
भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक समझौता, 15 साल में आएगा 20 अरब डॉलर का निवेश
27 अप्रैल 2026 को भारत और न्यूजीलैंड ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने सभी भारतीय उत्पादों को ड्यूटी-फ्री एक्सेस दिया है, जबकि न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा।
27 अप्रैल 2026 की तारीख भारत और न्यूजीलैंड के आर्थिक संबंधों के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। दोनों देशों ने एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो न केवल व्यापार बल्कि निवेश और लोगों के बीच आवाजाही (Mobility) को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे "पीढ़ियों में एक बार होने वाला" (Once-in-a-generation) सौदा करार दिया है।
भारतीय उत्पादों के लिए पूरी तरह खुला न्यूजीलैंड का बाज़ार
इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि न्यूजीलैंड ने भारत से होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात को ड्यूटी-फ्री (सीमा शुल्क मुक्त) एक्सेस देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका सीधा मतलब यह है कि भारतीय कपड़ा (Textiles), चमड़ा, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, और इंजीनियरिंग सामान अब बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के न्यूजीलैंड के बाजारों में बिकेंगे। इससे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को जबरदस्त मजबूती मिलेगी और लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। बदले में, भारत ने न्यूजीलैंड के 70.03 प्रतिशत उत्पादों के लिए अपने बाजार के दरवाजे खोले हैं।
भारतीय किसानों और संवेदनशील क्षेत्रों का रखा गया ख्याल
व्यापार को उदार बनाने के साथ-साथ भारत सरकार ने अपने घरेलू उद्योगों, विशेषकर किसानों के हितों की रक्षा का पूरा ध्यान रखा है। कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है ताकि उन पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इनमें डेयरी उत्पाद (दूध, पनीर, दही), प्याज, दालें, मक्का, बादाम, चीनी और खाद्य तेल जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा हथियारों और गोला-बारूद जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को भी रियायतों से बाहर रखा गया है।
20 अरब डॉलर का निवेश और 15 साल का रोडमैप
यह समझौता सिर्फ सामान बेचने तक सीमित नहीं है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करने की कसम खाई है। यह निवेश मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे (Infrastructure), नई तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। यह दीर्घकालिक सहयोग भारत की विकास यात्रा में न्यूजीलैंड को एक महत्वपूर्ण साझेदार बनाता है।
भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए 'वीजा की बौछार'
युवाओं और पेशेवरों के लिए यह समझौता किसी वरदान से कम नहीं है। अब हर साल 5,000 कुशल भारतीय पेशेवर (जैसे आईटी इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, नर्स और कंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट) तीन साल के लिए न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे। इतना ही नहीं, योग प्रशिक्षकों और पारंपरिक रसोइयों (Chefs) के लिए भी विशेष कोटा तय किया गया है।
छात्रों के लिए पहली बार एक विशेष 'एनेक्स' जोड़ा गया है। भारतीय छात्र अब पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे काम कर सकेंगे। पढ़ाई पूरी करने के बाद बैचलर्स और मास्टर्स के छात्रों को 3 साल का और पीएचडी करने वालों को 4 साल का 'पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा' मिलेगा। ऐसा समझौता न्यूजीलैंड ने पहली बार किसी देश के साथ किया है।
आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान
इस समझौते की एक अनोखी बात यह है कि इसमें 'पारंपरिक चिकित्सा' को बढ़ावा देने का प्रावधान है। यह भारत के 'आयुष' (AYurveda, Yoga, Unani, Siddha, Homeopathy) सिस्टम को वैश्विक पहचान दिलाने में मदद करेगा। न्यूजीलैंड के स्थानीय 'माओरी' स्वास्थ्य प्रथाओं के साथ मिलकर आयुर्वेद पर शोध और सहयोग किया जाएगा, जिससे वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
एग्री-टेक और व्यापार की नई उम्मीदें
न्यूजीलैंड अपनी कृषि तकनीक के लिए जाना जाता है। समझौते के तहत एक 'एग्री-टेक्नोलॉजी एक्शन प्लान' शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से न्यूजीलैंड भारत को सेब, कीवी और शहद के उत्पादन में अपनी विशेषज्ञता साझा करेगा, जिससे भारतीय किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ेगी।
लक्ष्य: 5 बिलियन डॉलर का व्यापार
फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध अच्छे हैं, लेकिन इस समझौते का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 5 बिलियन डॉलर तक पहुँचाना है। दवाइयों (Pharmaceuticals) के क्षेत्र में भी भारत को न्यूजीलैंड में बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है।

