ट्रंप को खुश करना बंद करें पीएम मोदी भारत-US ट्रेड डील पर कांग्रेस हमलावर
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'ट्रंप को खुश करना बंद करें पीएम मोदी' भारत-US ट्रेड डील पर कांग्रेस हमलावर

जयराम रमेश का केंद्र पर बड़ा हमला। कहा- अमेरिकी दबाव में न आए भारत, 6 फरवरी के व्यापार समझौते से जम्मू-कश्मीर, बिहार और एमपी के किसानों को होगा भारी नुकसान।


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Congress on Indo US Trade Deal: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के दो दिवसीय दिल्ली दौरे के बीच कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार (23 जून 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दावा किया कि वाशिंगटन के साथ जिस स्वरूप में व्यापार समझौते पर सहमति बनी है, वह पूरी तरह से एकतरफा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत ने दबाव में आकर इस पर हस्ताक्षर किए, तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश से लेकर बिहार और मध्य प्रदेश तक के करोड़ों किसानों के हितों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।



अमेरिकी संयुक्त व्यापार वक्तव्य (6 फरवरी) की इनसाइड स्टोरी और बैकग्राउंड
जयराम रमेश ने अपने बयान में 6 फरवरी 2026 को जारी हुए भारत-अमेरिका संयुक्त व्यापार वक्तव्य (Joint Trade Statement) का हवाला देते हुए सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया:

संसद के दबाव में लिया गया फैसला: कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह संयुक्त बयान प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर तब जारी किया गया था, जब वे संसद में राहुल गांधी द्वारा चीन के मोर्चे पर सरकार को घेरे जाने के दबाव में थे।

समझौते की शर्तें: इस शुरुआती सहमति के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले शुल्क (Tariff) को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का वादा किया था।

भारत की बड़ी प्रतिबद्धता: इसके बदले में भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों और औद्योगिक वस्तुओं पर अपने शुल्कों को या तो पूरी तरह समाप्त करने या काफी कम करने का आश्वासन दिया। साथ ही, अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला और बदली हुई शुल्क नीति की अनिश्चितता
कांग्रेस ने अमेरिकी न्यायपालिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया नीतियों का जिक्र करते हुए इस समझौते को भारत के लिए 'घाटे का सौदा' करार दिया:

"20 फरवरी 2026 को अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति ट्रंप की जवाबी शुल्क नीति को अवैध घोषित कर दिया। इसके कारण 6 फरवरी के संयुक्त बयान में भारत को जो शुल्क-रियायत (25% से 18%) मिलने वाली थी, वह रातों-रात प्रभावी रूप से समाप्त हो गई। यही नहीं, कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिका ने भारत सहित अपने सभी व्यापारिक साझेदारों पर अस्थाई रूप से 10% का अतिरिक्त शुल्क भी थोप दिया।"

जयराम रमेश ने रेखांकित किया कि इस 10 फीसदी अस्थाई शुल्क का कानूनी आधार 24 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद क्या नीतियां होंगी, इसे लेकर वैश्विक बाजार में भारी अनिश्चितता बनी हुई है।

भारतीय किसानों पर संकट और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर घेराबंदी
कांग्रेस ने इस व्यापार वार्ता के जरिए सीधे तौर पर देश के कृषि क्षेत्र और प्रधानमंत्री की कूटनीति पर सवाल उठाए हैं:

मलेशिया से प्रेरणा लेने की सलाह: कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार को मलेशिया से सीख लेनी चाहिए, जिसने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते को सिरे से खारिज कर दिया।

किसानों को भारी नुकसान: जयराम रमेश के मुताबिक, अमेरिका इस वक्त भारत के खिलाफ चल रही अनुचित व्यापार प्रथाओं की जांच का डर दिखाकर नई दिल्ली पर दबाव बना रहा है। यदि भारत झुका, तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के किसानों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो जाएगी।

'ऑपरेशन सिंदूर' पर तीखा तंज: प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती पर निशाना साधते हुए रमेश ने कहा, "पीएम मोदी को अपने घनिष्ठ मित्र ट्रंप को खुश करने की नीति बंद करनी चाहिए। ट्रंप 100 से अधिक बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' रुकवाया था, लेकिन अब तक प्रधानमंत्री ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से चुनौती देने की हिम्मत नहीं दिखाई है।"


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