सोना-चांदी फिर महंगा, सरकार ने बढ़ाया आयात शुल्क, देना होगा 15% टैक्स
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प्रतीकात्मक चित्र।

सोना-चांदी फिर महंगा, सरकार ने बढ़ाया आयात शुल्क, देना होगा 15% टैक्स

वित्त मंत्रालय ने 12 मई को कई सीमा शुल्क अधिसूचनाओं के जरिए इन बदलावों की जानकारी दी। संशोधित दरें 13 मई से लागू हो गई हैं।


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भारत सरकार ने सोने और चांदी के आयात शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। सरकार ने 2024 में की गई शुल्क कटौती को वापस लेते हुए यह कदम बढ़ते बुलियन आयात पर नियंत्रण, व्यापार घाटा कम करने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया है। वित्त मंत्रालय ने 12 मई को कई सीमा शुल्क अधिसूचनाओं के जरिए इन बदलावों की जानकारी दी। संशोधित दरें 13 मई से लागू हो गई हैं।


अधिसूचनाओं के अनुसार, सरकार ने सोने और चांदी के कई वर्गों पर मूल सीमा शुल्क को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (AIDC) पहले की तरह जारी रहेगा। इस तरह कुल प्रभावी आयात कर अब 15 प्रतिशत हो गया है।

इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना संख्या 16/2026-कस्टम्स के तहत कीमती धातुओं से जुड़े फाइंडिंग्स और पुनर्चक्रण योग्य धातु अपशिष्ट पर सीमा शुल्क दरों में भी संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत सोने और चांदी के फाइंडिंग्स पर 5 प्रतिशत सीमा शुल्क लगेगा, जबकि प्लैटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।

अधिसूचना के मुताबिक, कीमती धातुओं वाले स्पेंट कैटेलिस्ट या राख के आयात पर 4.35 प्रतिशत की रियायती ड्यूटी लागू होगी, बशर्ते संबंधित शर्तों और रीसाइक्लिंग मंजूरियों का पालन किया जाए।

उद्योग जगत से जुड़े अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अधिक शुल्क से आधिकारिक आयात भले कम हो जाए। लेकिन इससे तस्करी की गतिविधियां दोबारा बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि पहले शुल्क में कटौती के बाद तस्करी के मामलों में कमी आई थी।

राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, संशोधित शुल्क सोना, चांदी, प्लैटिनम फाइंडिंग्स, कीमती धातु की राख और कीमती धातुओं वाले स्पेंट कैटेलिस्ट पर लागू होंगे।

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और बुलियन आयात के कारण भारत के चालू खाते के घाटे और मुद्रा पर दबाव बढ़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष भारतीय रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा है और हाल ही में डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।

रॉयटर्स के मुताबिक, भारत ने जुलाई 2024 में सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था, ताकि तस्करी पर रोक लगाई जा सके और रत्न एवं आभूषण उद्योग को समर्थन मिल सके। अब सरकार के ताजा फैसले से पहले वाली उच्च शुल्क व्यवस्था प्रभावी रूप से फिर बहाल हो गई है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा आयातक है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश लगभग पूरी तरह विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है। रॉयटर्स ने कहा कि सरकार का मानना है कि अधिक शुल्क से आयात घटेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।

यह शुल्क वृद्धि पिछले कुछ महीनों में बुलियन बाजार में हुए कई घटनाक्रमों के बाद सामने आई है। रॉयटर्स ने पहले बताया था कि अप्रैल में सरकारी मंजूरी आदेशों में देरी के कारण भारतीय बैंकों ने अस्थायी रूप से सोने और चांदी के आयात रोक दिए थे, जिससे कई टन बुलियन सीमा शुल्क विभाग में फंसा रह गया था।

इसके अलावा, अधिकारियों द्वारा बुलियन शिपमेंट पर 3 प्रतिशत एकीकृत जीएसटी (IGST) लागू करने के बाद भी बैंकों ने आयात रोक दिया था।

रॉयटर्स के हवाले से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष भारत में सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी हुई, जिससे व्यापार घाटा और बढ़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सोने का आयात सालाना आधार पर 1.6 प्रतिशत बढ़कर 58.9 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि चांदी का आयात 44 प्रतिशत बढ़कर 9.2 अरब डॉलर हो गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया कि केवल जनवरी 2026 में ही सोने का आयात लगभग 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे भारत का व्यापार घाटा तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में नागरिकों से एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील भी कर चुके हैं, ताकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण बढ़ती तेल कीमतों के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सके।

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