
तीन-भाषा नीति पर CBSE का यू-टर्न, मौजूदा छात्रों को मिली छूट
CBSE ने तीन-भाषा नीति में राहत देते हुए मौजूदा 10वीं के छात्रों को छूट दी है। 7वीं-9वीं के छात्रों के लिए भी बोर्ड परीक्षा को लेकर नए नियम जारी किए गए हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोमवार (29 जून) को तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने मौजूदा 10वीं कक्षा के छात्रों को इस नई नीति से एकमुश्त छूट देने का फैसला किया है। यानी वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 10वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नई तीन-भाषा नीति लागू नहीं होगी।
इसके साथ ही CBSE ने 2026-27 सत्र में 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों के लिए भी एक बार की विशेष राहत की घोषणा की है। बोर्ड के अनुसार, ये छात्र तीन भाषाएं पढ़ेंगे, लेकिन उन्हें दो विदेशी भाषाओं के साथ एक भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में चुनने की अनुमति होगी।
यह फैसला उस समय आया है जब करीब एक महीने पहले CBSE ने घोषणा की थी कि 1 जुलाई से 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए कम से कम दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इस फैसले के खिलाफ कई छात्रों और अभिभावकों ने अदालत का रुख किया था।
CBSE की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह ने कहा, "वर्तमान 10वीं कक्षा के छात्रों पर नई तीन-भाषा नीति लागू नहीं होगी। वहीं, वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को जब वे 10वीं में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।"
उन्होंने आगे कहा कि "2026-27 में पहले से 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को एक बार की विशेष छूट के तहत दो विदेशी भाषाओं के साथ एक भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ने की अनुमति दी जाएगी।"
CBSE की नई गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु
वर्तमान 10वीं कक्षा के छात्रों पर नई तीन-भाषा नीति लागू नहीं होगी।
वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को 10वीं में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे उन्हें जारी रख सकते हैं, लेकिन इसके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (भारतीय भाषा) पढ़ना अनिवार्य होगा।छात्रों के लिए कक्षा के अनुरूप अध्ययन सामग्री निर्धारित समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी।
भाषा शिक्षा को अधिक अर्थपूर्ण, रोचक और समृद्ध बनाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों के समग्र विकास में उसका योगदान सुनिश्चित हो सके।CBSE का कहना है कि इन संशोधित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अनुरूप भाषा शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और विद्यार्थियों के हित में बनाना है, साथ ही वर्तमान छात्रों को संक्रमण काल में अनावश्यक कठिनाइयों से बचाना भी है।

