दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र में SIR की तारीख तय, चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल
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16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में तीसरे चरण में एसआईआर होगा- फाइल फोटो

दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र में SIR की तारीख तय, चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल

चुनाव आयोग ने SIR के तीसरे चरण की घोषणा की, जिसमें 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण होगा।


चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे चरण का ऐलान कर दिया है। इस चरण में देश के 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए हैं।आयोग के मुताबिक इस फेज में ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, दमन और दीव, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, नागालैंड और त्रिपुरा में SIR की प्रक्रिया की जाएगी। अब सिर्फ हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख का शेड्यूल आना बाकी है।

दिल्ली में 20 जून से एसआईआर

दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया 20 जून से शुरू होगी और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सात अक्तूबर को किया जाएगा। पंजाब में 15 जून से एसआईआर, अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 1 अक्तूबर को होगा। उत्तराखंड में 29 मई से एसआईआर की प्रक्रिया, अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर को किया जाएगा।


चुनाव आयोग के अनुसार, SIR के तीसरे चरण में 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। इस दौरान करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं से सीधे संवाद किया जाएगा।

तीसरे चरण के लॉन्च के मौके पर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मतदाताओं से इस संशोधन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।उन्होंने कहा, "मैं सभी मतदाताओं से अपील करता हूँ कि वे विशेष गहन संशोधन (SIR) के तीसरे चरण में पूरे उत्साह के साथ भाग लें और अपने गणना फॉर्म जमा करें।" मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करके सटीक मतदाता सूचियां बनाए रखना है कि केवल पात्र नागरिक ही सूची में शामिल रहें, जबकि अपात्र प्रविष्टियों को रोका जाए।

अब तक कितने राज्यों में हुआ SIR?

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का फैसला लिया था। अब तक इस प्रक्रिया के पहले दो चरण पूरे हो चुके हैं, जिनमें 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल रहे।पहले चरण में बिहार में SIR कराया गया था। इसके बाद दूसरे चरण की शुरुआत 28 अक्टूबर 2025 से हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप को शामिल किया गया।

आयोग के मुताबिक पहले दो चरणों में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA ने काम किया।

आखिर SIR क्या है?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके जरिए वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है। इसके तहत अधिकारी घर-घर जाकर लोगों का सत्यापन करते हैं।18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं। जिन लोगों की मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। साथ ही नाम, पता या अन्य जानकारी में हुई गलतियों को भी सुधारा जाता है।

यह काम कौन करता है?

इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) पर होती है। ये लोग घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं और जरूरी फॉर्म भरवाते हैं।

वोटर को क्या करना होगा?

SIR के दौरान BLO या BLA मतदाताओं को फॉर्म देंगे। वोटर को अपनी जानकारी की जांच करनी होगी।अगर किसी व्यक्ति का नाम दो जगह वोटर लिस्ट में दर्ज है, तो उसे एक जगह से हटवाना होगा। वहीं अगर नाम सूची में नहीं है, तो नया नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करना होगा और जरूरी दस्तावेज देने होंगे।

कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे?

SIR प्रक्रिया के लिए कई दस्तावेज मान्य रखे गए हैं, जिनमें —

आधार कार्ड

जन्म प्रमाणपत्र

पासपोर्ट

10वीं की मार्कशीट

पेंशनर पहचान पत्र

सरकारी विभाग का पहचान पत्र

स्थायी निवास प्रमाणपत्र

जाति प्रमाणपत्र

वन अधिकार प्रमाणपत्र

NRC में नाम

परिवार रजिस्टर में नाम

जमीन या मकान आवंटन पत्र शामिल हैं।

SIR की जरूरत क्यों पड़ी?

चुनाव आयोग का कहना है कि 1951 से 2004 तक कई बार मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण हुआ, लेकिन पिछले 21 वर्षों में बड़े स्तर पर बदलाव जरूरी हो गए हैं।इस दौरान लोगों का माइग्रेशन बढ़ा, कई लोगों के नाम दो-दो जगह दर्ज हो गए, कुछ मृत लोगों के नाम अब भी सूची में बने हुए हैं और कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों के नाम भी शामिल पाए गए। आयोग का मकसद है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

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