OSM सिस्टम में गड़बड़ी पर सरकार अलर्ट, शिक्षा मंत्री ने ली जिम्मेदारी
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OSM सिस्टम में गड़बड़ी पर सरकार अलर्ट, शिक्षा मंत्री ने ली जिम्मेदारी

ऑन स्क्रीन मार्किंग विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वो गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई और छात्रों की समस्याएं दूर करने का भरोसा दिया।


सीबीएसई (CBSE) के नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर देशभर में बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बड़ा बयान दिया है। शिक्षा मंत्री ने इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि OSM प्रणाली में सामने आई गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया जा रहा है और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।इससे पहले गुरुवार को शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल बैठक भी की, जिसमें छात्रों और अभिभावकों द्वारा उठाई गई शिकायतों पर चर्चा हुई।

शिक्षा मंत्री बोले- “मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं”

मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि OSM प्रणाली लागू करने के दौरान कुछ तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी विसंगतियां सामने आई हैं।उन्होंने कहा, “CBSE ने पहली बार यह प्रयोग किया था। उसमें कुछ विसंगतियां ध्यान में आ रही हैं। मैं इसका दायित्व लेता हूं। इसे ठीक किया जाएगा और इसका समाधान निकाला जाएगा। हम इसमें पूरी तरह जुटे हुए हैं। हम एक भी विद्यार्थी की जिज्ञासा को अनसुलझा नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीक का मुद्दा नहीं बल्कि पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का भी विषय है।

OSM सिस्टम का किया बचाव

हालांकि शिक्षा मंत्री ने OSM प्रणाली का बचाव भी किया और इसे आधुनिक तथा छात्र-केंद्रित तकनीक बताया।उन्होंने कहा, “CBSE की 12वीं परीक्षा में लगभग 17 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया। उनकी करीब 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखा गया है। हर कॉपी में औसतन 40 पेज होते हैं, यानी लगभग 40 करोड़ पन्नों को स्कैन किया गया है। CBSE ने पहली बार यह स्कैनिंग सिस्टम लागू किया है।” उन्होंने आगे कहा कि OSM एक आधुनिक तकनीक है, जिसे भारत और दुनिया के कई संस्थान अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य छात्रों को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित मूल्यांकन उपलब्ध कराना है।

राहुल गांधी के आरोपों पर भी दिया जवाब

शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार देश की तकनीकी और डिजिटल प्रगति का विरोध करते रहे हैं।उन्होंने कहा, “राहुल गांधी एक अलग मानसिकता में पहुंच चुके हैं। लगातार चुनाव हारने की वजह से वह फ्रस्ट्रेशन में हैं। उन्होंने SIR का विरोध किया, EVM का विरोध किया और डिजिटल इंडिया का भी विरोध किया। वह भारत की वैज्ञानिक प्रगति के साथ नहीं हैं।”

शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि जब सरकार खुद इस अव्यवस्था की जिम्मेदारी ले रही है, तब इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय सबसे जरूरी है कि छात्रों पर मानसिक दबाव न बढ़े।

आखिर क्या है OSM सिस्टम?

सीबीएसई ने इस साल 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की थी।इस प्रणाली के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद शिक्षक स्क्रीन पर ही कॉपियों की जांच करते हैं और कंप्यूटर सिस्टम स्वतः अंकों की गणना करता है, ताकि टोटलिंग की गलतियां कम हो सकें।

छात्रों ने लगाए तकनीकी खामियों के आरोप

हालांकि OSM प्रणाली लागू होने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने कई गंभीर शिकायतें उठाई हैं। आरोप है कि कई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली स्कैन हुईं, कुछ पेज गायब मिले, कुछ मामलों में एक छात्र की कॉपी दूसरे छात्र के रोल नंबर से लिंक हो गई, पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों के कारण छात्रों को अपनी कॉपियां देखने में परेशानी हुई। इन शिकायतों के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई। बाद में CBSE ने भी स्वीकार किया कि पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक के कारण तकनीकी समस्याएं आई थीं।

छात्रों को राहत देने की कोशिश

विवाद बढ़ने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय और CBSE दोनों स्थिति को नियंत्रित करने और छात्रों की शिकायतों का समाधान करने में जुटे हैं।सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी सुधार किए जाएंगे।

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