
हंतावायरस पर ICMR का बड़ा अपडेट, भारत को नहीं डरने की जरूरत; ये है कारण
हंतावायरस को लेकर ICMR का बड़ा बयान आया है, जिसमें कहा गया है कि भारत को फिलहाल कोई खतरा नहीं, संक्रमण के फैलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है...
क्रूज शिप पर सवार दो भारतीय नागरिकों में हंतावायरस (Hantavirus) संक्रमण की खबरों के बीच, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने स्पष्ट किया है कि इससे भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य को कोई तत्काल खतरा नहीं है। ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने शुक्रवार (8 मई) को कहा कि ये मामले पूरी तरह से 'आइसोलेटेड' (इक्के-दुक्के) हैं और देश में इस वायरस के 'कम्युनिटी स्प्रेड' (सामुदायिक प्रसार) का कोई साक्ष्य नहीं मिला है।
कैसे फैलता है हंतावायरस?
डॉ. कुमार ने विस्तार से बताते हुए कहा कि हंतावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों या उनके उत्सर्जन (जैसे लार, मूत्र और मल) के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। लोग आमतौर पर तब संक्रमित होते हैं जब वे बंद या कम हवादार स्थानों (जैसे गोदामों, जहाजों, खलिहान और भंडारण क्षेत्रों) में चूहों के मलमूत्र से निकलने वाले वायरस के कणों को सांस के जरिए शरीर में ले जाते हैं।
क्रूज शिप का मामला और WHO का रुख
यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें एक क्रूज शिप पर दो भारतीयों के संक्रमित होने की बात कही गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ये दोनों यात्री जहाज पर पाए गए संदिग्ध संक्रमणों के एक छोटे क्लस्टर का हिस्सा थे। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि हालांकि यह एक गंभीर घटना है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम फिलहाल 'कम' है। उन्होंने यह भी कहा कि इंक्यूबेशन पीरियड (ऊष्मायन अवधि) को देखते हुए भविष्य में कुछ और मामले सामने आ सकते हैं।
कोविड-19 से अलग है हंतावायरस
डॉ. कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि कोविड-19 के विपरीत, हंतावायरस इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता। उन्होंने स्पष्ट किया, "मानव-से-मानव संचरण (Human-to-human transmission) अत्यंत दुर्लभ है। एशिया और यूरोप में पाए जाने वाले अधिकांश हंतावायरस इंसानों के बीच नहीं फैलते। इसके सीमित संचरण के मामले केवल दक्षिण अमेरिकी स्ट्रेन (जैसे एंडीज वायरस) में ही देखे गए हैं।"
लक्षण और पहचान
हंतावायरस के लक्षण आमतौर पर संपर्क में आने के एक से पांच सप्ताह बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में यह फ्लू, डेंगू या गंभीर श्वसन रोग जैसा लग सकता है, जिससे शुरुआती निदान चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:
अचानक तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में गंभीर दर्द।
थकान, ठंड लगना और जी मिचलाना।
पेट दर्द, उल्टी और सूखी खांसी।
गंभीर स्थिति में सांस लेने में कठिनाई, निम्न रक्तचाप (Low BP) या किडनी पर असर पड़ना।
भारत की तैयारी और सुरक्षा उपाय
डॉ. कुमार ने भारत की तैयारियों पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश में संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए पर्याप्त लैब नेटवर्क उपलब्ध है। ICMR-NIV और देशभर में फैले 165 वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (VRDL) नेटवर्क के पास RT-PCR सुविधाएं मौजूद हैं।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जहाजों, गोदामों और कम हवादार जगहों पर काम करने वाले लोग साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और चूहों वाले इलाकों से बचें। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन, बाढ़ और अनियंत्रित शहरीकरण भविष्य में ऐसे कृंतक-जनित (rodent-borne) रोगों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

