
'हिंदुओं 4 बच्चे पैदा करो और एक RSS को सौंप दो', क्यों वायरल हो रहा बाबा बागेश्वर का ये बयान?
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांदा में हनुमंत कथा के दौरान जनसंख्या, धर्म, शिक्षा और राष्ट्रवाद पर कई विवादित और तीखे बयान दिए। उन्होंने हिंदू समुदाय से जनसंख्या बढ़ाने की अपील करते हुए हर परिवार को कम से कम चार बच्चे पैदा करने को कहा।
बाबा बागेश्वर के नाम से मशहूर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान उन्होंने एक बार फिर ऐसा ही किया। कथा के बीच में व्यासपीठ से उन्होंने जनसंख्या, धर्म, शिक्षा और राष्ट्रवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात की और हिंदू समाज को एक तीखी चेतावनी भी दे डाली। उनके इन बयानों ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
जनसंख्या बढ़ाने की अपील: "हिंदू पैदा करें 4 बच्चे"
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समुदाय से अपनी जनसंख्या बढ़ाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि "हर हिंदू परिवार को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक को RSS के लिए समर्पित कर दें।" उनका मानना था कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में हिंदू समाज के लिए जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना मुश्किल हो जाएगा।
शास्त्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि "अगर जनसंख्या वृद्धि नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक पहचान खो देंगी। ऐसा समय आएगा जब हिंदू बच्चों के नाम भी नावेद और जावेद जैसे रखने पड़ेंगे।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू समाज को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है।
सरकारी नीतियों और बांग्लादेश के हालात का जिक्र
सरकार की 'हम दो, हमारे दो' वाली जनसंख्या नियंत्रण नीति पर सवाल उठाते हुए शास्त्री ने कहा, "अगर दो बच्चों को ही आदर्श माना जाता है, तो फिर कुछ लोग 30 बच्चे क्यों पैदा कर रहे हैं?" उन्होंने कहा कि सभी को जनसंख्या बढ़ानी होगी, अन्यथा एक-एक करके लोगों को खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि "जो हालात आज बांग्लादेश में हैं, अगर हिंदू समाज ने जनसंख्या पर ध्यान नहीं दिया, तो वही हालात भारत में भी पैदा हो जाएंगे।"
हर की पैड़ी और काबा पर टिप्पणी
हरिद्वार में हर की पैड़ी पर मुस्लिमों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध का समर्थन करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने सवाल उठाया, "मेरे आंगन में आपका क्या काम है? जब हम काबा नहीं जाते, तो आप बाबा के स्थान (हर की पैड़ी) पर क्यों आते हैं?" उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक स्थानों की पवित्रता बनाए रखने के लिए ऐसे फैसले जरूरी हैं।
हालांकि, उन्होंने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि मुस्लिम उनकी कथा में आने के लिए स्वतंत्र हैं। "यह उनका पुराना घर है, एक परिचित जगह है, और यहाँ आने में कुछ भी गलत नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "लेकिन अगर आपको हिंदुत्व से परहेज है, तो क्यों आते हैं? घर पर रहें और टेलीविजन पर हमारे प्रवचन देखें।"
शिक्षा पद्धति और सेक्युलरिज़्म पर प्रहार
शिक्षा के मुद्दे पर धीरेंद्र शास्त्री ने आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा पद्धति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी वैदिक परंपराओं और यज्ञ की संस्कृति से फिर से जुड़ना होगा। गुरुकुल प्रणाली का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि "प्राचीन काल में गुरुकुल में मूल्य-आधारित शिक्षा दी जाती थी।"
शास्त्री ने एक व्यंग्यात्मक उदाहरण देते हुए कहा, "पहले बच्चे 'ग' से 'गणेश' सीखते थे, लेकिन अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के प्रभाव के बाद बच्चे 'ग' से 'गधा' सीखने लगे और मूल्यों से वंचित हो गए।" उन्होंने आगे कहा कि देश सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) से बर्बाद हो रहा है और जो लोग गुरुकुल परंपरा का विरोध करते हैं, वे देश को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
जातिवाद नहीं, राष्ट्रवाद जरूरी
शास्त्री ने जोर देकर कहा कि अगर समाज अपनी जड़ों की ओर नहीं लौटता है, तो हिंदू परिवारों की धार्मिक पहचान को भविष्य में संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास जातिवाद से नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से हिंदू-मुस्लिम मुद्दों से ऊपर उठकर बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल का ऐलान
कथा के अंत में उन्होंने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि बागेश्वर धाम में एक कैंसर अस्पताल का निर्माण चल रहा है जो 2027 तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा, "पहले अस्पतालों में मंदिर होते थे; अब मंदिरों में अस्पताल होंगे।" शास्त्री ने यह भी जानकारी दी कि इस अस्पताल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
धीरेंद्र शास्त्री के ये बयान निश्चित रूप से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा करेंगे। उनके जनसंख्या बढ़ाने वाले बयान से लेकर हर की पैड़ी पर की गई टिप्पणी तक, हर मुद्दे पर अब बहस तेज होने की संभावना है। उनकी इस कथा ने बांदा को एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना दिया है।

