हरिवंश तीसरी बार बने राज्यसभा उपसभापति, विपक्ष ने किया चुनाव बहिष्कार
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मनोनीत राज्यसभा सांसद तीसरी दफा राज्यसभा के उपसभापति चुने गये।

हरिवंश तीसरी बार बने राज्यसभा उपसभापति, विपक्ष ने किया चुनाव बहिष्कार

हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार राज्यसभा उपसभापति निर्विरोध चुने गए। पहली बार मनोनीत सदस्य को यह पद मिला है। बता दें कि विपक्ष ने चुनाव का बहिष्कार किया था।


वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उन्हें राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए लगातार तीसरी बार निर्विरोध चुना गया है। विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण उनका चयन पहले ही तय माना जा रहा था, जिसकी औपचारिक घोषणा सुबह 11 बजे की गई।यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार है जब किसी मनोनीत सांसद को राज्यसभा के उपसभापति जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नामांकन और चुनाव प्रक्रिया

उपसभापति चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 16 अप्रैल थी। इस पद के लिए केवल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से हरिवंश के नाम का प्रस्ताव आया। राज्यसभा में सदन के नेता जे पी नड्डा (J. P. Nadda) ने प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन सांसद एस. फांगनोन कोन्याक ने किया। कुल पांच प्रस्ताव उनके समर्थन में दाखिल हुए।

विपक्षी दलों ने चुनाव का बहिष्कार किया और कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा, जिससे चुनाव बिना मुकाबले के पूरा हुआ। हालांकि, कांग्रेस समेत अन्य दलों ने लोकसभा में उपाध्यक्ष पद खाली होने का मुद्दा उठाते हुए इस चुनाव की जल्दबाजी पर सवाल खड़े किए।

क्या रहा खास?

हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था। इसके बाद 10 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) के कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट पर सदन में वापसी की।इस तरह वे देश के पहले मनोनीत सदस्य बन गए हैं, जिन्हें उपसभापति पद पर चुना गया है।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने हरिवंश को बधाई देते हुए कहा कि लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना सदन के उनके प्रति गहरे विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने उनके संतुलित नेतृत्व और अनुभव की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि उनका नया कार्यकाल भी प्रभावशाली रहेगा।

पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर

हरिवंश नारायण सिंह ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर (Chandra Shekhar) के मीडिया सलाहकार भी रह चुके हैं। सदन में उनके संयमित संचालन और निष्पक्ष रवैये के कारण उन्हें सभी दलों में सम्मान मिलता है।वे पहली बार 9 अगस्त 2018 को उपसभापति बने, फिर 14 सितंबर 2020 को दोबारा चुने गए, और अब 17 अप्रैल 2026 को तीसरी बार इस पद पर पहुंचे हैं।

विपक्ष का बहिष्कार क्यों?

कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों ने चुनाव का बहिष्कार किया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि यह विरोध हरिवंश के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार द्वारा संसदीय परंपराओं की अनदेखी के खिलाफ है।विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है और हरिवंश का मनोनयन उनके कार्यकाल समाप्त होने के तुरंत बाद किया जाना भी असामान्य है।

बढ़ा सियासी कद

राज्यसभा में वापसी और उपसभापति पद पर लगातार तीसरी बार निर्विरोध चयन के साथ ही हरिवंश नारायण सिंह का राजनीतिक कद और मजबूत हुआ है। सभी दलों के नेताओं ने उन्हें इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

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