LPG के बाद अब महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल,सरकार अगले हफ्ते लेगी फैसला
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LPG के बाद अब महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल,सरकार अगले हफ्ते लेगी फैसला

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह करीब चार साल बाद पहली बड़ी बढ़ोतरी होगी। गौरतलब है कि साल 2022 से अब तक देश में ईंधन की रिटेल कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं।


देश में एक बार फिर महंगाई का झटका लगने वाला है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच भारत सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) के दाम बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अगले कुछ दिनों में कीमतों में संशोधन किया जा सकता है।

कितने बढ़ सकते हैं दाम?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमतों में 40 से 50 रुपये तक का इजाफा देखा जा सकता है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह करीब चार साल बाद पहली बड़ी बढ़ोतरी होगी। गौरतलब है कि साल 2022 से अब तक देश में ईंधन की रिटेल कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

ईंधन की कीमतों में इस संभावित उछाल का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और युद्ध की स्थिति है। मिडल ईस्ट में अस्थिरता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई बाधित होने का डर बना हुआ है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बेंचमार्क कीमतें पिछले कुछ हफ्तों में काफी ऊपर चली गई हैं।

चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों (OMCs) पर पड़ता है। पिछले काफी समय से रिटेल कीमतें न बढ़ने की वजह से तेल कंपनियां नुकसान झेल रही हैं, जिसे तकनीकी भाषा में 'अंडर-रिकवरी' कहा जाता है। अब कंपनियों के लिए इस घाटे को और अधिक सहन करना मुश्किल हो रहा है।

5 से 7 दिनों में बड़ा फैसला

सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार पश्चिम एशिया के हालात और ऊर्जा बाजार पर इसके प्रभाव की बारीकी से निगरानी कर रही है। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन उम्मीद है कि अगले 5 से 7 दिनों के भीतर कीमतों में बढ़ोतरी पर मुहर लग सकती है।

सरकार के भीतर चल रही उच्च स्तरीय बैठकों में इस बात पर चर्चा हो रही है कि कीमतों में कितनी और कब बढ़ोतरी की जाए। अधिकारियों का कहना है कि सरकार एक तरफ तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत सुधारना चाहती है, तो दूसरी तरफ वह यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि इस बढ़ोतरी से महंगाई (Inflation) बेकाबू न हो जाए।

आम जनता पर क्या होगा असर?

पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर न केवल आम आदमी की जेब पर पड़ता है, बल्कि इससे माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन भी महंगा हो जाता है। जब ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता है, तो फल, सब्जियां और अन्य जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ जाते हैं। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ना तय है।

सरकार के लिए यह एक संवेदनशील फैसला है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में महंगाई को नियंत्रित रखना एक बड़ी चुनौती है। अब देखना यह है कि सरकार तेल कंपनियों को राहत देने और जनता को महंगाई से बचाने के बीच कैसे संतुलन बिठाती है।

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