अंदर तकरार, बाहर एकता,  INDIA गठबंधन में कांग्रेस फिर बनी सबसे अहम कड़ी
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अंदर तकरार, बाहर एकता, INDIA गठबंधन में कांग्रेस फिर बनी सबसे अहम कड़ी

INDIA गठबंधन की बैठक में सहयोगी दलों ने कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए, लेकिन साझा एजेंडे पर सहमति बनाकर विपक्ष ने एकजुटता का संदेश दिया।


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जब राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और INDIA गठबंधन के अन्य बड़े नेताओं के साथ मीडिया के सामने बैठक में बनी पांच सूत्रीय सहमति को पढ़ रहे थे, तब तस्वीर पूरी तरह एकजुट विपक्ष की दिख रही थी। लेकिन दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में करीब ढाई घंटे चली बैठक के भीतर का माहौल कुछ अलग था। यहां सहयोगी दलों ने खुलकर कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए और अपनी नाराजगी भी जाहिर की।

फिर भी बैठक का अंत कांग्रेस के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि तमाम मतभेदों के बावजूद गठबंधन के सभी दल एक साझा एजेंडे पर सहमत होते नजर आए।

पांच सूत्रीय एजेंडे पर बनी सहमति

बैठक में शामिल 23 विपक्षी दलों ने पांच अहम मुद्दों पर सहमति जताई। सबसे पहले, सभी दल भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र लिखकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी को लेकर अपनी चिंताएं दोहराएंगे।दूसरा, विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी रखेगा।तीसरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की जाएगी, जिसमें अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो।चौथा, INDIA गठबंधन के नेता हर दो महीने में बैठक करेंगे। अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है।

पांचवां, संसद सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में गठबंधन के नेताओं की नियमित बैठकें जारी रहेंगी ताकि सदन के भीतर साझा रणनीति बनाई जा सके।

बैठक के भीतर कांग्रेस पर उठे सवाल

सार्वजनिक तौर पर भले ही एकजुटता का संदेश दिया गया हो, लेकिन बंद कमरे में कई सहयोगी दलों ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया।समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर खुद को भाजपा के खिलाफ अकेला योद्धा बताने का आरोप लगाया।सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने केरल चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व द्वारा पिनराई विजयन पर किए गए हमलों पर नाराजगी जताई।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सहयोगियों से जो समझौते करता है, उन्हें कई बार पार्टी की राज्य इकाइयां कमजोर कर देती हैं।एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले और अन्य नेताओं ने भी आरोप लगाया कि तमिलनाडु में चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

कांग्रेस की केंद्रीय भूमिका पर बनी सहमति

दिलचस्प बात यह रही कि आलोचनाओं के बावजूद अधिकांश नेताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से यह स्वीकार किया कि विपक्षी गठबंधन को एकजुट रखने में कांग्रेस की भूमिका सबसे अहम है।कभी कांग्रेस को चुनौती देने वाले कई क्षेत्रीय नेता अब अपने-अपने राजनीतिक संकटों से जूझ रहे हैं।नीतीश कुमार अब एनडीए का हिस्सा हैं और पहले जैसी निर्णायक भूमिका में नहीं दिखते।अरविंद केजरीवाल भी INDIA गठबंधन से बाहर हैं और दिल्ली की राजनीति में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।शरद पवार और उद्धव ठाकरे के दल भी महाराष्ट्र में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

बदला हुआ ममता बनर्जी का रुख

एक समय कांग्रेस की सबसे मुखर आलोचक रहीं ममता बनर्जी का रुख भी इस बैठक में बदला हुआ नजर आया।रिपोर्टों के अनुसार, हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष के बीच ममता ने ही कांग्रेस से यह बैठक बुलाने का आग्रह किया था।पिछले वर्षों में जहां वह खुद को विपक्ष के वैकल्पिक शक्ति केंद्र के रूप में पेश करती थीं, वहीं इस बैठक में उन्होंने अपेक्षाकृत संयमित और सहयोगी भूमिका निभाई।

राहुल गांधी ने स्वीकार की आलोचना

बैठक में राहुल गांधी ने करीब 15 मिनट तक अपनी बात रखी। बताया जाता है कि उन्होंने कांग्रेस और खुद पर लगाए गए कई आरोपों को खुले मन से सुना और स्वीकार किया कि सहयोगियों की कुछ शिकायतें वाजिब हैं। उन्होंने कहा कि कई सहयोगी दलों ने शुरुआत में उनके "वोट चोरी" अभियान का समर्थन नहीं किया था, लेकिन अब उसकी अहमियत को समझ रहे हैं।राहुल ने सभी नेताओं से पुराने मतभेद भुलाकर आगे बढ़ने और आपसी विश्वास मजबूत करने की अपील की।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केरल में पिनराई विजयन के खिलाफ उनके बयान चुनावी राजनीति का हिस्सा थे और उनमें कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी।

उमर अब्दुल्ला ने दी एकजुटता की नसीहत

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी बैठक में विपक्षी एकता पर जोर दिया।उन्होंने नेताओं को याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन की एकजुटता की वजह से ही भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी।उमर ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस ही वह कड़ी है जो विभिन्न क्षेत्रीय दलों को एक साथ जोड़ सकती है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहुंच बाकी दलों से कहीं अधिक है।

अब सवाल नेतृत्व का

बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यह नहीं रह गया कि INDIA गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, बल्कि यह है कि कांग्रेस किस तरह का नेतृत्व देगी।सहयोगी दल चाहते हैं कि कांग्रेस अधिक उदार, समावेशी और सहयोगी रवैया अपनाए।अखिलेश यादव ने भी कांग्रेस से "बड़ा दिल" दिखाने की अपील की।

उत्तर प्रदेश पर टिकी नजरें

आने वाले समय में भाजपा के खिलाफ सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई उत्तर प्रदेश में मानी जा रही है।सूत्रों के मुताबिक, 2027 विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस करीब 120 सीटों की मांग कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी 65 से 80 सीटों तक देने के पक्ष में बताई जा रही है। हालांकि सीट बंटवारे पर बातचीत अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन यह साफ है कि INDIA गठबंधन का भविष्य काफी हद तक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के रिश्तों पर निर्भर करेगा।

आगे क्या?

अगस्त में हैदराबाद में होने वाली अगली बैठक तक संसद का मानसून सत्र समाप्त हो चुका होगा। तब तक परिसीमन, महिला आरक्षण लागू करने या 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे मुद्दों पर भी तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, तमाम मतभेदों और आलोचनाओं के बावजूद INDIA गठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि बैठक के भीतर भले ही कांग्रेस को कड़ी बातें सुननी पड़ी हों, लेकिन राजनीतिक रूप से वह पहले से अधिक केंद्रीय भूमिका में नजर आ रही है।

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