
नटराजन के बाद अब खरगे पर संकट! नामांकन में जानकारी छिपाने का आरोप
मध्य प्रदेश के झटके के बाद कर्नाटक से कांग्रेस की बढ़ी टेंशन। सोशल एक्टिविस्ट ने विधानसभा सचिवालय में दर्ज कराई शिकायत; सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट पर फंसा पेंच।
Karnataka Rajya Sabha: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में ऐन वक्त पर अपनी इकलौती उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने का दंश झेल रही कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें अब दोगुनी हो गई हैं. अब खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा उम्मीदवार मल्लिकाजुर्न खरगे के नामांकन को लेकर एक बेहद गंभीर और नया कानूनी संकट खड़ा हो गया है. कर्नाटक विधानसभा सचिवालय में खरगे के खिलाफ अपने चुनावी हलफनामे में कुछ बेहद महत्वपूर्ण और अनिवार्य जानकारियां कथित तौर पर छिपाने की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है.
मध्य प्रदेश में जानकारी छिपाने के चलते ही भाजपा की आपत्ति पर मीनाक्षी नटराजन का पत्ता कटा और भाजपा ने बिना चुनाव तीनों सीटें अपनी झोली में डाल लीं. ठीक उसी तर्ज पर अब कर्नाटक विधानसभा सचिवालय पहुंची इस शिकायत ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा दी है. शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि खरगे द्वारा चुनावी हलफनामे में तथ्यों को छिपाना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के कड़े कानूनी प्रावधानों का सीधा और स्पष्ट उल्लंघन है.
सोशल एक्टिविस्ट दिनेश कल्लाहल्ली का 'चिट्ठी बम'; सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट से जुड़ा है पूरा मामला
न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ यह मोर्चा जाने-माने सोशल एक्टिविस्ट दिनेश कल्लाहल्ली ने खोला है. विधानसभा सचिवालय को सौंपी गई अपनी शिकायत में कल्लाहल्ली ने नियमों का हवाला देते हुए कई गंभीर दावे किए हैं:
ट्रस्ट से संबंध छिपाने का आरोप: शिकायतकर्ता के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार जब राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा दाखिल करता है, तो उसे अपनी वित्तीय स्थिति के साथ-साथ किसी भी संगठन, मैनेजमेंट या ट्रस्ट से जुड़े अपने संबंधों और पदों का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होता है.
सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट का पेंच: शिकायत में सीधा आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खरगे ने इस नामांकन पत्र के साथ दायर शपथ पत्र में 'सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट' के साथ अपने आधिकारिक संबंधों और वित्तीय जुड़ाव की जानकारी को जानबूझकर छिपाया है, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है.
5 जून को भरा था पर्चा, इसी महीने खत्म हो रहा है कार्यकाल; क्यों बढ़ी कांग्रेस की धड़कनें?
मल्लिकार्जुन खरगे ने बीते 5 जून 2026 को कर्नाटक से राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया था. खरगे का मौजूदा और पहला राज्यसभा कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा है, ऐसे में सदन में विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर उनकी वापसी के लिए इस नामांकन का वैध होना बेहद जरूरी है.
कांग्रेस के लिए यह शिकायत इसलिए सबसे बड़ी टेंशन बन गई है क्योंकि देश के चुनावी इतिहास में स्क्रूटनी के दौरान तकनीकी गलतियों पर बड़े-बड़े सूरमाओं के पर्चे खारिज होते रहे हैं. यदि जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने इस आपत्ति को सही पाया या शिकायतकर्ता इस मामले को लेकर अदालत का रुख करता है, तो कांग्रेस अध्यक्ष के सामने एक बहुत बड़ा कानूनी और राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सीधा असर संसद के आगामी मानसून सत्र पर भी पड़ेगा.
कर्नाटक का सियासी गणित: 4 सीटों पर 4 ही उम्मीदवार; निर्विरोध जीत की थी तैयारी
कर्नाटक में राज्यसभा की कुल 4 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है. विधानसभा में अपने-अपने विधायकों की संख्या बल (नंबर गेम) के हिसाब से कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, जिससे सभी का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा था:
कांग्रेस के तीन धुरंधर: कांग्रेस की ओर से खुद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा और मंसूर अली खान ने नामांकन भरा है.
बीजेपी का एक दांव: भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संख्या बल के आधार पर प्रो. एम. नागराजा को मैदान में उतारा है.
लेकिन मतदान और नाम वापसी की औपचारिकताओं के बीच आए इस नए मोड़ ने पूरी कहानी को बेहद पेचीदा और दिलचस्प बना दिया है. अब देखना होगा कि कर्नाटक का विधानसभा सचिवालय और चुनाव आयोग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है.
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