ला कुकराचा से CJP: जब-जब सत्ता के खिलाफ हथियार बना कॉकरोच
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ला कुकराचा से CJP: जब-जब सत्ता के खिलाफ हथियार बना कॉकरोच

तिलचट्टे (कॉकरोच) की उपमा का इतिहास क्रांतिकारी गीतों, सत्तावादी बयानबाज़ी, विरोध आंदोलनों और सोशल मीडिया के व्यंग्य तक फैला हुआ है।


La Cucaracha to Cockroach Janta Party: इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में धूम मचाने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) महज किसी अदालती या सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की तात्कालिक उपज नहीं है, बल्कि इसका वैचारिक आधार 20वीं सदी के ऐतिहासिक 'मैक्सिकन आंदोलन' और वहां के लोकगीतों से जुड़ा हुआ है। भारत में ये ऑनलाइन आंदोलन तब भड़का जब कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं और प्रदर्शनकारियों की तुलना "कॉकरोच" (कीड़े-मकौड़ों) से कर दी गई और युवाओं ने इस अपमान को ही अपनी ताकत बनाकर एक मीम-आंदोलन खड़ा कर दिया। लेकिन इतिहास गवाह है कि राजनीतिक व्यंग्य और विरोध के लिए इस जीव का इस्तेमाल आज से एक सदी पहले मैक्सिको की क्रांति में व्यवस्था को हिलाने के लिए किया गया था, जहां से इस अनोखे विरोध की असल प्रेरणा मिलती है।


इतिहास में कॉकरोच: मैक्सिकन क्रांति का वो मशहूर गाना 'ला कुकराचा'
राजनीति और जन-आंदोलनों में कॉकरोच का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। इसका सबसे पहला और लोकप्रिय रूप 20वीं सदी की शुरुआत में 'मैक्सिकन क्रांति' के दौरान देखने को मिला था। उस समय का एक लोकगीत 'ला कुकराचा' (La Cucaracha - जिसका अर्थ कॉकरोच होता है) तानाशाही सरकार के खिलाफ राजनीतिक व्यंग्य का सबसे बड़ा हथियार बन गया था।

क्रांतिकारी और आम लोग अपने प्रतिद्वंद्वी नेताओं और भ्रष्ट हुक्मरानों का मजाक उड़ाने के लिए इस गाने के बोल (Lyrics) बदल दिया करते थे। कई वर्शन्स में 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल सीधे तौर पर तत्कालीन तानाशाह विक्टोरियानो ह्यूर्टा और उसकी अक्षमताओं को कटघरे में खड़ा करने के लिए किया गया था। इस आंदोलन ने दुनिया को सिखाया कि कैसे एक मामूली कीट को प्रतीक बनाकर हास्य-व्यंग्य के जरिए सत्ता को चुनौती दी जा सकती है।

इतिहास का स्याह पन्ना: जब नरसंहार का जरिया बना 'कॉकरोच' शब्द
लेकिन कॉकरोच के राजनीतिक इस्तेमाल का इतिहास हमेशा आंदोलनों की तरह प्रेरणादायक या मजाकिया नहीं रहा, बल्कि इसका एक बेहद डरावना और काला पहलू भी है। इसका सबसे खूंखार उदाहरण साल 1994 के रवांडा नरसंहार (Rwandan Genocide) के दौरान देखने को मिला था। वहाँ बहुसंख्यक हुतु (Hutu) चरमपंथी गुटों ने अल्पसंख्यक तुत्सी (Tutsi) समुदाय को निशाना बनाने के लिए उन्हें लगातार 'इन्येन्ज़ी' (inyenzi) कहना शुरू किया, जिसका स्थानीय भाषा में अर्थ 'कॉकरोच' होता है।

रेडियो स्टेशनों (विशेषकर RTLM), अखबारों और भाषणों के जरिए यह नफरत इस कदर फैलाई गई कि इंसानों को कीड़ा समझकर मारना समाज के लिए आसान बना दिया गया। इसी तरह का हिंसक हथकंडा नाजी प्रोपेगैंडा में यहूदियों को 'परजीवी' बताने के लिए और साल 2011 में ली比亚 के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफ़ी द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को 'चूहा और कॉकरोच' कहने के लिए किया गया था।

आम जनता ने जब भी चाहा, बदल दिया इस 'कीट' का मतलब
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तानाशाह और क्रूर नेता अक्सर अपने विरोधियों को इंसान न समझकर 'कीड़ा' (Pest Metaphor) घोषित करते हैं ताकि उनका दमन करना एक 'सफाई अभियान' जैसा लगे, न कि प्रताड़ना।

लेकिन समय-समय पर आम जनता और एक्टिविस्ट्स ने इस अपमानजनक शब्द को अपनी ताकत में बदला है। साल 1966 में मिस्र (Egypt) के मशहूर नाटककार तौफीक अल-हकीम ने अपने नाटक 'फेट ऑफ अ कॉकरोच' (Fate of a Cockroach) में इस जीव का इस्तेमाल उन आम नागरिकों को दिखाने के लिए किया जो सुस्त और संवेदनहीन ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) के जाल में फंसे हुए हैं। आज भी कई देशों में प्रदर्शनकारी राजनीतिक संभ्रांत वर्ग (Elite class) का मजाक उड़ाने और आम आदमी की जुझारू क्षमता को दिखाने के लिए कॉकरोच के कॉस्ट्यूम पहनकर प्रदर्शन करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आज भारत के युवा 'CJP' के जरिए कर रहे हैं।


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