
अखिलेश यादव का बड़ा हमला, "नारी को नारा बना रही है BJP, जातीय जनगणना से भाग रही सरकार"
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि भाजपा "नारी को नारा" बना रही है और जातीय जनगणना से बचने के लिए परिसीमन का जाल बिछा रही है।
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में गुरुवार का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बन सकता है। केंद्र सरकार संसद के पटल पर एक ऐसा विधेयक पेश करने जा रही है, जो न केवल देश के चुनावी ढांचे को बदल देगा, बल्कि लोकसभा की शक्ल भी पूरी तरह बदल देगा। सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि लोकसभा में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 कर दी जाए, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
क्या है सरकार का 'नया लोकसभा' प्लान?
संसद में पेश होने वाले 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026' के अनुसार, महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई भागीदारी देने के लिए परिसीमन अनिवार्य है। इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी लाने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ाना सरकार की एक ऐसी रणनीति है, जिससे उत्तर भारत के राज्यों में सीटों की संख्या तो बढ़ेगी, लेकिन दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को कैसे दूर किया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
अखिलेश यादव का तीखा प्रहार: "साजिश कर रही है भाजपा"
इस विधेयक के सामने आने के बाद विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सदन में चर्चा के दौरान भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "भाजपा नारी को केवल नारा बनाने की कोशिश कर रही है। हकीकत यह है कि ये लोग जनगणना से भाग रहे हैं। वे जानते हैं कि यदि जातीय जनगणना हुई, तो आरक्षण की नई और जायज मांगें उठेंगी, जिससे वे डरते हैं।"
अखिलेश यादव ने डॉ. राम मनोहर लोहिया का हवाला देते हुए कहा कि समाजवादी विचारधारा हमेशा 'जेंडर जस्टिस' और 'सोशल जस्टिस' के पक्ष में रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस भाजपा ने अपने संगठन में महिलाओं को उचित जगह नहीं दी, वह महिलाओं के सम्मान की रक्षा कैसे करेगी? सपा नेता ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार की इस जल्दबाजी के पीछे छिपी 'साजिश' और जनगणना को टालने के खेल का विरोध करती है।
PDA और 'आधी आबादी' का सवाल
अखिलेश यादव ने अपने मशहूर नारे 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें 'A' का मतलब 'आधी आबादी' भी है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इस आरक्षण के भीतर पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक महिलाओं को उनका उचित हिस्सा मिलेगा? सपा की मांग है कि पुरानी जनगणना के बजाय, नई और विशेष रूप से जातीय जनगणना के बाद ही आरक्षण और परिसीमन को लागू किया जाना चाहिए।
NDA के सामने 'नंबर गेम' की चुनौती
राजनीतिक समीकरणों की बात करें, तो इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। किसी भी संविधान संशोधन के लिए सदन में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। वर्तमान में लोकसभा में NDA के पास अपने दम पर यह जादुई आंकड़ा नहीं है।
विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना के साथ जोड़ने के सरकार के तरीके का वे कड़ा विरोध करेंगे। ऐसे में सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और शक्ति परीक्षण देखने को मिल सकता है।

