जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने देश के नए CDS, संभाला कार्यभार
x

जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने देश के नए CDS, संभाला कार्यभार

जनरल अनिल चौहान की सेवानिवृत्ति के बाद जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने संभाला देश के तीसरे सीडीएस का पदभार। सेनाओं में 'JAI' (जय) फॉर्मूले पर रहेगा मुख्य फोकस।


India's New CDS: भारतीय सशस्त्र बलों में एक नए युग की शुरुआत करते हुए जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने रविवार (31 मई 2026) को देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्हें साउथ ब्लॉक में गरिमामयी औपचारिक 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। वह गढ़वाल रेजिमेंट के एक बेहद वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अधिकारी हैं। जनरल सुब्रमणि ने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जो 30 मई को अपना सफल कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। देश के सर्वोच्च सैन्य पद की कमान संभालने के तुरंत बाद जनरल सुब्रमणि ने अपना विजन साफ कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों का मुख्य फोकस ‘JAI’ (जय) यानी जॉइंटनेस (संयुक्तता), आत्मनिर्भरता और इनोवेशन (नवाचार) पर केंद्रित रहेगा।


40 साल का गौरवशाली करियर: असम से लेकर कश्मीर तक उग्रवाद को कुचला
जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि का सैन्य सफर पिछले 40 वर्षों से अधिक का रहा है, जिसमें उन्होंने देश के विभिन्न चुनौतीपूर्ण संघर्ष क्षेत्रों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अपनी वीरता और रणनीतिक कौशल का लोहा मनवाया है। उन्होंने असम में 'ऑपरेशन राइनो' के तहत उग्रवाद-रोधी अभियानों के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली थी। इसके अलावा, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और बेहद संवेदनशील अभियानगत माहौल में मध्य क्षेत्र में 17 माउंटेन डिवीजन का भी सफल नेतृत्व किया। उन्हें भारतीय सेना की पश्चिमी मोर्चे पर तैनात प्रमुख स्ट्राइक कोर ‘II कोर’ सहित दो कोर की कमान संभालने का अनूठा गौरव भी प्राप्त है।

थल सेना के उप प्रमुख से सीडीएस बनने तक का सफर और शैक्षणिक प्रोफाइल
14 दिसंबर 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन पाने वाले जनरल सुब्रमणि की गिनती सेना के सबसे तेज-तर्रार और रणनीतिक अधिकारियों में होती है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के स्नातक जनरल सुब्रमणि ने 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थलसेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Army Staff) के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद, 1 सितंबर 2025 से वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थे। वह जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज (UK) और नेशनल डिफेंस कॉलेज (नई दिल्ली) के पूर्व छात्र रहे हैं। उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स और मद्रास विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में एम.फिल की डिग्री है, जो उन्हें वैश्विक और रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ बनाती है।

कजाखस्तान में डिफेंस अटैशे और सैन्य खुफिया विभाग में अहम भूमिका
अपनी फील्ड कमांड के अलावा जनरल सुब्रमणि ने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और प्रशिक्षण पदों पर काम किया है। वे एक माउंटेन ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, कजाखस्तान में भारत के रक्षा अताशे (Defense Attache), सैन्य सचिव शाखा में सहायक सैन्य सचिव, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के उप कमांडर और रक्षा मंत्रालय (थलसेना) के एकीकृत मुख्यालय में सैन्य खुफिया (Military Intelligence) के उप महानिदेशक जैसे बेहद संवेदनशील पदों पर अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं। देश की पश्चिमी और उत्तरी दोनों सीमाओं की सुरक्षा और ऑपरेशनल स्थितियों पर उनकी गहरी पकड़ है।

परम विशिष्ट सेवा पदक सहित कई शीर्ष सम्मानों से हैं अलंकृत
देश के प्रति उनकी असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि को कई सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उनके पदकों की सूची में परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) शामिल हैं।

गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार ने तीनों सेनाओं (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) के बीच बेहतर तालमेल और आधुनिक एकीकरण के लिए साल 2020 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद सृजित किया था, जिसके बाद जनरल बिपिन रावत देश के पहले सीडीएस बने थे। अब जनरल सुब्रमणि के कंधों पर भारतीय सेनाओं को 'जॉइंटनेस' और 'आत्मनिर्भरता' के नए युग में ले जाने की बड़ी जिम्मेदारी है।


Read More
Next Story