हर कोई उनके गीतों को पसंद करता था और वह हमेशा अमर रहेंगी। हमने फिल्म ‘चांद’ के लिए एक युगल गीत रिकॉर्ड किया था। जब भी मैं उनसे मिलती थी, ऐसा लगता था जैसे किसी बेहद करीबी दोस्त से मिल रही हूं। मुझे विश्वास है कि वह भी ऐसा ही महसूस करती थीं।”

सुमन कल्याणपुर के निधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शरद पवार और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गहरा शोक व्यक्त किया।मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने छह दशकों से अधिक समय तक अपनी दिव्य आवाज से भारतीय संगीत विरासत को समृद्ध किया।
फडणवीस ने कहा कि सुमन कल्याणपुर ने शुरुआत में चित्रकला का प्रशिक्षण लिया था, लेकिन बाद में संगीत को अपना जीवन बना लिया। वह देश की सबसे सम्मानित पार्श्वगायिकाओं में शामिल रहीं। उनकी मधुर आवाज और शास्त्रीय संगीत पर मजबूत पकड़ ने उन्हें 1950 और 1960 के दशक में बेहद लोकप्रिय बनाया।

पद्म भूषण से हुई थीं सम्मानित

अविभाजित भारत के ढाका में जन्मी सुमन कल्याणपुर बाद में मुंबई आकर बस गई थीं। भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।फडणवीस ने कहा कि उन्होंने मराठी संगीत के साथ-साथ हिंदी, बंगाली और ओड़िया गीतों में भी अमिट योगदान दिया। पार्श्वगायन, भक्ति संगीत और भावनात्मक गीतों के माध्यम से उन्होंने भारतीय संगीत की विरासत को समृद्ध किया।उन्होंने कहा, “उनके अमर गीत हमेशा हमारे साथ रहेंगे, लेकिन सुमन जी जैसी सरल और गरिमामयी शख्सियत की कमी हमेशा महसूस की जाएगी।”मुख्यमंत्री ने उनके परिवार और करोड़ों प्रशंसकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

‘एक स्वर्णिम युग का अंत’

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत है।अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि सुमन कल्याणपुर ने अपनी मधुर, भावपूर्ण और आत्मीय आवाज से भारतीय संगीत को समृद्ध किया। हिंदी, मराठी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उनके अमर गीतों ने कई पीढ़ियों के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।पवार ने कहा कि भारतीय संगीत में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।

‘संगीत का सुमन मुरझा गया’

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि भारतीय संगीत पर दशकों तक राज करने वाली इस महान गायिका के निधन से संगीत जगत को गहरा आघात पहुंचा है।उन्होंने कहा, “संगीत का यह ‘सुमन’ आज मुरझा गया है और भारतीय संगीत जगत ने अपनी एक अनमोल धरोहर खो दी है।”शिंदे ने कहा कि सुमन कल्याणपुर केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय सुगम और फिल्म संगीत के स्वर्णिम युग की प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से मराठी, हिंदी और अन्य भाषाओं में हजारों गीतों को अमर बना दिया।

उन्होंने कहा कि उनकी आवाज की पवित्रता और भावनात्मक गहराई सीधे श्रोताओं के दिलों को छूती थी। उनके गाए भजन और कोली (मछुआरा समुदाय) गीत आज भी उतने ही ताजगी भरे लगते हैं जितने वर्षों पहले थे।शिंदे ने यह भी कहा कि संगीत की कोई पारिवारिक विरासत न होने के बावजूद सुमन कल्याणपुर ने अपनी प्रतिभा और कठोर साधना के बल पर संगीत जगत में अटूट स्थान बनाया।

सुमन कल्याणपुर के निधन के साथ भारतीय संगीत के स्वर्णिम अध्याय का एक महत्वपूर्ण पन्ना बंद हो गया है, लेकिन उनकी मधुर आवाज और अमर गीत आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।

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