
परिसीमन पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, 'सरकार अंधेरे से डरी हुई है, समस्याओं से बच रही है'
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन महिला आरक्षण और परिसीमन बिल 2026 पर गरमागरम बहस हुई। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिलाओं को राष्ट्र की प्रेरक शक्ति बताया और सरकार पर समस्याओं से भागने का आरोप लगाया।
Rahul Gandhi In Lok Sabha: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय लिखा जा रहा है। 16 अप्रैल 2026 से शुरू हुए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र का आज दूसरा दिन है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए परिसीमन (Delimitation) और बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा करना है। प्रस्तावित बिल के अनुसार, कुल सीटों का 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा, जो व्यवस्था शुरुआती 15 सालों के लिए लागू होगी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस चर्चा में भाग लेते हुए सरकार को घेरा और उन्होंने अपने भाषण में कहा कि, 'ये देश विरोधी बिल है और हम देश का चुनावी नक्शा नहीं बदलने देंगे।'
राहुल गांधी का संबोधन: "महिलाएं हमारी शक्ति"
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। इसके साथ ही साथ राहुल ने महिला आरक्षण का समर्थन किया, लेकिन साथ ही सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "महिलाएं हमारे राष्ट्रीय कल्पना की प्रेरक शक्ति हैं। हम सभी ने अपनी जिंदगी में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है और उनसे ज्ञान प्राप्त किया है।" राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना देश का विकास अधूरा है।
सरकार पर तीखा प्रहार
राहुल गांधी ने परिसीमन और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यह सरकार समस्याओं का सामना करने के बजाय उनसे बच रही है। उन्होंने एक रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा, "यह सरकार डरी हुई है और अंधेरे में नहीं जाना चाहती। अगर आप किसी समस्या का समाधान चाहते हैं, तो आपको उसके पार जाना होगा, उससे भागकर कुछ हासिल नहीं होगा।" राहुल गांधी ने संसद में कहा कि भाजपा दक्षिण भारतीय राज्यों, पूर्वोत्तर के राज्यों और छोटे राज्यों को यह संदेश दे रही है कि अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए हम आपका प्रतिनिधित्व छीन लेंगे। उन्होंने इसे राष्ट्र-विरोधी कार्य करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक एंटी-नेशनल एक्ट है और हम आपको ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।
राहुल गांधी ने अमित शाह को भी घेरा
जाति जनगणना के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा यह नहीं है कि घरों में जाति होती है या नहीं, बल्कि असली सवाल यह है कि क्या जाति जनगणना का इस्तेमाल संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व तय करने के लिए होगा? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा यह है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का राजनीति और प्रतिनिधित्व से कोई संबंध न रहे। राहुल ने इस पूरी लड़ाई को 'मनुवाद बनाम संविधान' की लड़ाई करार दिया और कहा कि इसके लिए सरकार को संविधान संशोधन की जरूरत पड़ेगी, जिसे विपक्ष की चुनौतियों का सामना करना होगा।
दादी इंदिरा गांधी की वो कहानी और 'डर' का संदेश
राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक बेहद निजी और भावनात्मक किस्सा साझा किया। उन्होंने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने बचपन में राहुल को डर का सामना करना सिखाया था।
राहुल ने कहा, "एक बार मेरे माता-पिता डिनर के लिए बाहर गए थे। मेरी दादी मुझे एक अंधेरे गार्डन में ले गईं और मुझे वहां अकेला छोड़ दिया। मैं बहुत छोटा था और अंधेरे से मेरी हवा निकल गई थी। वह केवल दो-तीन मिनट का समय था, लेकिन मुझे वह दो घंटे जैसा लगा। मुझे लग रहा था कि कोई कुत्ता आकर काट लेगा या कोई अनजानी चीज मुझे नुकसान पहुँचाएगी।"
उन्होंने आगे बताया, "जब दादी वापस आईं, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम किस बात से डर रहे थे? मैंने बताया कि मुझे उन चीजों से डर लग रहा था जो वहां शायद थीं ही नहीं। तब दादी ने मुझे जीवन का सबसे बड़ा सबक दिया। उन्होंने कहा, 'तुम्हें अंधेरे से या किसी चीज से डर नहीं लग रहा था, असल में डर तो तुम्हारे दिमाग के अंदर था'।"
सीटों का नया गणित और आरक्षण
सत्र के दौरान परिसीमन के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो लोकसभा का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। 850 सीटों के साथ संसद भवन का विस्तार न केवल संख्या बल बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति के संतुलन को भी प्रभावित करेगा। 33 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से संसद में महिलाओं की आवाज पहले से कहीं ज्यादा बुलंद होने की उम्मीद है।
विशेष सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही ने स्पष्ट कर दिया है कि जहां सरकार इसे एक ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की राजनीतिक चाल और 'डर' से जोड़कर देख रहा है। राहुल गांधी के भाषण ने इस बहस को एक मानवीय और दार्शनिक मोड़ दे दिया है। अब सबकी नजरें सत्र के आखिरी दिन और बिल के भविष्य पर टिकी हैं।

