दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी पर दर्ज होगी FIR, इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त निर्देश
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दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी पर दर्ज होगी FIR, इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता के आरोपों की जांच के लिए एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने रायबरेली पुलिस को मामले की जांच करने को कहा है।


भारतीय राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश राहुल गांधी की कथित 'दोहरी नागरिकता' (Dual Citizenship) के विवाद से जुड़ा है। इस निर्देश के साथ ही हाईकोर्ट ने लखनऊ की एक विशेष एमपी/एमएलए (MP/MLA) कोर्ट के पुराने फैसले को पलट दिया है, जिसने इस याचिका को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया था।

क्या हैं हाईकोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु?

यह पूरा मामला कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर आधारित है। शिशिर का दावा है कि उनके पास ब्रिटेन (UK) से जुड़े कुछ "गोपनीय ईमेल" और कॉरपोरेट दस्तावेज हैं। याचिका के अनुसार, राहुल गांधी ब्रिटेन की अब बंद हो चुकी एक कंपनी 'मैसर्स बैकऑप्स लिमिटेड' (M/s Backops Ltd) में निदेशक थे। आरोप है कि 2003 से 2009 के बीच कंपनी के वार्षिक रिटर्न में राहुल गांधी ने स्वेच्छा से अपनी नागरिकता "ब्रिटिश" घोषित की थी।

जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने माना कि इन आरोपों की प्रकृति बेहद गंभीर है और इसकी जांच ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, पासपोर्ट एक्ट और फॉरेनर्स एक्ट के तहत होनी चाहिए। कोर्ट ने रायबरेली (जो राहुल गांधी का वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र है) के कोतवाली थाने को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह अधिकार दिया है कि वह अपनी एजेंसियों से जांच कराए या मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दे।

क्या भारत में कोई सांसद विदेशी नागरिकता रख सकता है?

भारतीय संविधान के अनुसार, इसका जवाब स्पष्ट रूप से "नहीं" है।

अनुच्छेद 9: स्पष्ट कहता है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता तत्काल समाप्त हो जाती है।

अनुच्छेद 84: के तहत लोकसभा या राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।

यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश पासपोर्ट था या उन्होंने वहां की नागरिकता ली थी, तो उनकी संसद सदस्यता तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इतना ही नहीं, उन पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर भी रोक लग सकती है। नागरिकता अधिनियम 1955 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत राष्ट्रपति, चुनाव आयोग की सलाह पर ऐसे सदस्य की सीट को खाली घोषित कर सकते हैं।

संसद सत्र पर क्या होगा असर?

हाईकोर्ट का यह आदेश ऐसे समय में आया है जब संसद का विशेष सत्र चल रहा है और संविधान (131वें संशोधन) विधेयक पर अंतिम बहस जारी है। एक तरफ राहुल गांधी 850 सीटों के विस्तार और परिसीमन को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी खुद की नागरिकता पर FIR का आदेश कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल सकता है।

कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से इन आरोपों को "राजनीतिक प्रतिशोध" बताकर खारिज किया है। लेकिन अब कानूनी रूप से मामला दर्ज होने के बाद, सरकार और जांच एजेंसियां ब्रिटेन के 'कंपनी हाउस' रिकॉर्ड की जांच कर सकती हैं। गृह मंत्रालय पहले ही 2019 में इस संबंध में एक नोटिस जारी कर चुका है।

यह "नागरिकता बम" राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। जहां एक तरफ सरकार भारत का नया चुनावी नक्शा खींचने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे की पहचान अब कानूनी सूक्ष्मदर्शी (Microscope) के नीचे है। अगर यह मामला CBI के पास जाता है, तो इसकी आंच अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है।

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