भाजपा में बाहरी नेताओं का तेजी से सत्ता तक सफर, हिमंता से शुभेंदु तक
x

भाजपा में बाहरी नेताओं का तेजी से सत्ता तक सफर, हिमंता से शुभेंदु तक

भाजपा में मोदी-शाह दौर में दूसरी पार्टियों से आए नेता तेजी से सीएम बने। हिमंत बिस्वा सरमा, मानिक साहा, सम्राट चौधरी और शुभेंदु अधिकारी इसके उदाहरण हैं।


भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले दौर में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रवृत्ति तेजी से उभरकर सामने आई है। पिछले लगभग छह वर्षों में दूसरी पार्टियों से आए कई प्रभावशाली नेताओं ने न केवल भाजपा में मजबूत जगह बनाई, बल्कि अपने-अपने राज्यों में सत्ता के शीर्ष पद तक भी पहुंच हासिल की है।

इन नेताओं में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, त्रिपुरा के मानिक साहा, बिहार के सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल के शुभेंदु अधिकारी जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी का राजनीतिक सफर अलग-अलग पृष्ठभूमियों से शुरू हुआ, लेकिन भाजपा में आने के बाद उनका उत्थान लगभग एक समान गति और पैटर्न में आगे बढ़ा।

हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस से भाजपा में 2015 में आए और कुछ वर्षों के भीतर ही असम की राजनीति में सबसे प्रभावशाली चेहरा बन गए। संगठन में सक्रिय भूमिका और चुनावी सफलता के बाद 2021 में वे मुख्यमंत्री बने और अब दूसरी बार इस पद पर हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा को भाजपा के भीतर “संगठित अवसर और नेतृत्व विश्वास” का उदाहरण माना जाता है।

इसी तरह त्रिपुरा के मानिक साहा भी 2016 में भाजपा से जुड़े और संगठन में काम करते हुए 2022 में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। वे पार्टी के भीतर स्थिर और भरोसेमंद नेतृत्व के रूप में उभरे।

बिहार में सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भी उल्लेखनीय रहा है। वे विभिन्न दलों से होते हुए 2017 में भाजपा में शामिल हुए और धीरे-धीरे संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए डिप्टी सीएम बने। 2026 में वे अंततः मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे, जिससे यह संदेश गया कि पार्टी में आंतरिक और बाहरी दोनों नेताओं के लिए अवसर खुले हैं।

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी का मामला भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाता है। लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस में रहने के बाद वे 2020 में भाजपा में आए और कुछ ही वर्षों में राज्य की राजनीति में पार्टी के सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित हो गए।इन चार नेताओं के अलावा कर्नाटक, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जहां दूसरी पार्टियों से आए नेता भाजपा में शामिल होकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे।

जानकारों का कहना है कि यह पैटर्न भाजपा की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें संगठन या बाहरी पृष्ठभूमि से आए नेताओं को भी योग्यता और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का अवसर दिया जाता है। यह प्रवृत्ति पार्टी के विस्तार और राज्यों में सत्ता मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा मानी जाती है।

Read More
Next Story