पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट से झटका, पासपोर्ट केस में नहीं मिली राहत
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पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट से झटका, पासपोर्ट केस में नहीं मिली राहत

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पासपोर्ट विवाद में पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक साजिश बताया।


गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 अप्रैल) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें उनके पास कई पासपोर्ट होने के आरोप लगाए गए हैं।

न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया ने इस मामले की सुनवाई की थी और 21 अप्रैल को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार अभी बाकी है।

बचाव पक्ष ने बताया राजनीतिक साजिश

पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है, खासकर चुनाव के मद्देनजर। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयानों से निष्पक्ष जांच पर सवाल उठते हैं।सिंघवी ने अदालत में कहा, “जब मुख्यमंत्री खुद इस मामले में सक्रिय हैं, तो याचिकाकर्ता निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद कैसे कर सकता है?” उन्होंने यह भी कहा कि खेड़ा के फरार होने का कोई खतरा नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता केएन चौधरी ने भी बचाव पक्ष का समर्थन करते हुए आरोपों को “सनसनीखेज” और दुर्भावनापूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आरोपों का स्वरूप ऐसा है, जिससे साफ लगता है कि इन्हें जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए लगाया गया है। उनके अनुसार, यदि मामला बनता भी है, तो यह अधिकतम आपराधिक मानहानि का हो सकता है, जिसे निजी शिकायत के रूप में उठाया जाना चाहिए।

राज्य सरकार ने लगाए गंभीर आरोप

राज्य की ओर से असम के एडवोकेट जनरल देवाजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को राहत देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल मानहानि का नहीं है, बल्कि इसमें जालसाजी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।उनके मुताबिक, फर्जी दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात तैयार करने के आरोप इस मामले का केंद्र हैं, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों की भूमिका

इससे पहले 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे उचित अदालत में अपील कर सकें।हालांकि, 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने इस राहत पर रोक लगा दी। साथ ही यह स्पष्ट किया कि अगर खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो इस अंतरिम आदेश का उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत पर लगी रोक हटाने और उसे आगे बढ़ाने की मांग की थी।

एफआईआर में क्या हैं आरोप

गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं लगाई गई हैं। इनमें चुनाव से जुड़े झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी, सार्वजनिक दस्तावेजों में हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, अपमान और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं।यह मामला पवन खेड़ा के उस सार्वजनिक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास तीन पासपोर्ट हैं।

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