
इंडिया गठबंधन में अंदरूनी घमासान, कांग्रेस के खिलाफ CPI M ने खोला मोर्चा
INDIA गठबंधन की बैठक से पहले CPI(M) ने कांग्रेस पर केरल चुनाव में भाजपा से मिलीभगत के आरोप लगाकर गठबंधन की विश्वसनीयता कमजोर करने का आरोप लगाया।
विपक्षी INDIA गठबंधन की सोमवार (8 जून) को होने वाली अहम बैठक से पहले सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावी झटकों के बीच आयोजित इस बैठक से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] ने कांग्रेस नेतृत्व को एक पत्र लिखकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। यह पत्र अब बैठक में चर्चा और विवाद का प्रमुख विषय बन सकता है।
CPI(M) ने कांग्रेस पर लगाया "सुनियोजित अभियान" चलाने का आरोप
5 जून को भेजे गए पत्र में CPI(M) के महासचिव एम ए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी के खिलाफ एक "सुनियोजित राजनीतिक अभियान" चलाया।पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बार-बार यह आरोप लगाया कि CPI(M) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ परोक्ष समझौता कर लिया है। वामपंथी पार्टी ने इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।
राहुल और प्रियंका गांधी के बयानों पर भी जताई नाराजगी
CPI(M) ने अपने पत्र में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनावी बयानों का भी उल्लेख किया है। पार्टी का कहना है कि ये केवल व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं थीं, बल्कि कांग्रेस की एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा थीं।वाम दल ने यह भी याद दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान यह आरोप लगाया गया था कि पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच किसी प्रकार की समझ थी। CPI(M) ने इस आरोप को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
INDIA गठबंधन की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
CPI(M) का कहना है कि यह मामला केवल चुनावी बयानबाजी तक सीमित नहीं है। पार्टी के अनुसार, यदि INDIA गठबंधन के सहयोगी दल एक-दूसरे पर भाजपा से मिलीभगत के आरोप लगाते रहेंगे, तो इससे गठबंधन की विश्वसनीयता और आपसी विश्वास कमजोर होगा।पार्टी ने कांग्रेस नेताओं द्वारा पिनाराई विजयन के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की मांग पर भी सवाल उठाया है। CPI(M) ने पूछा है कि जब INDIA गठबंधन प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का विरोध करता है, तो फिर उसके सहयोगी दल ऐसे कदमों की मांग कैसे कर सकते हैं।
गठबंधन के भीतर ही उठाया गया मुद्दा
महत्वपूर्ण बात यह है कि CPI(M) ने अपनी नाराजगी गठबंधन से बाहर जाकर नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन के भीतर रहते हुए जाहिर की है। पार्टी ने पुष्टि की है कि उसके सांसद जॉन ब्रिटास सोमवार की बैठक में शामिल होंगे और यह मुद्दा वहां भी उठाया जाएगा।इससे संकेत मिलता है कि पार्टी फिलहाल गठबंधन छोड़ने के बजाय अपने मतभेदों को मंच के भीतर ही सुलझाना चाहती है।
कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता की तस्वीर
बैठक से पहले कांग्रेस नेतृत्व गठबंधन में एकता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि दिल्ली में होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक में 23 राजनीतिक दल शामिल होने जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि जो दल बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्होंने भी मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना मजबूत विरोध दर्ज कराया है।
कांग्रेस ने CPI(M) की आपत्तियों को किया हल्का
हालांकि कांग्रेस ने CPI(M) के पत्र को ज्यादा महत्व देने से परहेज किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रशीद अल्वी ने कहा कि चुनावों के दौरान राजनीतिक दल एक-दूसरे के खिलाफ बयान देते हैं और इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा माना जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान भी तृणमूल कांग्रेस और CPI(M) ने कांग्रेस के खिलाफ बयान दिए थे। अब चुनाव खत्म हो चुके हैं और सभी दलों को आगे बढ़ना चाहिए।
रशीद अल्वी ने विपक्षी एकता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर आना होगा।
DMK और JMM की नाराजगी भी बढ़ा रही चिंता
CPI(M) और कांग्रेस के बीच विवाद ऐसे समय सामने आया है जब INDIA गठबंधन पहले से ही कई आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।तमिलनाडु की प्रमुख सहयोगी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है। पार्टी कांग्रेस द्वारा तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ गठबंधन किए जाने को "विश्वासघात" बता चुकी है।
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) भी कांग्रेस से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है। पार्टी को इस बात पर आपत्ति है कि कांग्रेस ने झारखंड की दो राज्यसभा सीटों में से एक के लिए उम्मीदवार की घोषणा सहयोगियों से चर्चा किए बिना कर दी।
हालांकि JMM ने अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है, लेकिन उसकी नाराजगी गठबंधन के भीतर संवाद और समन्वय की कमी की ओर इशारा करती है।
बढ़ती दरारों के बीच INDIA गठबंधन की परीक्षा
राज्य स्तर की प्रतिद्वंद्विता, रणनीतिक मतभेद और नेतृत्व से जुड़े विवाद लंबे समय से INDIA गठबंधन के सामने चुनौती बने हुए हैं। अब CPI(M) का पत्र इन मतभेदों को और अधिक राजनीतिक धार देता नजर आ रहा है।ऐसे में सोमवार की बैठक केवल सरकार के खिलाफ रणनीति बनाने का मंच नहीं होगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि विपक्षी गठबंधन अपने भीतर बढ़ती असहमतियों और अविश्वास को किस तरह संभालता है। आने वाले समय में INDIA गठबंधन की एकता और राजनीतिक भविष्य काफी हद तक इसी क्षमता पर निर्भर करेगा।

