"एक डायपर रोज, लीक रखेगा दूर" - CJP का अनोखा अभियान
जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में मंगलवार शाम को एक नया और ध्यान खींचने वाला मोड़ आया:
डायपर पर लिखकर मांग: CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए समर्थकों से अपील की कि वे प्रदर्शन स्थल पर डायपर लेकर आएं। इस अभियान को 'डायपर ए डे कीप्स लीक्स अवे' नाम दिया गया है।
मंत्री तक पहुंचाने का दावा: संगठन ने कहा कि समर्थक इन डायपरों पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लिखें, जिन्हें बाद में सीधे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक पहुंचाया जाएगा।
बैरिकेड्स खिसकाने और अनिवार्य दस्तावेज जांच पर टकराव CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार (22 जून) की देर रात दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जिसके बाद दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति है:
"दिल्ली पुलिस ने रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए बैरिकेड्स को आगे बढ़ा दिया, ताकि प्रदर्शन स्थल के दायरे को छोटा किया जा सके। पुलिस छात्रों को इस आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए उनके पहचान पत्रों और अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेजों (Aadhaar Card) की जांच कर रही है।"
दिल्ली पुलिस का खंडन: दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह दावे पूरी तरह से 'तथ्यात्मक रूप से गलत' हैं और मौके पर किसी भी छात्र की कोई अनुचित जांच नहीं की जा रही है, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य सुरक्षा व्यवस्था लागू है।
4 मिनट की देरी पर पाबंदी, पर पेपर लीक पर चुप्पी क्यों? छात्रों का फूटा गुस्सा
कार्यदिवस (वर्किंग डे) होने के बावजूद जंतर-मंतर पर यूपीएससी, एसएससी और नीट के अभ्यर्थियों की भारी भीड़ उमड़ी। प्रदर्शन स्थल पर पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों की याद में मोमबत्तियां जलाई गईं।
आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही के दोहरे मापदंडों पर तीखा हमला बोला:
छात्रों के साथ अन्याय: दिपके ने कहा कि अगर कोई छात्र परीक्षा केंद्र पर महज 4 मिनट की देरी से पहुंचता है, तो उसे री-टेस्ट में बैठने नहीं दिया जाता। लेकिन जब पूरी व्यवस्था बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती है और पेपर लीक हो जाता है, तो शिक्षा मंत्री अपने पद पर बने रहते हैं।
गंभीर बीमारी में भी समर्थन: इस प्रदर्शन में देश के कोने-कोने से लोग पहुंच रहे हैं। ओडिशा की 35 वर्षीय बबीता अंजलि, जो लीवर कैंसर से जूझ रही हैं, अपने 13 साल के बेटे और मेडिकल उपकरणों के साथ जंतर-मंतर पहुंचीं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि देश का हर बच्चा उनके अपने बच्चे जैसा है और वे इन बच्चों के न्याय के लिए यहां आई हैं।
जंतर-मंतर पर खुली 'फ्री लाइब्रेरी', वामपंथी छात्र संगठनों का मिला साथ
इस आंदोलन को अब विभिन्न छात्र संगठनों का भी बड़ा समर्थन मिल रहा है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), एआईएसएफ (AISF) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) के कार्यकर्ता भी इस धरने में शामिल हो चुके हैं:
शिक्षा के साथ शिक्षा की लड़ाई: AISF ने आंदोलन स्थल पर एक 'मुफ्त पुस्तकालय' की शुरुआत की है।
100 से अधिक किताबों का संग्रह: छात्रों, अभिभावकों और समर्थकों ने अपने निजी कलेक्शन से इतिहास, कानून, नागरिक अधिकार और आत्मकथाओं पर आधारित लगभग 100 किताबें दान की हैं। प्रदर्शनकारी छात्र धरने के बीच इन किताबों को पढ़कर रचनात्मक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। CJP ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील की है कि वे सीधे जंतर-मंतर आकर पीड़ित छात्रों से मुलाकात करें।