राफेल पर पाक का झूठ बेनकाब: भारतीय वायुसेना के सभी 36 राफेल सुरक्षित
x

राफेल पर पाक का झूठ बेनकाब: भारतीय वायुसेना के सभी 36 राफेल सुरक्षित

IAF Rafale Fleet: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान का राफेल प्रोपेगैंडा ध्वस्त। वायुसेना ने सभी 36 राफेल विमानों के लिए मेंटेनेंस और ब्रिज सपोर्ट का टेंडर जारी किया।


Operation Sindoor Rafale Controversy: ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान भारतीय वायुसेना (IAF) के राफेल लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचाने का दावा करने वाले पाकिस्तान का झूठ एक बार फिर वैश्विक मंच पर बेनकाब हो गया है। भारतीय वायुसेना के एक हालिया और बेहद महत्वपूर्ण आंतरिक दस्तावेज से यह तथ्य सामने आया है कि भारत के बेड़े में मौजूद सभी 36 राफेल फाइटर जेट पूरी तरह सुरक्षित और अग्रिम मोर्चे पर मुस्तैद हैं। वायुसेना द्वारा अपने पूरे राफेल बेड़े के लिए जारी किए गए एक नए टेंडर ने इस्लामाबाद के उस नैरेटिव को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जिसमें राफेल को मार गिराने के मनगढ़ंत दावे किए जा रहे थे।


एयर हेडक्वार्टर्स के RFP से खुला राज: 36 विमानों के लिए मांगा 'ब्रिज सपोर्ट'
इंडिया टुडे की एक विशेष रक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में भारतीय वायुसेना के एयर हेडक्वार्टर्स (Air Headquarters) की तरफ से एक आधिकारिक 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (RFP) यानी निविदा जारी की गई है। इस दस्तावेज में छिपे तकनीकी आंकड़े पाकिस्तान के झूठ को तार-तार करने के लिए काफी हैं:

पूरे बेड़े के लिए टेंडर: वायुसेना ने किसी एक या दो नहीं, बल्कि फ्रांस से खरीदे गए अपने सभी 36 राफेल फाइटर जेट्स के संचालन को सुचारू रखने के लिए पांच महीने की अवधि का 'ब्रिज सपोर्ट' टेंडर मंगाया है।

क्या है ब्रिज सपोर्ट के मायने: रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी फाइटर फ्लीट के लिए 'ब्रिज सपोर्ट' की व्यवस्था तब की जाती है जब किसी दीर्घकालिक (Long-term) मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने बाकी हों। इस अंतरिम अवधि में विमानों के संचालन, लॉजिस्टिक्स और टेक्निकल सपोर्ट में कोई रुकावट न आए, इसके लिए यह ब्रिज सपोर्ट बेहद जरूरी होता है।

2,250 फ्लाइंग ऑवर्स का प्लान: वायुसेना के इस गुप्त दस्तावेज के अनुसार, सितंबर 2026 के आगे राफेल फ्लीट के मेंटेनेंस और टेक्निकल बैकअप के लिए यह पूरी प्लानिंग की गई है, जिसके तहत अगले पांच महीनों में इन विमानों द्वारा 2,250 घंटे की उड़ान भरने का अनुमानित लक्ष्य तय किया गया है।

फ्रांस से आए 36 सूरमा: एक भी विमान को खरोंच तक नहीं
भारत ने साल 2016 में फ्रांस सरकार के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एक अंतर-सरकारी समझौता किया था। इस सौदे के तहत तय समय सीमा के भीतर सभी 36 राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को सौंप दिए गए थे, जिन्हें अंबाला और हाशिमारा जैसे रणनीतिक एयरबेस पर तैनात किया गया है।

वायुसेना के ताजा दस्तावेज की क्रोनोलॉजी यह साफ करती है कि यदि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के दावों के मुताबिक एक भी राफेल विमान को आंशिक नुकसान भी पहुंचा होता या वह दुर्घटनाग्रस्त हुआ होता, तो वायुसेना कभी भी 'सभी 36 राफेल विमानों' के लिए एक साथ ब्रिज सपोर्ट और मेंटेनेंस का टेंडर जारी नहीं कर सकती थी। यह तकनीकी दस्तावेज खुद ब खुद साबित करता है कि भारत की हवाई ताकत का यह सबसे मारक हथियार आज भी 100% परिचालन क्षमता के साथ सेवा में तैनात है।

धूल धूसरित हुआ इस्लामाबाद का 'फेक नैरेटिव'
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही पाकिस्तानी सेना (ISPR) और वहां की सरकार अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लगातार यह दुष्प्रचार कर रही थी कि उस हवाई संघर्ष के दौरान उन्होंने भारतीय राफेल विमानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान का यह प्रोपेगैंडा अपनी घरेलू जनता को सांत्वना देने और अपनी सेना की गिरती साख को बचाने के लिए गढ़ा गया था। हालांकि, भारतीय वायुसेना के इस पुख्ता और आधिकारिक दस्तावेज के सामने आने के बाद रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान अब वैश्विक स्तर पर एक बार फिर हंसी का पात्र बन गया है।


Read More
Next Story