Opposition Vs Om Birla : बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद के भीतर जबरदस्त राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिल सकती है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को तवांग में घोषणा की कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को चर्चा और मतदान होगा। सदन के दोबारा शुरू होने के पहले ही दिन यह अहम मुद्दा प्राथमिकता पर लिया जाएगा। रिजिजू ने संकेत दिया कि सत्र का यह चरण कई मायनों में "दिलचस्प" होने वाला है। सरकार इस दौरान कई महत्वपूर्ण और एक "अति संवेदनशील" विधेयक पेश करने की तैयारी में है। मंत्री ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हंगामा जारी रहा तो इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने विधायी कार्यों को हर हाल में पूरा करेगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश के चार बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
महत्वपूर्ण विधेयक और विपक्ष को सरकार की दो टूक
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। रिजिजू के अनुसार, सरकार इस दौरान कुछ ऐसे बिल लाएगी जो देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने किसी विशेष बिल का नाम नहीं लिया, लेकिन उसे "क्रिटिकल" (अति महत्वपूर्ण) करार दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष सदन की कार्यवाही में बाधा डालता है, तो सरकार 'गिलोटिन' (Guillotine) का सहारा लेगी। इसका सीधा मतलब है कि बिना चर्चा के ही विधायी कार्य संपन्न किए जाएंगे। रिजिजू ने दावा किया कि इससे छोटे दलों को नुकसान होगा जो अपने मुद्दे उठाना चाहते हैं। असम, बंगाल, केरल और तमिलनाडु के चुनावों के मद्देनजर यह सत्र काफी अहम है।
विपक्ष की एकता में सेंध और स्पीकर का रुख
मंत्री रिजिजू ने विपक्षी खेमे में फूट की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे साफ होता है कि सदन को स्थगित करने के मुद्दे पर विपक्ष एकजुट नहीं है।
बता दें कि पिछले दिनों राहुल गांधी के भाषण के दौरान हुए विवाद के बाद सदन में काफी हंगामा हुआ था। ओम बिरला ने निष्पक्षता के आरोपों के बाद खुद को पीठासीन अधिकारी की भूमिका से अलग कर लिया था। उन्होंने तब तक कुर्सी पर न बैठने का फैसला किया है जब तक प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता। अब 9 मार्च को होने वाली वोटिंग ही तय करेगी कि ओम बिरला अपने पद पर बने रहेंगे या नहीं।
पहले चरण का हंगामा और 8 सांसदों का निलंबन
बजट सत्र के पहले चरण में पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब को लेकर काफी विवाद हुआ था। राहुल गांधी द्वारा चीन सीमा विवाद पर किताब के अंश उद्धृत करने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद हंगामे के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना भाषण भी नहीं दे सके थे।
इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब पीएम के भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इस दौरान अनुशासनहीनता के आरोप में विपक्ष के आठ सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। अब देखना होगा कि दूसरे चरण में विपक्ष का क्या रुख रहता है। सरकार अपनी रणनीति पर अडिग है और हंगामे की स्थिति में कड़े फैसले लेने को तैयार है।
( एजेंसी इनपुट के साथ )