संविधान पर भरोसा है, गिरफ्तारी की आशंका के बीच भारत लौट रहे दिपके
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'संविधान पर भरोसा है', गिरफ्तारी की आशंका के बीच भारत लौट रहे दिपके

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भारत लौट रहे हैं। उन्होंने अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है।


कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि वे अब हमेशा के लिए भारत लौट रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है तो वे उसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सीबीएसई, नीट, सीयूईटी और एसएससी-जीडी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे विवादों के बीच दिपके का कहना है कि युवाओं के नेतृत्व वाला यह आंदोलन जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया जा रहा है।

शांतिपूर्ण विरोध मेरा संवैधानिक अधिकार

दिपके ने कहा कि भारत पहुंचने के बाद वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होंगे, जो एक भारतीय नागरिक के रूप में उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग वाली याचिका पर आठ लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।

उनके अनुसार, सीबीएसई, नीट, सीयूईटी और एसएससी-जीडी परीक्षाओं से जुड़े विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं और स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सीबीएसई के सर्वर में आई तकनीकी दिक्कतों और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में संभावित देरी की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसे में जवाबदेही तय होना जरूरी है।


गिरफ्तारी की आशंका है, लेकिन डर नहीं

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले गिरफ्तार किए जाने का डर है, तो उन्होंने कहा कि यह डर नहीं बल्कि जागरूकता है।उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि ऐसा हो सकता है और मैं इसके लिए तैयार हूं। अगर प्रशासन मुझे गिरफ्तार करना चाहता है तो कर सकता है। लेकिन मैं अपने ही देश में अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने लौट रहा हूं। मैं संविधान का पालन कर रहा हूं, अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह भी संविधान का सम्मान करती है या नहीं।"

मंत्री के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

6 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर दिपके ने कहा कि यह सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते।

अब अमेरिका नहीं लौटूंगा

दिपके ने कहा कि वे अब स्थायी रूप से भारत लौट रहे हैं और अमेरिका वापस जाने की कोई योजना नहीं है।उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया और मीडिया में चर्चा के बाद उन्हें कई नौकरी के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए क्योंकि वे इस आंदोलन को बीच में नहीं छोड़ना चाहते।उन्होंने कहा, "मैंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है और अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहा था, लेकिन अब मेरा ध्यान इस आंदोलन को आगे बढ़ाने पर है।"

परिवार चिंतित, लेकिन मुझे संविधान पर भरोसा

दिपके ने बताया कि उनके परिवार वाले उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनके माता-पिता नहीं चाहते थे कि वे भारत लौटें और अब भी उन्हें अमेरिका में ही रुकने के लिए कह रहे हैं।उन्होंने कहा, "मेरे माता-पिता को डर है कि मुझ पर हमला हो सकता है या मुझे जेल भेजा जा सकता है। लेकिन मुझे विश्वास है कि मैं अपने देश लौट रहा हूं और भारतीय संविधान मेरी रक्षा करेगा।"

सोशल मीडिया समर्थन को जनआंदोलन में बदलने की तैयारी

आंदोलन के स्वरूप पर बात करते हुए दिपके ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। सैकड़ों लोग उन्हें संदेश भेज रहे हैं और कई लोग एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने तथा वहां से जंतर-मंतर तक उनके साथ जाने की बात कह रहे हैं।उन्होंने कहा, "मुझे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। लोग कह रहे हैं कि वे मेरे साथ खड़े हैं और जरूरत पड़ी तो जेल जाने के लिए भी तैयार हैं।"

किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं

आम आदमी पार्टी के समर्थन और राजनीतिक संबंधों के आरोपों पर दिपके ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी पूरी तरह युवाओं का आंदोलन है और इसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।उन्होंने कहा कि भले ही अतीत में उनका आम आदमी पार्टी से जुड़ाव रहा हो, लेकिन अब वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि मनीष सिसोदिया ने आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया है।

जन आंदोलनों को राजनीति से जोड़ना गलत

दिपके ने कहा कि भारत का इतिहास जन आंदोलनों से भरा हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन और आपातकाल विरोधी आंदोलन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि हर जन आंदोलन को राजनीतिक संगठन से जोड़कर क्यों देखा जाता है। उनके अनुसार, लोकतंत्र को मजबूत बनाने में जन आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

करोड़ों छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

उन्होंने कहा कि नीट, सीबीएसई, सीयूईटी और एसएससी-जीडी जैसी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने एक करोड़ से अधिक छात्रों को प्रभावित किया है।दिपके ने कहा, "क्या यह माना जाए कि इन लाखों छात्रों की समस्याएं कृत्रिम रूप से पैदा की गई हैं ताकि कोई व्यक्ति अपना राजनीतिक मंच तैयार कर सके? असली मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश क्यों की जा रही है?"

युवाओं में वास्तविक नाराजगी

दिपके का मानना है कि युवाओं के बीच व्यवस्था को लेकर वास्तविक असंतोष मौजूद है और यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत व्यंग्य के रूप में हुई थी, लेकिन यह सोचने वाली बात है कि युवा स्थापित राजनीतिक दलों के बजाय एक व्यंग्यात्मक आंदोलन के साथ जुड़ना अधिक पसंद कर रहे हैं।

गिरफ्तारी हुई तो भी पीछे नहीं हटूंगा

गिरफ्तारी की संभावना पर दिपके ने दोहराया कि वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उन्होंने कहा, "मैं अपने संवैधानिक अधिकारों का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रयोग करना चाहता हूं। मैं संविधान के दायरे में रहकर ही काम करूंगा। अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह हमें हमारे अधिकारों का प्रयोग करने देती है या नहीं।"

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