
राज्यसभा की जंग में BJP आक्रामक, विपक्ष बचाने में जुटा कुनबा
18 जून के राज्यसभा चुनाव से पहले BJP ने मध्य प्रदेश और झारखंड में नए दांव चलकर विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है। अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
राज्यसभा की 26 सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव और उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ाने और दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए हर संभव राजनीतिक दांव चलती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश और झारखंड में BJP की नई रणनीतियों ने विपक्षी दलों की चिंता बढ़ा दी है।
विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं पर BJP की नजर
राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की नजर विपक्षी दलों के असंतुष्ट और बागी विधायकों पर भी है। पार्टी को उम्मीद है कि विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष का फायदा उसे चुनाव में मिल सकता है। इसी रणनीति के तहत BJP ने मध्य प्रदेश और झारखंड में ऐसे कदम उठाए हैं, जिन्होंने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
मध्य प्रदेश में BJP का तीसरा उम्मीदवार बना कांग्रेस की चिंता
मध्य प्रदेश में BJP ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ अचानक तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतार दिया है। इस फैसले ने चुनाव को रोचक बना दिया है और कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है।कांग्रेस का आरोप है कि BJP महिला सशक्तिकरण की बात तो करती है, लेकिन अपनी संख्या कम होने के बावजूद उसने महिला उम्मीदवार के खिलाफ प्रत्याशी उतारकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि BJP किसी भी तरह से विधायकों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकती है।
विधायकों को कर्नाटक भेजने की तैयारी
BJP की रणनीति को देखते हुए कांग्रेस अब अपने विधायकों को सुरक्षित रखने की तैयारी में जुट गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने विधायकों को प्राइवेट जेट के जरिए कर्नाटक भेज सकती है ताकि क्रॉस-वोटिंग या टूट-फूट की संभावना को रोका जा सके।
मध्य प्रदेश का गणित क्या कहता है?
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में BJP के पास 164 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को 58 वोटों की आवश्यकता है। BJP दो सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की जीत अतिरिक्त वोटों, क्रॉस-वोटिंग या विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति पर निर्भर करेगी। इसी संभावना ने कांग्रेस को सतर्क कर दिया है।
कांग्रेस का आरोप- विधायकों को करोड़ों का ऑफर
मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने आरोप लगाया है कि BJP अपने उम्मीदवार के समर्थन के लिए विधायकों को 5 से 10 करोड़ रुपये तक की पेशकश कर रही है। हालांकि BJP ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
झारखंड में NDA का नया दांव
मध्य प्रदेश के बाद झारखंड में भी BJP ने नया राजनीतिक दांव चला है। गुजरात के उद्योगपति और वर्तमान राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी को NDA ने झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया है।इस कदम ने झारखंड राज्यसभा चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है।
दो सीटों पर तीन उम्मीदवार
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए अब तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। वहीं NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या NDA विपक्षी गठबंधन की संख्या बढ़त को चुनौती दे पाएगा।
राजस्थान में निर्विरोध चुनाव की राह साफ
राजस्थान में राज्यसभा चुनाव को लेकर सस्पेंस समाप्त हो गया है। तीन खाली सीटों के लिए केवल तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है।BJP ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने नीरज डांगी को दोबारा मैदान में उतारा है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
गुजरात में BJP की आसान जीत
गुजरात में भी BJP की राह आसान नजर आ रही है। पार्टी के चारों उम्मीदवार राजू शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेश राठवा और जितेंद्र कंजारिया निर्विरोध जीत की ओर बढ़ रहे हैं। कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार नहीं उतारे जाने से मुकाबला एकतरफा हो गया है।
दो-तिहाई बहुमत की ओर BJP की नजर
राज्यसभा चुनाव के इस दौर में BJP केवल सीटें जीतने की रणनीति नहीं बना रही, बल्कि उच्च सदन में अपनी संख्या बढ़ाकर भविष्य के बड़े विधायी एजेंडे को आसान बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में पार्टी ने जोखिम भरे लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दांव खेले हैं। अब 18 जून के नतीजे तय करेंगे कि BJP की यह रणनीति कितनी सफल होती है और विपक्ष अपने विधायकों को एकजुट रखने में कितना कामयाब रहता है।

