
‘भारतीय युवाओं को पाकिस्तानी क्यों बता रहे?’ दिपके का सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने किरेन रिजिजू के आरोपों पर पलटवार करते हुए दावा किया कि उनके 94% फॉलोअर्स भारत से हैं।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि इस प्लेटफॉर्म को पाकिस्तान और अरबपति परोपकारी जॉर्ज सोरोस से जुड़े नेटवर्क्स का सोशल मीडिया समर्थन मिल रहा है।रिजिजू के बयान के जवाब में अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कथित स्क्रीन रिकॉर्डिंग साझा की, जिसे उन्होंने प्लेटफॉर्म की ऑडियंस डेमोग्राफिक्स बताया। दिपके का दावा है कि उनके 94 प्रतिशत से अधिक फॉलोअर्स भारत से हैं।
उन्होंने X पर लिखा, “यह हमारे ऑडियंस डेमोग्राफिक्स की स्क्रीन रिकॉर्डिंग है, जिसे हमने अकाउंट हैक होने से पहले मीडिया के साथ साझा किया था। 94 प्रतिशत से अधिक दर्शक भारत से हैं। एक केंद्रीय मंत्री भारतीय युवाओं को पाकिस्तानी क्यों बता रहे हैं?”
यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब किरेन रिजिजू ने बिना सीधे नाम लिए सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मुझे उन लोगों पर दया आती है जो सोशल मीडिया पर पाकिस्तान और जॉर्ज सोरोस गैंग से फॉलोअर्स हासिल करना चाहते हैं। भारत के पास बड़ी आबादी और ऊर्जावान युवा हैं, जो सच्चे और मूल्यवान समर्थक बन सकते हैं। एंटी-इंडिया गैंग से मान्यता लेने की जरूरत नहीं है।”
यह ऑनलाइन विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। यह एक व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन है, जिसने पिछले एक सप्ताह में सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रियता हासिल की है।इस समूह की शुरुआत उस विवाद के बाद हुई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से जुड़ी कथित टिप्पणियों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी पैदा कर दी। वकीलों को ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ कहे जाने संबंधी टिप्पणियां ऑनलाइन तेजी से वायरल हुई थीं। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी उन लोगों के लिए थी, जो कथित तौर पर “फर्जी और नकली डिग्रियों” के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, और उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।
इस ऑनलाइन बहस का फायदा उठाते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने खुद को युवाओं द्वारा संचालित विरोध मंच के रूप में पेश किया। यह मंच बेरोजगारी, परीक्षा का दबाव, भर्ती प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियां और प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं जैसे मुद्दों को उठा रहा है।देशभर में NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के बीच बढ़ते आक्रोश के दौरान इस आंदोलन की लोकप्रियता में तेजी आई। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच इस प्लेटफॉर्म ने खुद को प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से परेशान छात्रों की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया।

