संसद में गूंजी तालियों पर भड़के PM, कांग्रेस, DMK और TMC ने महिलाओं के आत्मसम्मान पर किया हमला
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संसद में गूंजी तालियों पर भड़के PM, 'कांग्रेस, DMK और TMC ने महिलाओं के आत्मसम्मान पर किया हमला'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल (131वां संशोधन) के लोकसभा में गिरने पर देश की महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने कांग्रेस, TMC, DMK और सपा जैसे दलों पर तीखा हमला किया।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम 30 मिनट के एक आक्रामक संबोधन में महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में पारित न हो पाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने सीधे तौर पर कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी का नाम लेते हुए कहा कि इन दलों ने संसद में बिल गिरने के बाद जश्न मनाकर देश की नारी शक्ति का अपमान किया है।

"नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती"

प्रधानमंत्री ने भावुक स्वर में कहा, "मैं देश की सभी माताओं और बहनों से माफी मांगता हूं कि हम यह बिल पास नहीं करा पाए। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने संसद में जो व्यवहार किया, उसकी कसक हर महिला के मन में रहेगी। नारी सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती।" उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा मेजें थपथपाकर मनाया गया जश्न दरअसल महिलाओं के आत्मसम्मान पर हमला था।

विपक्ष पर 'अधिकारों की भ्रूण हत्या' का आरोप

पीएम मोदी ने विपक्षी दलों की राजनीति को 'भ्रूण हत्या' (Foeticide) करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर राज्य में आनुपातिक रूप से 50% सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था ताकि किसी भी राज्य का नुकसान न हो, लेकिन विपक्ष ने झूठ फैलाकर इस ऐतिहासिक कदम को रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति पर चल रही है और परिसीमन के नाम पर देश में विभाजन की आग सुलगाना चाहती है।

'लटकाना और अटकाना' कांग्रेस का कल्चर

कांग्रेस को 'सुधार विरोधी' बताते हुए पीएम ने कहा कि इनका इतिहास मुद्दों को लटकाने और भटकाने का रहा है। उन्होंने अनुच्छेद 370, ओबीसी आरक्षण और सीमा विवादों का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा देशहित से ऊपर दलहित को रखा है। 2014 के बाद से यह मोदी सरकार की पहली बड़ी विधायी हार है, लेकिन पीएम ने साफ कर दिया कि वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने जनता को आगाह किया कि जब ये विपक्षी नेता उनके मोहल्लों में आएं, तो महिलाएं याद रखें कि ये वही लोग हैं जिन्होंने संसद में उनकी उम्मीदों को तोड़ने पर खुशियां मनाई थीं।

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