लोकसभा अध्यक्ष से मिले शिवसेना यूबीटी के 6 बागी सांसद शिंदे गुट में विलय
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लोकसभा अध्यक्ष से मिले शिवसेना यूबीटी के 6 बागी सांसद शिंदे गुट में विलय

उद्धव ठाकरे गुट के 6 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय का ऐलान किया है और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।


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Shivsena Vs ShivsenaUBT: महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के बागी सांसद अब खुल कर सामने आ गया है। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) के सभी छह बागी सांसदों ने देश की राजधानी दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की है। इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक औपचारिक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर उद्धव गुट से अलग होने और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में अपने गुट का विलय करने का ऐलान किया है। इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर भी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, जिससे उद्धव ठाकरे को अब तक का सबसे करारा झटका लगा है।


चिट्ठी में उद्धव गुट पर लगाया कांग्रेस में विलय का आरोप
बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) के शीर्ष नेतृत्व पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। सांसदों ने लिखा है कि मौजूदा शिवसेना (यूबीटी) बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा से पूरी तरह भटक गई है। पत्र में दावा किया गया है कि उद्धव गुट के सीनियर नेता अब इस पार्टी का विलय पूरी तरह कांग्रेस में कराना चाहते हैं। सांसदों ने साफ कहा कि वे कांग्रेस की नीतियों के साथ नहीं जा सकते, इसीलिए वे अपनी विचारधारा को बचाने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं।

लोकसभा में सीटें बदलने की भी की गई मांग
इन छह सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से अपील की है कि लोकसभा के भीतर अब उनके बैठने की व्यवस्था को भी बदल दिया जाए। पत्र में कहा गया है कि उनके गुट का विलय चूंकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में हो चुका है, इसलिए सदन में उनकी सीटें भी शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसदों के साथ ही तय की जाएं। बागी नेताओं के इस कदम से अब तकनीकी और कानूनी रूप से भी उद्धव ठाकरे के पास लोकसभा में सांसदों की संख्या बेहद कम रह गई है।

16 जून की रात को प्राइवेट जेट से रची गई बगावत की स्क्रिप्ट
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी बगावत की पटकथा 16 जून की रात को ही बेहद गोपनीय तरीके से लिख दी गई थी। 16 जून की देर रात 1:30 बजे सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर नांदेड़ से एक प्राइवेट जेट के जरिए दिल्ली पहुंचे। इसके तुरंत बाद संजय देशमुख और संजय जाधव भी एक अलग प्राइवेट जेट से नांदेड़ से दिल्ली के लिए रवाना हुए। इसी रात भाऊसाहेब वाकचौरे हैदराबाद से प्राइवेट जेट के जरिए दिल्ली लैंड हुए, जबकि संजय दीना पाटिल और शिंदे गुट के विधायक प्रताप सरनाईक भी रात में ही दिल्ली पहुंच गए।

अमित शाह के बाद एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे ने संभाला मोर्चा
इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए खुद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे 16 जून को पहले मुंबई से जयपुर गए और वहां से तड़के सुबह 3:00 बजे दिल्ली पहुंचे। दूसरी तरफ, सांसद ओमराजे निंबालकर पुणे से मुख्यमंत्री के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के साथ सुबह 4:30 बजे दिल्ली पहुंचे। इन सभी बागी सांसदों को दिल्ली से सटे नोएडा के एक सुरक्षित होटल में रुकवाया गया था, ताकि उद्धव ठाकरे का कोई भी रणनीतिकार या संकटमोचक नेता इनसे संपर्क न साध सके।

17 जून को दो चरणों में हुई स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात
इसके बाद 17 जून को दो अलग-अलग शिफ्ट में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात का समय तय हुआ। सबसे पहले सुबह 7:00 बजे श्रीकांत शिंदे और ओमराजे निंबालकर ने स्पीकर ओम बिरला के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। इसके बाद सुबह 10:20 बजे ओमराजे निंबालकर के साथ बाकी के पांचों बागी सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अपना विलय पत्र उन्हें सौंप दिया। इस तरह बेहद गोपनीय और रणनीतिक अंदाज में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

मुलाकात के बाद धार्मिक यात्राओं पर निकले सभी बागी सांसद
संसद भवन में स्पीकर से मुलाकात करने और अपनी बगावत पर कानूनी मुहर लगाने के बाद सभी छह सांसद दिल्ली से अलग-अलग शहरों के लिए रवाना हो गए। नागेश पाटिल आष्टीकर प्राइवेट जेट से चेन्नई होते हुए तिरुपति बालाजी के दर्शन करने पहुंचे। भाऊसाहेब वाकचौरे बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी गए। संजय देशमुख और संजय जाधव रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे, जबकि संजय दीना पाटिल वापस मुंबई और ओमराजे निंबालकर पुणे लौट गए।

20 जून को एकनाथ शिंदे के साथ साझा करेंगे बगावत की पूरी डिटेल
इस बड़े राजनीतिक खेल के बाद अब इन बागी सांसदों का अगला प्लान भी सामने आ गया है। ये सभी 6 सांसद आगामी 20 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से दोबारा मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वे उस पत्र को सार्वजनिक करेंगे, जिसमें उन्होंने उद्धव सेना को छोड़ने के कारणों का विस्तार से जिक्र किया है। इसी दिन वे आधिकारिक तौर पर बताएंगे कि उन्होंने कब और किन परिस्थितियों में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी।


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