
अटलांटिक में हंतावायरस तांडव! क्रूज शिप पर मौत का साया, 2 भारतीय फंसे
जहाज के बहुराष्ट्रीय क्रू में दो भारतीय नागरिक शामिल। हालांकि उनकी पहचान, स्वास्थ्य स्थिति, जहाज पर उनकी ड्यूटी या संक्रमित यात्रियों के संपर्क में आने की...
अटलांटिक महासागर में घातक हंतावायरस (Hantavirus) की चपेट में आए लग्जरी जहाज 'एमवी होंडियस' (MV Hondius) पर सवार 149 लोगों में दो भारतीय चालक दल (क्रू) के सदस्य भी शामिल हैं। इस प्रकोप ने अब तक तीन लोगों की जान ले ली है और आठ यात्री इससे संक्रमित पाए गए हैं।
डच पोलर ट्रैवल कंपनी 'ओशनवाइड एक्सपीडिशन' द्वारा संचालित यह जहाज वर्तमान में स्पेन के कैनरी द्वीप समूह में टेनेरिफ़ (Tenerife) की ओर बढ़ रहा है। इससे पहले, प्रकोप के कारण इसे केप वर्डे में रुकने का आदेश दिया गया था।
ट्रैवल कंपनी ने 'इंडिया टुडे टीवी' को पुष्टि की है कि जहाज के बहुराष्ट्रीय क्रू में दो भारतीय नागरिक शामिल थे। हालांकि उनकी पहचान, स्वास्थ्य स्थिति, जहाज पर उनकी ड्यूटी या संक्रमित यात्रियों के संपर्क में आने की संभावना के संबंध में कोई विवरण साझा नहीं किया गया है।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को सक्रिय कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई देश यात्रियों की निगरानी कर रहे हैं और विभिन्न महाद्वीपों में संपर्कों का पता लगा रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ प्रकोप?
'एमवी होंडियस' 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया (Ushuaia) से 23 देशों के 149 यात्रियों और क्रू के साथ रवाना हुआ था। अधिकांश यात्री अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और स्पेन से हैं। अर्जेंटीना के जांचकर्ताओं का मानना है कि यह संक्रमण उशुआइया के पास पक्षी देखने (Birdwatching) के एक दौरे के दौरान शुरू हुआ, जहां एक डच दंपति ने संक्रमित कृन्तकों (रोडेंट्स/चूहों) की बीट से दूषित सूक्ष्म कणों को सांस के जरिए अंदर ले लिया होगा।
जहाज पर सवार होने से पहले यात्रियों में कोई लक्षण नहीं दिखे थे। पहली मौत 11 अप्रैल को जहाज पर ही हुई, जिसका शव 24 अप्रैल को सेंट हेलेना में उतारा गया। कुछ दिनों बाद, उस यात्री की पत्नी की भी वापसी यात्रा के दौरान बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। ये दोनों डच नागरिक थे।
27 अप्रैल को एक अन्य यात्री में गंभीर लक्षण विकसित हुए और उसे हवाई मार्ग से जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने 'एंडीज स्ट्रेन' के हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि की। यात्री की स्थिति नाजुक लेकिन स्थिर बनी हुई है। मई की 2 तारीख को एक तीसरे यात्री (जर्मन नागरिक) की भी जहाज पर मृत्यु हो गई।
उच्च मृत्यु दर वाला दुर्लभ वायरस
हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों द्वारा फैलता है और सूखे मूत्र या बीट से हवा में फैलने वाले कणों के माध्यम से इंसानों तक पहुंचता है। अमेरिका में पाया जाने वाला 'एंडीज स्ट्रेन' विशेष रूप से चिंताजनक है। क्योंकि यह बेहद करीबी संपर्क के माध्यम से मनुष्यों के बीच भी फैल सकता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह संक्रमण सामान्य निकटता या आकस्मिक संपर्क से नहीं फैलता है। WHO की अधिकारी मारिया वान केरखोव ने कहा कि संक्रमण आम तौर पर "बहुत करीबी शारीरिक संपर्क" जैसे केबिन साझा करने या बिना सुरक्षा के चिकित्सा देखभाल प्रदान करने से जुड़ा होता है।
शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द, लेकिन गंभीर मामलों में यह तेजी से श्वसन विफलता (Respiratory Failure) और शॉक में बदल सकता है। इसका कोई टीका या विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है।
देरी से दिखने वाले लक्षणों पर चिंता
WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कहा कि कुल मिलाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम कम है। क्योंकि जहाज पर हफ्तों तक करीबी माहौल में रहने के बावजूद केवल आठ लोग बीमार हुए हैं।
हालांकि स्वास्थ्य अधिकारी चिंतित हैं क्योंकि इस वायरस की इनक्यूबेशन अवधि (लक्षण दिखने का समय) छह सप्ताह तक हो सकती है, जिससे यात्रियों के घर लौटने के बाद नए मामले सामने आने की संभावना बढ़ जाती है।
भारत में पहले के मामले
भारत में पहले भी हंतावायरस संक्रमण दर्ज किए गए हैं, जिनमें तमिलनाडु के किसान, गोदाम कर्मचारी और चूहे पकड़ने वाले आदिवासी शामिल थे। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए बड़ी चिंता 'अंडरडायग्नोसिस' (गलत निदान) है। क्योंकि यह बीमारी अक्सर डेंगू या लेप्टोस्पायरोसिस जैसी दिखती है।
'एमवी होंडियस' के 11 मई को टेनेरिफ़ पहुँचने की उम्मीद है, जहां यात्रियों का मेडिकल मूल्यांकन किया जाएगा और जहाज को कीटाणुरहित (Disinfect) किया जाएगा। दोनों भारतीय क्रू सदस्यों की स्थिति अभी अज्ञात है।

