
टेरर फंडिंग और क्रिप्टो जालसाजों की खैर नहीं, ED का नया 'एक्शन प्लान'
निदेशक राहुल नवीन ने 70वें 'ईडी दिवस' के अवसर पर ₹63,142 करोड़ की संपत्ति की बहाली और उभरते डिजिटल खतरों की ओर रणनीतिक बदलाव पर जोर दिया...
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक राहुल नवीन ने शुक्रवार (1 मई) को कहा कि एजेंसी के नए फोकस क्षेत्र अब क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी, टेरर फाइनेंसिंग (आतंकवाद का वित्तपोषण), साइबर-सक्षम अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी हैं।
दिल्ली में आयोजित 70वें 'ईडी दिवस' कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) अधिनियम और रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (RERA) के कार्यान्वयन के कारण बैंक और रियल एस्टेट धोखाधड़ी के मामलों में कमी आई है।
उन्होंने बताया कि 2025-26 के दौरान, ईडी ने 812 आरोप पत्र (चार्जशीट) और 155 पूरक आरोप पत्र दाखिल किए हैं, जो पिछले तुलनीय वित्त वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है। उन्होंने आगे जोड़ा कि एजेंसी की दोषसिद्धि दर (conviction rate) 94 प्रतिशत रही है।
निदेशक ने कहा कि अदालतों में मनी लॉन्ड्रिंग के 2,400 मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि इनमें से "अधिकांश" मामलों में सजा होगी।
नवीन ने कहा कि एजेंसी ने घर खरीदारों, निवेशकों और बैंकों सहित वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को 63,142 करोड़ रुपये की संपत्ति वापस (restituted) की है। इस संघीय जांच एजेंसी की स्थापना 1 मई, 1956 को हुई थी।
यह एजेंसी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के नागरिक प्रावधानों के अलावा दो आपराधिक कानूनों—धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) को लागू करती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)

