भारत का शक्ति प्रदर्शन, तनावपूर्ण जलमार्ग से सुरक्षित निकला गैस जहाज
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भारत का 'शक्ति' प्रदर्शन, तनावपूर्ण जलमार्ग से सुरक्षित निकला गैस जहाज

45,000 टन रसोई गैस लेकर निकला मार्शल आइलैंड्स का जहाज। अमेरिकी नाकाबंदी के बाद इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पार करने वाला पहला बड़ा टैंकर...


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नई दिल्ली, 3 मई 2026: अंतरराष्ट्रीय शिपिंग बाधाओं और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच, भारत से जुड़ा एक एलपीजी (LPG) टैंकर सफलतापूर्वक 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को पार करने में सफल रहा है। 'सर्व शक्ति' नामक इस जहाज का यह सफर भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश वर्तमान में एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट से जूझ रहा है।

शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाले 'सर्व शक्ति' टैंकर को शनिवार को ईरान के लारक और क्येश्म (Qeshm) द्वीपों से गुजरने के बाद ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ते हुए देखा गया। इस जहाज पर लगभग 45,000 टन एलपीजी लदी हुई है।

भारतीय चालक दल और सुरक्षा उपाय

यह विशाल गैस वाहक (Very Large Gas Carrier) पहले भी फारस की खाड़ी और भारतीय बंदरगाहों के बीच संचालित होता रहा है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद से अपनाई जा रही सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत, यह जहाज अपनी मंजिल 'भारत' और अपने 'भारतीय चालक दल' की जानकारी प्रसारित (Broadcast) कर रहा है। ताकि किसी भी गलतफहमी या हमले से बचा जा सके।

ब्लूमबर्ग द्वारा समीक्षा किए गए एक शिपिंग दस्तावेज के अनुसार, सरकारी स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को इस कार्गो के खरीदार के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। हालांकि इस विषय पर आईओसी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

अमेरिकी नाकाबंदी के बाद पहला सफल प्रयास

'सर्व शक्ति' की यह यात्रा हफ्तों पहले शुरू हुई अमेरिकी नाकाबंदी के बाद से किसी भारत-लिंक्ड टैंकर द्वारा देखी गई पहली सफल पारगमन (Transit) है। इस नाकाबंदी का उद्देश्य ईरान से जुड़े जहाजों को रोकना था, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से यातायात को लगभग शून्य कर दिया था। पिछले महीने एक संक्षिप्त अवधि के लिए जलडमरूमध्य को खोला गया था। लेकिन अशांति के कारण इसे फिर से बंद करना पड़ा। तब से बाहर निकलने वाला यह सबसे बड़े जहाजों में से एक है।

भारत में गहराता रसोई गैस संकट

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और एलपीजी के दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता के रूप में, भारत मध्य पूर्व से आपूर्ति में व्यवधान के कारण पैदा हुई कमी को दूर करने के लिए संघर्ष कर रहा है। रसोई गैस की कमी के कारण देश के कई हिस्सों में घबराहट में खरीदारी (Panic buying), लंबी कतारें और खपत में कमी देखी जा रही है।

फरवरी के अंत में जब ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले शुरू हुए, तब से नई दिल्ली ने एलपीजी वाहकों की सुरक्षित आवाजाही को प्राथमिकता दी है। सरकार ने घरेलू बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे टैंकरों को बर्थिंग और अनलोडिंग के लिए प्राथमिकता दें। साथ ही घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

कूटनीतिक प्रयास और वैकल्पिक मार्ग

अप्रैल में ईरान ने जलमार्ग को फिर से खोलने की घोषणा की थी। लेकिन बाद में वहां की सेना द्वारा जहाजों पर गोलीबारी करने की खबरें आईं, जिससे कई जहाजों को वापस मुड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इससे पहले, भारत से जुड़ा एक कच्चा तेल टैंकर 'देश गरिमा' (Desh Garima) अपने ट्रांसपोंडर सिग्नल बंद करके वहां से निकलने में कामयाब रहा था।

मौजूदा संघर्ष के दौरान, भारत तेहरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से अब तक होर्मुज के रास्ते आठ एलपीजी जहाजों को निकालने में सफल रहा है। इसके साथ ही आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए वैकल्पिक मार्गों की भी तलाश की जा रही है।

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