
नौकरी की गारंटी खत्म! अब बैकअप प्लान और बचत पर जोर
AI, छंटनी और नौकरी की असुरक्षा के बीच लोग अब ज्यादा बचत, अपस्किलिंग और बैकअप करियर पर ध्यान दे रहे हैं।
दिल्ली के 41 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल अंकुश खन्ना (बदला हुआ नाम) के लिए बचत की शुरुआत उनकी बेटी के जन्म के साथ हुई थी। लेकिन कुछ साल बाद कंपनी में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। अब वे हर बड़े खर्च से पहले यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके बैंक खाते में कम से कम छह से आठ महीने तक घर चलाने लायक रकम मौजूद हो।अंकुश कहते हैं, “करियर की शुरुआत में मेरी प्राथमिकता सिर्फ पैसा कमाना था। लेकिन जब परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं और नौकरी में अस्थिरता देखी, तब एहसास हुआ कि भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक तैयारी जरूरी है।”
उनकी यह चिंता सिर्फ घर खर्च तक सीमित नहीं है। इसमें बच्चों की स्कूल फीस, ईएमआई और मेडिकल जरूरतों जैसी तमाम जिम्मेदारियां शामिल हैं।
नौकरी की अनिश्चितता बना रही है लोगों को सतर्क
आज सिर्फ आईटी सेक्टर ही नहीं, बल्कि मीडिया, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी और कॉरपोरेट दुनिया के कई क्षेत्र लगातार छंटनी और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।कोलकाता की कम्युनिकेशन प्रोफेशनल सुप्रीता सिंह ने भी इस अस्थिरता को करीब से महसूस किया। 2013 में उन्होंने अखबार बंद होने से कुछ दिन पहले ही नौकरी छोड़ दी थी। अखबार के प्रमोटर पर पोंजी स्कैम के आरोप लगे थे, जिसके बाद संस्थान बंद हो गया।
सुप्रीता बताती हैं, “मैं बच गई, लेकिन मेरे कई पत्रकार साथियों को अपना करियर दोबारा शुरू करना पड़ा। उसी अनुभव ने मुझे आगे चलकर अपना खुद का कम्युनिकेशन फर्म शुरू करने के लिए प्रेरित किया।” हालांकि यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने दोस्तों से पैसे उधार लेकर लैपटॉप खरीदा और होम लोन की जिम्मेदारी के बीच अपना कारोबार शुरू किया। लेकिन आज वे इसे अपनी स्वतंत्रता और सुरक्षित भविष्य की दिशा में बड़ा कदम मानती हैं।
AI बना सबसे बड़ा गेम चेंजर
हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नौकरी बाजार में सबसे बड़ा बदलाव लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में लाखों नौकरियां AI की वजह से प्रभावित हो सकती हैं।रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की बड़ी आईटी कंपनियों जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक ने हाल के वर्षों में हजारों नौकरियां कम की हैं।
भर्ती विशेषज्ञ सुनील गोयल का कहना है, “अब कोई भी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। कंपनियां तकनीक के हिसाब से तेजी से बदलाव कर रही हैं।”AI का असर केवल टेक सेक्टर तक सीमित नहीं है। कानून, स्वास्थ्य, मीडिया और यहां तक कि बच्चों के नाम सुझाने जैसे छोटे व्यवसाय भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
दिल्ली की वकील पल्लवी प्रताप कहती हैं कि AI ने लीगल प्रोफेशन में भी बदलाव शुरू कर दिया है। हालांकि कई बार AI आधारित ड्राफ्ट गलत साबित हुए हैं और अदालतों में परेशानी का कारण बने हैं।वहीं चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञों का मानना है कि AI डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, लेकिन जो डॉक्टर AI का उपयोग करेंगे, वे दूसरों से आगे निकल सकते हैं।
अपस्किलिंग बनी नई जरूरत
नौकरी की बदलती दुनिया में अब सिर्फ अनुभव काफी नहीं माना जा रहा। प्रोफेशनल्स लगातार नए कौशल सीखने पर जोर दे रहे हैं।मुंबई की प्रोफेशनल बैसाखी चक्रवर्ती ने कोविड महामारी के बाद डिजिटल मार्केटिंग, मैनेजमेंट और लीडरशिप जैसे कई कोर्स किए। वे कहती हैं, “अब केवल अपनी मौजूदा नौकरी में अच्छा होना काफी नहीं है। भविष्य की जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार रखना जरूरी है।”विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य उन्हीं लोगों का होगा जो नई तकनीकों को अपनाने, नए कौशल सीखने और काम की बदलती प्रकृति के अनुसार खुद को ढालने के लिए तैयार रहेंगे।
बदल रही है फाइनेंशियल प्लानिंग
नौकरी की अस्थिरता का सबसे बड़ा असर लोगों की आर्थिक योजना पर पड़ा है। अब लोग पहले की तुलना में ज्यादा बचत और कम जोखिम वाली जीवनशैली अपनाने लगे हैं।फाइनेंशियल एडवाइजर अभिषेक कुमार का कहना है कि हर व्यक्ति के पास कम से कम छह से 12 महीने के खर्च के बराबर नकद बचत होनी चाहिए।विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि लोगों को केवल एक निवेश विकल्प पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और मेडिकल इंश्योरेंस को प्राथमिकता देनी चाहिए।
एचआर प्रोफेशनल दिव्या मिधा के अनुसार, नौकरी जाने के बाद सबसे बड़ी चिंता ईएमआई और कर्ज चुकाने की होती है। ऐसे में कम कर्ज और बेहतर बचत मानसिक तनाव को भी कम करती है।
अब रिटायरमेंट नहीं, ‘फाइनेंशियल फ्रीडम’ लक्ष्य
कई लोग अब पारंपरिक रिटायरमेंट प्लान की जगह “फाइनेंशियल फ्रीडम” को प्राथमिकता दे रहे हैं।अंकुश खन्ना बताते हैं कि उन्होंने अपने लिए एक तय उम्र नहीं, बल्कि एक तय आर्थिक लक्ष्य बनाया है, ताकि वे किसी भी परिस्थिति में अपने वर्तमान जीवन स्तर को बनाए रख सकें।उन्होंने मेडिकल फंड, बच्चों की उच्च शिक्षा और इमरजेंसी सेविंग्स के लिए अलग-अलग खाते बनाए हैं।
आज की बदलती दुनिया में नौकरी की गारंटी कम हो रही है, लेकिन लोग खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने की तैयारी जरूर कर रहे हैं।

