उद्धव गुट के सांसदों की बगावत पर भड़की कांग्रेस, अमित शाह पर बड़ा आरोप
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उद्धव गुट के सांसदों की बगावत पर भड़की कांग्रेस, अमित शाह पर बड़ा आरोप

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमित शाह पर आरोप लगाया कि वह 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में परिसीमन बिल गिरने की बेइज्जती का बदला लेने के लिए विपक्षी सांसदों को तोड़ रहे हैं।


Congress Reaction on ShivsenaUBT MP's Row: पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस और अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) में मची बड़ी भगदड़ से विपक्षी खेमे में भारी हड़कंप मच गया है। टीएमसी के 20 और उद्धव गुट के 6 सांसदों की बगावत की खबरों के बीच अब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी इस सियासी घमासान में कूद पड़ी है। कांग्रेस ने विपक्षी दलों में हो रही इस बड़ी टूट-फूट के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि संसद में सरकार को मिली करारी शिकस्त का बदला लेने के लिए ही विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा है।



जयराम रमेश ने अमित शाह पर साधा बड़ा निशाना
कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दोनों राज्यों के इस बड़े सियासी घटनाक्रम का पूरा ठीकरा गृहमंत्री अमित शाह पर फोड़ दिया है। कांग्रेस के कम्युनिकेशन इंचार्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बेहद तीखा पोस्ट साझा किया। रमेश ने लिखा कि केंद्रीय गृहमंत्री विपक्ष पर लगातार सुनियोजित हमले कर रहे हैं। वे भारतीय लोकतंत्र को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

17 अप्रैल को संसद में हुई बेइज्जती का बदला
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि गृहमंत्री यह सब 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में हुई अपनी बेइज्जती की भरपाई के लिए कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उस ऐतिहासिक दिन मोदी सरकार संसद के भीतर अपने बेहद महत्वपूर्ण परिसीमन विधेयकों को पास करवाने में बुरी तरह नाकाम रही थी। विपक्ष का कहना है कि इसी विधायी असफलता के कारण अब विपक्षी दलों को तोड़ा जा रहा है।

क्या था वह परिसीमन विधेयक जिसपर फंसी सरकार
दरअसल इसी साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मोदी सरकार लोकसभा में एक बड़ा परिसीमन विधेयक लेकर आई थी। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में लगभग 50% की भारी बढ़ोतरी करना था। इसके कानून बनने के बाद देश के हर राज्य के खाते में मौजूदा सीटों के मुकाबले लगभग आधी सीटें और बढ़ जानी थीं।

दो-तिहाई बहुमत न होने से गिर गया था बिल
इस बड़े संविधान संशोधन विधेयक को संसद से पास करवाने के लिए सरकार को दो-तिहाई विशेष बहुमत की सख्त आवश्यकता थी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से पक्ष-विपक्ष की राजनीति से ऊपर उठकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33% भागीदारी सुनिश्चित करने वाले इस बिल का समर्थन करने का आग्रह किया था।

विपक्ष की एकजुटता ने सरकार के मंसूबे किए थे फेल
सदन के भीतर विपक्ष को अच्छी तरह पता था कि केंद्र सरकार के पास इस बिल को पास करवाने लायक जरूरी दो-तिहाई सांसदों का आंकड़ा मौजूद नहीं है। इसी रणनीति के तहत पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर इस परिसीमन बिल के खिलाफ मतदान कर दिया और सरकार का यह बड़ा प्रस्ताव सदन में गिर गया। कांग्रेस के अनुसार इसी हार की खींच में अब विपक्षी सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है।

इंडिया ब्लॉक के बागी सांसदों पर भी बरसी कांग्रेस
जयराम रमेश ने पाला बदलने वाले विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों की निष्ठा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गृहमंत्री द्वारा दिए जा रहे तरह-तरह के प्रलोभन कुछ कमजोर सांसदों को बहुत अच्छे लग रहे हैं। ये वही लोग हैं जो जमीन पर बीजेपी-विरोधी एक मजबूत एजेंडे पर चुनाव जीतकर आए थे और अब निजी स्वार्थ के लिए उसी पाले में शामिल हो रहे हैं।

सांसदों को मिल रहे लालच बेहद चौंकाने वाले
कांग्रेस नेता ने बागी सांसदों को मिलने वाले ऑफर्स को बेहद चौंकाने वाला और अनैतिक बताया है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री इस समय विपक्ष को खत्म करने के लिए बहुत ही संकीर्ण और कुटिल अभियान चला रहे हैं। यह पूरा अभियान तमाम तरह के सरकारी और निजी संसाधनों से पूरी तरह सुसज्जित है। इसके तहत विपक्षी नेताओं को अपनी तरफ खींचने के लिए कई तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं।

म्यूचुअल फंड की तरह बांटे जा रहे अलग-अलग प्लान
अमित शाह पर कड़ा प्रहार करते हुए रमेश ने कहा कि यह अभियान किसी म्यूचुअल फंड की तरह काम कर रहा है। इसमें हर नेता की निजी जरूरतों के मुताबिक अलग-अलग राजनीतिक प्लान और प्रोडक्ट पेश किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों के नैतिक पतन की अब कोई सीमा नहीं बची है, लेकिन वे विपक्ष को खत्म करने के अपने आखिरी मंसूबे में कभी सफल नहीं होंगे।


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